एच-1बी वीजा पर ट्रंप प्रशासन का बड़ा फैसला 1 लाख डॉलर से अधिक शुल्क का प्रस्ताव

ट्रंप प्रशासन ने एच-1बी वीजा के लिए 1,03,265 डॉलर का शुल्क प्रस्तावित किया है। इसका सीधा असर भारतीय पेशेवरों पर पड़ेगा जो कुल वीजा का 71 प्रतिशत हिस्सा हैं।

Aug 25, 2026 - 08:35
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एच-1बी वीजा पर ट्रंप प्रशासन का बड़ा फैसला 1 लाख डॉलर से अधिक शुल्क का प्रस्ताव

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने एच-1बी (H-1B) वीजा आवेदन प्रक्रिया को लेकर एक अत्यंत महत्वपूर्ण और बड़ा प्रस्ताव पेश किया है। सोमवार को जारी किए गए एक आधिकारिक नोटिस के माध्यम से प्रशासन ने एच-1बी वीजा आवेदनों पर 1,03,265 डॉलर का शुल्क लगाने का प्रस्ताव रखा है। अमेरिका के होमलैंड सिक्योरिटी विभाग (डीएसएस) ने इस संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि यह प्रस्तावित शुल्क वर्तमान में लिए जाने वाले एच-1बी आवेदन शुल्क के अतिरिक्त होगा और इसे एक अलग श्रेणी के रूप में वसूला जाएगा।

किन आवेदकों पर पड़ेगा असर

होमलैंड सिक्योरिटी विभाग द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, यह नया शुल्क केवल उन एच-1बी आवेदनों पर लागू होगा जो वार्षिक सीमा यानी एनुअल कैप के अधीन आते हैं। इसमें नियमित श्रेणी के तहत जारी किए जाने वाले 65,000 वीजा शामिल हैं। इसके साथ ही, अमेरिकी विश्वविद्यालयों से मास्टर डिग्री या उससे ऊपर की डिग्री रखने वाले विदेशी कर्मचारियों के लिए आरक्षित 20,000 अतिरिक्त वीजा की श्रेणी को भी इस प्रस्तावित शुल्क के दायरे में रखा गया है। हालांकि, विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि जो एच-1बी आवेदन वार्षिक सीमा से बाहर रखे गए हैं, उन पर यह नया शुल्क लागू नहीं होगा।

प्रस्ताव के पीछे का कानूनी और प्रशासनिक तर्क

डीएसएस का यह नया प्रस्ताव एक संघीय अपील अदालत द्वारा उस याचिका को खारिज किए जाने के लगभग एक महीने बाद आया है, जिसमें डिस्ट्रिक्ट कोर्ट जज के पुराने आदेश पर रोक लगाने की मांग की गई थी। उस समय कोर्ट ने ट्रंप प्रशासन की 1,00,000 डॉलर शुल्क लगाने की योजना को रद्द कर दिया था। अब प्रशासन ने 1,03,265 डॉलर की राशि के साथ नया प्रस्ताव पेश किया है। विभाग का कहना है कि इस शुल्क का मुख्य उद्देश्य विभिन्न सरकारी विभागों के बीच होने वाले प्रशासनिक खर्चों की भरपाई करना है और अलग शुल्क रखने से सरकार के लिए इस आय का हिसाब रखना, उसका सही आवंटन करना और उसकी रिपोर्टिंग करना काफी आसान हो जाएगा।

भारतीय पेशेवरों के लिए बड़ी चिंता

इस नियम के लागू होने से अमेरिका में काम करने की इच्छा रखने वाले विदेशी पेशेवरों, अंतरराष्ट्रीय छात्रों और उन्हें स्पॉन्सर करने वाले अमेरिकी नियोक्ताओं पर भारी वित्तीय बोझ पड़ेगा। यह बदलाव विशेष रूप से भारतीय नागरिकों के लिए चिंता का विषय है क्योंकि अमेरिका में एच-1बी वीजा हासिल करने वालों में भारतीयों की हिस्सेदारी 70 प्रतिशत से भी अधिक है। आंकड़ों पर नजर डालें तो अमेरिकी नागरिकता और इमिग्रेशन सेवाओं (यूएससीआईएस) ने वर्ष 2024 में कुल 3,99,402 एच-1बी याचिकाओं को मंजूरी दी थी। इनमें से लगभग 71 प्रतिशत याचिकाएं भारत में जन्मे पेशेवरों के लिए थीं। ऐसे में शुल्क में इतनी बड़ी बढ़ोतरी भारतीय आईटी क्षेत्र और वहां काम करने वाले पेशेवरों के लिए एक बड़ी चुनौती साबित हो सकती है।

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