ईरान पर अमेरिका का तीसरा बड़ा हमला बंदर अब्बास और किश आइलैंड धमाकों से दहले

अमेरिका ने ईरान के बंदर अब्बास और किश आइलैंड पर लगातार तीसरी रात हमले किए। राष्ट्रपति ट्रंप ने होर्मुज में नाकेबंदी और 20 प्रतिशत शुल्क की घोषणा की है।

Jul 14, 2026 - 09:35
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ईरान पर अमेरिका का तीसरा बड़ा हमला बंदर अब्बास और किश आइलैंड धमाकों से दहले

मध्य पूर्व में तनाव एक नए और खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है क्योंकि अमेरिकी सेना ने ईरान के भीतर लगातार तीसरी रात भीषण हमले किए हैं। सोमवार की रात हुए इन ताजा हमलों ने ईरान के दक्षिणी हिस्से को हिलाकर रख दिया है। विशेष रूप से बंदर अब्बास बंदरगाह शहर और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण किश आइलैंड में कई बड़े धमाकों की खबर मिली है। यह सैन्य कार्रवाई वीकेंड पर हुई झड़पों के बाद वाशिंगटन और तेहरान के बीच बढ़ते तनाव का परिणाम है। यूएस सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने आधिकारिक तौर पर इन हमलों की पुष्टि की है और बताया है कि यह पूरा ऑपरेशन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सीधे निर्देशों के तहत चलाया जा रहा है।

रणनीतिक ठिकानों पर सटीक निशाना

यूएस सेंट्रल कमांड ने अपने बयान में स्पष्ट किया कि सोमवार को किए गए हमलों का मुख्य लक्ष्य ईरान के तटीय निगरानी सिस्टम, ड्रोन इंफ्रास्ट्रक्चर और मिसाइल क्षमताओं को नष्ट करना था। अमेरिका का उद्देश्य होर्मुज जलडमरूमध्य में नागरिक जहाजों और अंतरराष्ट्रीय वाणिज्यिक शिपिंग के लिए ईरान द्वारा पैदा किए जा रहे खतरों को पूरी तरह खत्म करना है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में CENTCOM ने कहा कि कमांडर-इन-चीफ के निर्देश पर शुरू किए गए ये हमले ईरानी सेना को भारी नुकसान पहुंचाना जारी रखेंगे। इन हमलों के जरिए अमेरिका यह सुनिश्चित करना चाहता है कि ईरान भविष्य में निर्दोष नागरिकों और व्यापारिक जहाजों पर हमला करने की स्थिति में न रहे।

धमाकों से गूंजे ईरान के कई शहर

शुरुआती खबरों में केवल बंदर अब्बास और किश आइलैंड पर हमलों की बात कही गई थी लेकिन बाद में संघर्ष का दायरा बढ़ता हुआ दिखा। ईरान की फार्स समाचार एजेंसी के अनुसार बुशहर प्रांत के जाम शहर और केशम द्वीप पर भी कई शक्तिशाली धमाके सुने गए। अमेरिकी सेना ने दावा किया है कि उन्होंने ईरान के अंदर दर्जनों ठिकानों को निशाना बनाया है जिनमें एयर डिफेंस सिस्टम, रडार इंस्टॉलेशन और छोटी नौसैनिक नावें शामिल हैं और इन हमलों का व्यापक उद्देश्य ईरान की तटीय सुरक्षा पंक्ति को तोड़ना और उसकी जवाबी कार्रवाई करने की क्षमता को पंगु बनाना है।

पिकएक्स माउंटेन को नष्ट करने की चेतावनी

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया है कि यह सैन्य अभियान अभी और लंबा चल सकता है। एक इंटरव्यू के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति ने चेतावनी दी कि ईरान पर हमले और तेज किए जाएंगे। उन्होंने विशेष रूप से कुह-ए-कोलांग गज़ ला का जिक्र किया जिसे पिकएक्स माउंटेन के नाम से जाना जाता है। यह मध्य ईरान में ज़ाग्रोस पर्वत श्रृंखला के भीतर स्थित एक अत्यंत सुरक्षित और मजबूत परमाणु सुविधा है। ट्रंप ने कंजर्वेटिव रेडियो होस्ट ह्यू हेविट से बात करते हुए कहा कि हम पिकएक्स माउंटेन को खत्म करने जा रहे हैं और ईरानियों को इसके लिए तैयार रहना चाहिए। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि ईरान के खिलाफ यह सैन्य अभियान आने वाले 2 से 3 हफ्ते और चल सकता है।

होर्मुज में नाकेबंदी और 20 प्रतिशत शुल्क

समुद्री सुरक्षा को लेकर ट्रंप ने एक बड़ा ऐलान करते हुए होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरानी नाकेबंदी को फिर से लागू कर दिया है। यह कदम रविवार को ओमान के तट के पास एक कंटेनर जहाज पर हुए ईरानी हमले के जवाब में उठाया गया है। ट्रंप ने घोषणा की है कि अब अमेरिकी सेना होर्मुज के संरक्षक के तौर पर काम करेगी। इस नई व्यवस्था के तहत ईरानी जहाजों को इस रणनीतिक जलमार्ग से गुजरने की अनुमति नहीं होगी। वहीं अन्य देशों के जहाजों से सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए योग्य कार्गो पर 20 प्रतिशत शुल्क लिया जाएगा। ट्रंप ने स्पष्ट किया कि यह शुल्क क्षेत्र में सुरक्षा बनाए रखने के खर्च को पूरा करने के लिए लिया जा रहा है। फारस की खाड़ी का यह प्रवेश द्वार दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा चोकपॉइंट्स में से एक है जहां से वैश्विक कच्चे तेल का लगभग पांचवां हिस्सा गुजरता है।

ईरान की प्रतिक्रिया और वैश्विक चिंता

ईरान ने अमेरिका के इन दावों और कार्रवाइयों का कड़ा विरोध किया है। इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने एक बयान जारी कर कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य ईरान का संप्रभु क्षेत्र है और वाशिंगटन को इसमें दखल देने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है। IRGC ने अमेरिकी सेना को मनमानी करने वाली और बच्चों की हत्या करने वाली सेना करार दिया और यह ताजा टकराव ऐसे समय में हुआ है जब तनाव कम करने के लिए 60 दिन की अंतरिम व्यवस्था की गई थी लेकिन अब कूटनीति की संभावनाएं धूमिल होती दिख रही हैं। संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने भी इस स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि यह संघर्ष बड़े पैमाने पर युद्ध में बदलता है तो इसके परिणाम पूरी दुनिया के लिए भयानक होंगे।

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