आरजीएचएस योजना: विधायक रितु बनावत को नहीं मिली कैशलेस दवा, बढ़ी मुश्किलें

राजस्थान की आरजीएचएस योजना में भुगतान संकट के कारण विधायक रितु बनावत को कैशलेस दवा नहीं मिली। जानें पूरी खबर।

Mar 27, 2026 - 18:35
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आरजीएचएस योजना: विधायक रितु बनावत को नहीं मिली कैशलेस दवा, बढ़ी मुश्किलें

राजस्थान सरकार की महत्वाकांक्षी राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (आरजीएचएस) के क्रियान्वयन पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। बयाना से निर्दलीय विधायक रितु बनावत को जयपुर के एक निजी अस्पताल में इस योजना के तहत कैशलेस दवाएं देने से मना कर दिया गया। विधायक ने बताया कि उन्हें अपने और अपने बेटे के आंखों के इलाज के दौरान दवाइयों के लिए नकद भुगतान करना पड़ा। इस घटना ने प्रदेश में सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए चल रही स्वास्थ्य सेवाओं की वर्तमान स्थिति को उजागर कर दिया है।

विधायक के साथ हुई घटना का विवरण

विधायक रितु बनावत के अनुसार, वह अपनी और अपने पुत्र की आंखों की जांच कराने के लिए आरजीएचएस से संबद्ध एक निजी अस्पताल पहुंची थीं। चिकित्सक द्वारा परामर्श दिए जाने के बाद जब वह अस्पताल के मेडिकल स्टोर पर दवा लेने गईं, तो वहां मौजूद कर्मचारियों ने कैशलेस दवा देने से स्पष्ट इनकार कर दिया। विधायक ने आरोप लगाया कि उन्हें मजबूरन अपनी जेब से पैसे देकर दवाइयां खरीदनी पड़ीं। उन्होंने इस स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि जब एक जनप्रतिनिधि को योजना का लाभ नहीं मिल रहा, तो आम जनता की स्थिति और भी विकट होगी।

बकाया भुगतान और फार्मेसी संचालकों का विरोध

आरजीएचएस योजना में आ रही इस बाधा का मुख्य कारण सरकार द्वारा अस्पतालों और फार्मेसी संचालकों का बकाया भुगतान न करना बताया जा रहा है। राजस्थान एलायंस ऑफ हॉस्पिटल एसोसिएशंस (राहा) के अनुसार, पिछले 8 से 9 महीनों से करोड़ों रुपये का भुगतान लंबित है। भुगतान न मिलने के कारण दवा आपूर्ति करने वाली कंपनियों ने उधार में दवाएं देना बंद कर दिया है और इसी के विरोध में कई निजी अस्पतालों और फार्मेसी केंद्रों ने 25 मार्च से ओपीडी में कैशलेस दवा वितरण को अस्थायी रूप से रोक दिया है।

50 लाख लाभार्थियों पर संकट

इस व्यवस्था के ठप होने से राजस्थान के लगभग 50 लाख लाभार्थियों पर सीधा असर पड़ रहा है। इनमें सेवारत सरकारी कर्मचारी और पेंशनर्स शामिल हैं, जो अपनी नियमित दवाओं और उपचार के लिए पूरी तरह से आरजीएचएस कार्ड पर निर्भर हैं। विशेष रूप से गंभीर बीमारियों से जूझ रहे बुजुर्गों और पेंशनभोगियों के लिए नकद भुगतान कर दवाएं खरीदना एक बड़ी आर्थिक चुनौती बन गया है और प्रदेश के विभिन्न जिलों से लगातार ऐसी खबरें आ रही हैं जहां मरीजों को कैशलेस सुविधा के अभाव में वापस लौटना पड़ रहा है।

राजनीतिक प्रतिक्रिया और सरकार का रुख

इस मामले को लेकर प्रदेश में राजनीतिक सरगर्मी भी बढ़ गई है। पूर्व चिकित्सा मंत्री डॉ. रघु शर्मा और कांग्रेस नेता टीकाराम जूली ने सरकार पर योजना को कमजोर करने का आरोप लगाया है। विपक्ष का कहना है कि बजट की कमी के कारण स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो रही हैं। दूसरी ओर, स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने इस मामले पर संज्ञान लेते हुए कहा है कि विभाग को बकाया भुगतान की प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने आश्वासन दिया है कि जल्द ही तकनीकी और वित्तीय बाधाओं को दूर कर व्यवस्था को सुचारू किया जाएगा।

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