ट्रंप की लोकप्रियता में भारी गिरावट: सर्वे में 33 प्रतिशत रेटिंग, ईरान युद्ध और महंगाई बनी बड़ी वजह
अमेरिका में मिड-टर्म चुनावों से पहले डोनाल्ड ट्रंप की लोकप्रियता 33 प्रतिशत के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गई है। जानें क्यों जनता में है भारी नाराजगी।
अमेरिका में नवंबर में होने वाले मिड-टर्म चुनावों से ठीक 2 महीने पहले, डोनाल्ड ट्रंप की लोकप्रियता में भारी गिरावट दर्ज की गई है। ताजा सर्वे के आंकड़ों के अनुसार, ट्रंप की लोकप्रियता अब रसातल में जा गिरी है और सिर्फ 33 प्रतिशत अमेरिकी ही उनके काम को सही मान रहे हैं। ट्रंप ने युद्ध और अदावत के इतने मोर्चे खोल दिए हैं कि उनका संकट अब केवल बाहरी मोर्चों तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि घरेलू मोर्चे पर भी उनकी मुश्किलें लगातार बढ़ने लगी हैं। हालात इस कदर खराब हो चुके हैं कि अगर आज अमेरिका में चुनाव होते हैं, तो ट्रंप को हार का सामना करना पड़ सकता है। यह दावा किसी व्यक्ति विशेष का नहीं, बल्कि अमेरिका में हुए विभिन्न सर्वे का है। जो डोनाल्ड ट्रंप कभी ईरान को तबाह करने का दावा कर रहे थे, आज उसी ईरान युद्ध ने अमेरिका में ट्रंप के राजनीतिक साम्राज्य की जड़ों को हिला कर रख दिया है।
ईरान युद्ध और महंगाई का दोहरा प्रहार
नवंबर के मिड-टर्म चुनावों से पहले ट्रंप के लिए स्थितियां काफी चुनौतीपूर्ण हो गई हैं। इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह ईरान युद्ध के साइड-इफेक्ट और बेलगाम होती महंगाई को माना जा रहा है। रॉयटर्स से लेकर क्विनीपियाक यूनिवर्सिटी तक, अमेरिका के हर बड़े सर्वे ने ट्रंप के खिलाफ रेड अलर्ट जारी कर दिया है। ट्रंप की अप्रूवल रेटिंग महज 33 प्रतिशत पर आकर अटक गई है, जो उनके पूरे राजनीतिक करियर का सबसे निचला स्तर माना जा रहा है। आम अमेरिकी नागरिक अब युद्ध के नाम पर महंगी गैस और महंगे राशन का अतिरिक्त बोझ उठाने के लिए बिल्कुल भी तैयार नहीं है। इस स्थिति का सीधा फायदा जो बाइडेन की डेमोक्रेटिक पार्टी को मिलता हुआ दिखाई दे रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान युद्ध ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी को कांग्रेस से बाहर निकालने का अलार्म बजा रहा है।
जनता में भयंकर नाराजगी और सर्वे के आंकड़े
ईरान युद्ध और अर्थव्यवस्था को संभालने के तरीके को लेकर अमेरिका की अवाम में ट्रंप के खिलाफ भयंकर नाराजगी देखी जा रही है। सर्वे में ऐसा तीसरी बार हुआ है जब सिर्फ 33 प्रतिशत अमेरिकियों ने ट्रंप के काम पर अपनी सहमति जताई है। आंकड़ों के अनुसार, अगर आज चुनाव होते हैं, तो सिर्फ 36 प्रतिशत निर्दलीय मतदाता ही डेमोक्रेट्स को चुनेंगे, जबकि ट्रंप की पार्टी को केवल 22 प्रतिशत का समर्थन हासिल है। इसके अलावा, वोटिंग को लेकर उत्साह में भी बड़ा अंतर देखा गया है और जहां 46 प्रतिशत डेमोक्रेट्स नवंबर में होने वाली वोटिंग के लिए उत्साहित हैं, वहीं रिपब्लिकन वोटर्स का उत्साह घटकर सिर्फ 31 प्रतिशत रह गया है।
MAGA ब्रांड बना चुनावी बोझ
ट्रंप का प्रसिद्ध ‘MAGA’ ब्रांड, जो कभी उनकी सबसे बड़ी ताकत हुआ करता था, आज रिपब्लिकन पार्टी के लिए एक चुनावी बोझ बनता जा रहा है। यह स्थिति 3 नवंबर के मिड-टर्म चुनावों में उनके मामूली बहुमत को भी छीन सकती है। दरअसल, फरवरी में ट्रंप द्वारा दिए गए बमबारी के आदेश के बाद से ही अमेरिका में पेट्रोल और किराने के सामान की कीमतें आसमान छू रही हैं। इसी कारण अब अमेरिकी नागरिक यह सवाल पूछ रहे हैं कि आखिर ईरान से युद्ध की कीमत उन्हें क्यों चुकानी पड़ रही है? युद्ध के आर्थिक असर ने जनता के मन में गहरा असंतोष पैदा कर दिया है।
नीतियों की विफलता और भविष्य का संकट
सर्वे के अनुसार, 71 प्रतिशत अमेरिकी महंगाई को संभालने के मामले में ट्रंप को पूरी तरह नाकाम मानते हैं। इसके मुकाबले केवल 25 प्रतिशत लोग ही इस बात से सहमत हैं कि ट्रंप युद्ध की स्थिति को अच्छे से संभाल रहे हैं। वहीं, 54 प्रतिशत अमेरिकी तो सैन्य कार्रवाई को ही सिरे से खारिज कर रहे हैं। सर्वे विशेषज्ञों का यह भी दावा है कि 80 प्रतिशत अमेरिकियों का मानना है कि युद्ध बढ़ती महंगाई के रूप में अमेरिका पर एक गंभीर बोझ बन गया है। जनता इस बढ़ते बोझ का मुख्य कारण ट्रंप की नीतियों को मानती है। अब यह पूरी संभावना है कि ये आंकड़े ट्रंप के राजनीतिक भविष्य के लिए एक नया और बड़ा संकट पैदा कर सकते हैं।
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