ईरान ने पीएम मोदी को भेजा न्योता: अयातुल्ला अली खामेनेई का 5 दिवसीय अंतिम संस्कार

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन ने पीएम मोदी को अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार में शामिल होने का न्योता दिया है। 5 से 9 जुलाई तक चलेगा कार्यक्रम।

Jun 24, 2026 - 17:35
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ईरान ने पीएम मोदी को भेजा न्योता: अयातुल्ला अली खामेनेई का 5 दिवसीय अंतिम संस्कार

एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक घटनाक्रम में, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ईरान के दिवंगत सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार कार्यक्रमों में शामिल होने के लिए औपचारिक निमंत्रण भेजा है। राजनयिक सूत्रों ने बुधवार को जानकारी दी कि यह निमंत्रण ऐसे समय में आया है जब ईरान पांच दिनों के व्यापक शोक समारोह और राजकीय अंतिम संस्कार की तैयारी कर रहा है। हालांकि, नई दिल्ली की ओर से प्रधानमंत्री मोदी के इस कार्यक्रम में शामिल होने के संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि या प्रतिक्रिया नहीं दी गई है। इस ऐतिहासिक अवसर पर दुनिया भर के कई वैश्विक नेताओं के जुटने की संभावना जताई जा रही है, जो इस क्षेत्र की बदलती राजनीति के बीच एक बड़ा संदेश हो सकता है।

पांच दिनों तक चलने वाला अंतिम संस्कार कार्यक्रम और रस्में

आधिकारिक सूत्रों और ईरानी मीडिया द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, अंतिम संस्कार के कार्यक्रमों की शुरुआत 5 जुलाई से होने जा रही है। इस पूरे कार्यक्रम को ईरान के विभिन्न महत्वपूर्ण शहरों में आयोजित किया जाएगा ताकि जनता अपने नेता को श्रद्धांजलि दे सके। 7 जुलाई को तेहरान के दक्षिण में स्थित पवित्र शहर क़ोम में विशेष शोक सभाएं और धार्मिक रस्में आयोजित की जाएंगी। इसके बाद, 9 जुलाई को अयातुल्ला अली खामेनेई के पार्थिव शरीर को उनके गृहनगर और पूर्वोत्तर ईरान के पवित्र शहर मशहद में सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा।

इस्लामिक कानून के अनुसार, आमतौर पर मृत शरीर को 24 घंटे के भीतर दफनाना अनिवार्य होता है, लेकिन युद्ध या विशेष परिस्थितियों में इस नियम में छूट दी जाती है। फरवरी में हुई उनकी मृत्यु के बाद से ही अंतिम संस्कार की तारीखों को लेकर लगातार अटकलें लगाई जा रही थीं। शुरुआती खबरों में जून के अंत में दफनाने की बात कही गई थी, लेकिन बाद में सरकारी मीडिया ने पुष्टि की कि यह कार्यक्रम जुलाई में संपन्न होगा और इस देरी का मुख्य कारण ईरान, अमेरिका और इजराइल के बीच खिंचा हुआ लंबा संघर्ष बताया जा रहा है, जिसके कारण मार्च में प्रस्तावित कार्यक्रम को टालना पड़ा था।

मृत्यु की परिस्थितियां और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

86 वर्षीय अयातुल्ला अली खामेनेई की मृत्यु 28 फरवरी को तेहरान पर हुए अमेरिका और इजराइल के संयुक्त हवाई हमले के दौरान हुई थी। खलीज टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, हमले के समय खामेनेई अपने आवास पर रिवोल्यूशनरी गार्ड के प्रमुख मोहम्मद पाकपूर और सुरक्षा सलाहकार अली शमखानी के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक कर रहे थे। यह हमला इतना भीषण था कि उनकी मौके पर ही मौत हो गई। न्यूयॉर्क टाइम्स के अनुसार, हमले के बाद उनके शव को मलबे से निकाला गया और उसकी तस्वीरें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजराइली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू को भेजी गई थीं। रिपोर्टों में कहा गया कि हमले की तीव्रता के कारण शव क्षत-विक्षत हो गया था।

अली खामेनेई पिछले 36 वर्षों से ईरान के शीर्ष पद पर आसीन थे। उन्होंने 1989 में अयातुल्ला रुहोल्लाह खुमैनी की मृत्यु के बाद देश की कमान संभाली थी। जहां खुमैनी ने पहलवी राजशाही को खत्म करने वाली इस्लामिक क्रांति का नेतृत्व किया था, वहीं खामेनेई ने ईरान के सैन्य और अर्ध-सैन्य ढांचे को मजबूती प्रदान की थी और दशकों तक देश की नीतियों को निर्देशित किया था।

दुनिया की सबसे बड़ी अंतिम यात्रा का बन सकता है रिकॉर्ड

अनुमान लगाया जा रहा है कि तेहरान, मशहद और क़ोम में होने वाले इन कार्यक्रमों में लगभग 2 करोड़ लोग शामिल हो सकते हैं। यदि यह आंकड़ा सच साबित होता है, तो यह 1989 में अयातुल्ला रुहोल्लाह खुमैनी के अंतिम संस्कार में उमड़ी 1 करोड़ की भीड़ के रिकॉर्ड को तोड़ देगा। इस कार्यक्रम में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ और कई अन्य उच्च पदस्थ पाकिस्तानी अधिकारियों के भी शामिल होने की उम्मीद है।

नए नेतृत्व और वैश्विक शांति की दिशा में कदम

अली खामेनेई की मृत्यु के बाद, उनके 56 वर्षीय बेटे मोजतबा हुसैनी खामेनेई ने 8 मार्च को नए सर्वोच्च नेता के रूप में जिम्मेदारी संभाली थी। हालांकि, वर्तमान में उनकी सेहत और ठिकाने को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारी सस्पेंस बना हुआ है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो और रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ जैसे शीर्ष अधिकारियों ने दावा किया है कि मोजतबा खामेनेई इस समय कोमा में हैं, जिससे ईरान के भविष्य के नेतृत्व पर सवाल उठ रहे हैं।

इस बीच, महीनों तक चले भीषण संघर्ष के बाद, जिसने वैश्विक ऊर्जा संकट पैदा कर दिया था, ईरान और अमेरिका के बीच एक शांति समझौता हुआ है। राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अलग-अलग डिजिटल समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए हैं। वर्तमान में दोनों देशों के बीच दीर्घकालिक शांति बहाली के लिए स्विट्जरलैंड में उच्च स्तरीय वार्ता जारी है, जो पश्चिम एशिया में स्थिरता की एक नई उम्मीद जगा रही है।

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