भारतीय शेयर बाजार में विदेशी निवेशकों की जोरदार वापसी, एक हफ्ते में निवेश किए 1 अरब डॉलर से अधिक

भारतीय शेयर बाजार में विदेशी निवेशकों की वापसी हुई है। एक हफ्ते में 1 अरब डॉलर से अधिक का निवेश हुआ है, जो जून 2025 के बाद की सबसे बड़ी खरीदारी है।

Jul 14, 2026 - 09:35
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भारतीय शेयर बाजार में विदेशी निवेशकों की जोरदार वापसी, एक हफ्ते में निवेश किए 1 अरब डॉलर से अधिक

भारतीय शेयर बाजार में एक बार फिर से रौनक लौट आई है और इसका मुख्य कारण विदेशी निवेशकों का बदलता रुख है। पिछले कुछ समय से भारतीय बाजार को लेकर सतर्क और संशय में नजर आ रहे विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी एफआईआई ने अचानक अपनी रणनीति बदल ली है और बड़े पैमाने पर खरीदारी शुरू कर दी है। आंकड़ों के अनुसार, महज एक हफ्ते के भीतर विदेशी संस्थागत निवेशकों ने भारतीय शेयरों में 1 अरब डॉलर से ज्यादा का भारी-भरकम निवेश किया है। ब्लूमबर्ग द्वारा जारी किए गए आंकड़ों पर गौर करें तो जून 2025 के बाद से यह किसी भी एक हफ्ते में विदेशी निवेशकों द्वारा की गई सबसे बड़ी खरीदारी के रूप में दर्ज की गई है। यह खबर भारतीय निवेशकों के लिए एक बड़ी राहत लेकर आई है क्योंकि जब विदेशी निवेशक बाजार में पैसा लगाते हैं, तो इसका सीधा सकारात्मक असर छोटे निवेशकों के पोर्टफोलियो पर भी पड़ता है और बाजार में एक नई ऊर्जा का संचार होता है।

आंकड़ों में दिख रही है बाजार की मजबूती

विदेशी निवेशकों की यह शानदार वापसी केवल एक दिन का अस्थायी रुझान नहीं है बल्कि यह एक निरंतरता को दर्शाता है। 9 जुलाई तक के महज चार दिनों के आंकड़ों को देखें तो ग्लोबल फंड्स ने 1 अरब 30 करोड़ डॉलर मूल्य के भारतीय शेयर खरीदे हैं। इसके अतिरिक्त, शुक्रवार को प्राप्त हुए शुरुआती प्रोविजनल आंकड़ों से यह जानकारी मिली है कि इन निवेशकों ने 272 मिलियन डॉलर के शेयर और खरीदे हैं। यह लगातार चौथा हफ्ता है जब विदेशी निवेशक भारतीय बाजार में शुद्ध खरीदार यानी नेट बायर्स की भूमिका में बने हुए हैं। एक आम आदमी के नजरिए से देखा जाए तो बाजार में इस बड़े निवेश के आने से कंपनियों के शेयरों को एक मजबूत आधार मिलता है और इससे न केवल रिटेल निवेशकों की बचत सुरक्षित होती है बल्कि म्यूचुअल फंड्स के रिटर्न में भी सुधार होने की संभावनाएं काफी मजबूत हो जाती हैं।

ब्रोकरेज फर्म्स का बदला नजरिया और सकारात्मक संकेत

दुनिया की जानी-मानी ब्रोकरेज फर्म गोल्डमैन सैक्स के रणनीतिकारों ने 11 जुलाई को जारी अपने एक नोट में इस भारी-भरकम निवेश के पीछे की ठोस वजहों का विस्तार से विश्लेषण किया है। उनके अनुसार, हाल के हफ्तों में भारत की आर्थिक तस्वीर में काफी सुधार देखने को मिला है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कमोडिटी की कीमतों में गिरावट आई है और भारतीय रुपये की स्थिति डॉलर के मुकाबले स्थिर हुई है। इसके साथ ही, मजबूत घरेलू विकास दर और दूसरी तिमाही में कंपनियों की कमाई बेहतर रहने की उम्मीदों ने विदेशी निवेशकों का भरोसा फिर से जीता है। सिटीग्रुप ने भी भारतीय बाजार को लेकर अपनी सकारात्मक राय जाहिर की है। सिटीग्रुप का कहना है कि भारतीय बाजार में इस समय जोखिम के मुकाबले मुनाफे की संभावना काफी अनुकूल नजर आ रही है। कंपनियों की कमाई के अनुमानों को देखते हुए बाजार का मौजूदा वैल्युएशन पूरी तरह से जायज लग रहा है।

निफ्टी 50 की शानदार रिकवरी और भविष्य की राह

विदेशी फंड्स की इस वापसी से शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांकों को सीधे तौर पर मजबूती मिल रही है। इसी साल अप्रैल में अपने एक साल के निचले स्तर पर जाने के बाद से निफ्टी 50 इंडेक्स में अब तक लगभग 8 प्रतिशत का शानदार उछाल आ चुका है। कच्चे तेल की गिरती कीमतें और स्थिर होता रुपया कॉरपोरेट जगत की कमाई के आउटलुक को लगातार बेहतर बना रहे हैं। जब कंपनियों की आर्थिक स्थिति मजबूत होती है, तो उसका सीधा लाभ आम शेयरधारकों को उनके निवेश की बढ़ती वैल्यू के रूप में प्राप्त होता है। हालांकि, आंकड़ों का दूसरा पहलू यह भी है कि लगातार चार हफ्तों की इस बंपर खरीदारी के बावजूद, इस पूरे साल में विदेशी निवेशक अभी भी लगभग 27 अरब डॉलर मूल्य के शेयरों के शुद्ध बिकवाल बने हुए हैं। इसका सीधा मतलब यह है कि बाजार में विदेशी निवेश का आना शुरू तो हुआ है, लेकिन पहले जो बड़ी मात्रा में पैसा निकाला गया था, उसकी पूरी भरपाई और एक लंबी स्थायी तेजी के लिए अभी बाजार को थोड़ा और इंतजार करना होगा।

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