अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम का अचानक निधन, डोनाल्ड ट्रंप के बेहद करीबी थे
अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम का दक्षिण कैरोलिना में अचानक निधन हो गया है। वे डोनाल्ड ट्रंप के करीबी सहयोगी और प्रमुख रिपब्लिकन नेता थे।
अमेरिका से एक अत्यंत दुखद और चौंकाने वाली खबर सामने आई है, जहां वरिष्ठ अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम का निधन हो गया है। उनके कार्यालय द्वारा सोशल मीडिया पर जारी किए गए एक आधिकारिक बयान के अनुसार, रिपब्लिकन पार्टी के इस दिग्गज नेता ने बीते शनिवार को अंतिम सांस ली। लिंडसे ग्राहम के निधन की खबर ने अमेरिकी राजनीति में शोक की लहर पैदा कर दी है, क्योंकि वे न केवल एक अनुभवी राजनेता थे, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी पहचान रखते थे।
अचानक हुई बीमारी के कारण निधन
यूएस सीनेटर लिंडसे ग्राहम के कार्यालय ने उनके निधन की पुष्टि करते हुए बताया कि शनिवार शाम को दक्षिण कैरोलिना में उनका देहांत हुआ। आधिकारिक वक्तव्य में कहा गया है कि रिपब्लिकन पार्टी के इस वरिष्ठ नेता का निधन एक छोटी और अचानक हुई बीमारी की वजह से हुआ है। हालांकि, कार्यालय की ओर से जारी किए गए इस संक्षिप्त बयान में मौत के सटीक कारणों के बारे में विस्तार से जानकारी नहीं दी गई है। इस अचानक हुई घटना ने उनके समर्थकों और राजनीतिक गलियारों में सभी को स्तब्ध कर दिया है, क्योंकि उनकी बीमारी के बारे में पहले से कोई जानकारी सार्वजनिक नहीं थी।
डोनाल्ड ट्रंप के सबसे भरोसेमंद साथी
लिंडसे ग्राहम को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सबसे करीबी और भरोसेमंद सहयोगियों में गिना जाता था। वे न केवल राजनीतिक रूप से ट्रंप के साथ थे, बल्कि व्यक्तिगत स्तर पर भी उनके गहरे संबंध थे। उन्हें अक्सर राष्ट्रपति ट्रंप के साथ गोल्फ कोर्स में नियमित तौर पर देखा जाता था, जहां वे खेल के साथ-साथ महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा करते थे। ग्राहम, ट्रंप के उन चुनिंदा सलाहकारों में शामिल थे जिनसे राष्ट्रपति अक्सर विभिन्न मुद्दों पर राय लेते थे। विशेष रूप से विदेशी नीति के मामलों में ट्रंप उनकी सलाह को काफी महत्व देते थे और वे प्रशासन के निर्णयों में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते थे।
राजनीतिक सफर और राष्ट्रपति पद की दावेदारी
लिंडसे ग्राहम का राजनीतिक सफर काफी लंबा और प्रभावशाली रहा। वे पहली बार 2002 में अमेरिकी सीनेट के लिए चुने गए थे और तब से वे दक्षिण कैरोलिना का प्रतिनिधित्व कर रहे थे। इससे पहले, 1990 के दशक में वे संसद के सदस्य के रूप में भी अपनी सेवाएं दे चुके थे। अपनी आक्रामक विदेश नीति के लिए पहचाने जाने वाले ग्राहम ने 2016 के चुनाव प्रचार के दौरान रिपब्लिकन पार्टी की ओर से राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनने का एक छोटा सा प्रयास भी किया था। हालांकि, उस समय वे सफल नहीं हुए, लेकिन डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद वे उनके सबसे मजबूत स्तंभों में से एक बनकर उभरे।
ईरान और रूस पर सख्त रुख
विदेशी मामलों में लिंडसे ग्राहम हमेशा से ही एक सख्त रुख अपनाने के समर्थक रहे थे और विशेष रूप से ईरान के मामले में उनकी नीतियां काफी कठोर थीं। 1990 के दशक से ही उन्होंने ईरान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग करने और उसके मिसाइल व परमाणु कार्यक्रमों को सीमित करने वाली नीतियों का पुरजोर समर्थन किया था। पिछले साल जब डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान की परमाणु साइटों पर हमला करने का विचार किया था, तब ग्राहम ने उस निर्णय का भी समर्थन किया था। इसके अलावा, कुछ महीने पहले ईरान के साथ शुरू हुए अमेरिका के टकराव के दौरान भी वे अमेरिकी कार्रवाई के पक्ष में खड़े नजर आए थे।
अंतिम समय तक सक्रियता
अपने निधन से ठीक पहले तक लिंडसे ग्राहम राजनीतिक रूप से पूरी तरह सक्रिय थे। उन्होंने ईरान और रूस जैसे महत्वपूर्ण विदेशी नीति के मुद्दों पर राष्ट्रपति ट्रंप को निरंतर सलाह दी थी। अभी बीते शुक्रवार को ही उन्होंने अमेरिकी प्रशासन के साथ मिलकर रूस पर प्रतिबंधों को आगे बढ़ाने के निर्णय का ऐलान किया था। उनके अचानक चले जाने से रिपब्लिकन पार्टी ने एक ऐसा नेता खो दिया है जो अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और अमेरिकी हितों की रक्षा के लिए हमेशा मुखर रहता था।
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