आरपीएससी भर्ती पोर्टल से छेड़छाड़: फर्जी आईडी बनाकर 3 अभ्यर्थियों के आवेदन वापस लिए

आरपीएससी भर्ती पोर्टल में सेंधमारी का मामला। फर्जी आईडी से 3 अभ्यर्थियों के आवेदन वापस लिए गए। साइबर पुलिस ने दर्ज की एफआईआर।

Jun 13, 2026 - 22:35
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आरपीएससी भर्ती पोर्टल से छेड़छाड़: फर्जी आईडी बनाकर 3 अभ्यर्थियों के आवेदन वापस लिए

राजस्थान लोक सेवा आयोग (आरपीएससी) की भर्ती प्रक्रिया से जुड़ा एक अत्यंत गंभीर मामला सामने आया है। खान एवं भूविज्ञान विभाग के लिए आयोजित की गई भर्ती में 3 अभ्यर्थियों के ऑनलाइन आवेदन को उनकी जानकारी के बिना वापस ले लिया गया। इस घटना का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि न तो आयोग ने इन आवेदनों को हटाया और न ही अभ्यर्थियों ने स्वयं आवेदन वापस लेने की कोई प्रक्रिया की। इसके बजाय, किसी अनाधिकृत व्यक्ति ने आरपीएससी के रिक्रूटमेंट पोर्टल के साथ छेड़छाड़ की और इन तीनों आवेदनों को सिस्टम से हटा दिया। ऐसी आशंका जताई जा रही है कि भर्ती प्रक्रिया में किसी अन्य व्यक्ति को अनुचित लाभ पहुँचाने के उद्देश्य से यह साजिश रची गई थी। आयोग ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए अजमेर के साइबर पुलिस स्टेशन में आधिकारिक शिकायत दर्ज कराई है।

सहायक खनिज अभियंता भर्ती 2024 का पूरा मामला

यह पूरा प्रकरण सहायक खनिज अभियंता भर्ती 2024 से संबंधित है। इस भर्ती के तहत आयोजित लिखित परीक्षा के बाद आयोग ने पदों के मुकाबले दोगुना अभ्यर्थियों की एक सूची जारी की थी। इस सूची में शामिल एक अभ्यर्थी ने 1 जनवरी 2026 को आयोग को ई-मेल के माध्यम से एक महत्वपूर्ण सूचना दी। अभ्यर्थी ने बताया कि उसे 29 दिसंबर 2025 की शाम को एक एसएमएस प्राप्त हुआ था, जिसमें उसके आवेदन को वापस (विथड्रॉ) लिए जाने की बात कही गई थी। अभ्यर्थी ने स्पष्ट रूप से कहा कि उसने आवेदन वापस लेने का कोई प्रयास नहीं किया था और उसने अपने आवेदन को पुनः बहाल करने की मांग की। जांच में यह भी पाया गया कि उस समय आयोग द्वारा एप्लीकेशन विथड्रॉ करने के लिए कोई भी लिंक या विंडो ओपन नहीं की गई थी। आरपीएससी ने मामले को गंभीर मानते हुए तुरंत सूचना प्रौद्योगिकी और संचार विभाग, जयपुर को विस्तृत तकनीकी जांच के लिए पत्र लिखा।

फर्जी आईडी का निर्माण और पोर्टल का अवैध एक्सेस

तकनीकी जांच के दौरान यह खुलासा हुआ कि यह एक सोची-समझी साजिश का हिस्सा था। किसी अज्ञात व्यक्ति द्वारा जानबूझकर रिक्रूटमेंट पोर्टल को अवैध रूप से एक्सेस किया गया था। जांच में सामने आया कि तीनों अभ्यर्थियों के आवेदन वापस लेने से ठीक कुछ समय पहले, यानी 29 दिसंबर 2025 को शाम 6 बजकर 16 मिनट पर पोर्टल पर एक नया यूजर क्रिएट किया गया था। इस फर्जी यूजर आईडी के माध्यम से ही तीनों अभ्यर्थियों के आवेदनों को विथड्रॉ किया गया, ताकि मेरिट लिस्ट में बदलाव कर किसी अन्य को लाभ दिया जा सके। डिजिटल फॉरेंसिक जांच के दौरान उस व्यक्ति की ईमेल आईडी और आईपी एड्रेस का भी पता लगा लिया गया है, जिससे यह अवैध गतिविधि संचालित की गई थी।

साइबर पुलिस ने दर्ज किया मामला

अजमेर के साइबर थाना पुलिस ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 318(4) यानी धोखाधड़ी और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (आईटी एक्ट) की धारा 66, 66डी, 43 एवं 43ए के तहत मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस अब उन दोषियों की तलाश कर रही है जिन्होंने सरकारी सिस्टम में सेंध लगाने की कोशिश की। आयोग के सचिव ने इस संबंध में कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि डिजिटल माध्यमों या रिक्रूटमेंट पोर्टल के साथ छेड़छाड़ कर परीक्षा की पवित्रता और प्रक्रिया को प्रभावित करने वाले किसी भी अपराधी को बख्शा नहीं जाएगा। आयोग यह सुनिश्चित करेगा कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो और अभ्यर्थियों का भरोसा सिस्टम पर बना रहे।

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