ग्रीन कार्ड के लिए 179 साल का इंतजार, भारतीय पेशेवरों के लिए अमेरिकी नागरिकता की राह हुई मुश्किल
एनएफएपी की रिपोर्ट के अनुसार, ईबी-2 श्रेणी में भारतीय आवेदकों को ग्रीन कार्ड के लिए 179 साल तक इंतजार करना पड़ सकता है। 10 लाख भारतीय वर्तमान में बैकलॉग में हैं।
अमेरिका में स्थायी नागरिकता यानी ग्रीन कार्ड हासिल करने का सपना देख रहे भारतीय पेशेवरों के लिए एक चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है। नेशनल फाउंडेशन फॉर अमेरिकन पॉलिसी (NFAP) की नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार, रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड के लिए प्रतीक्षा अवधि इतनी लंबी हो गई है कि नए आवेदकों को दशकों नहीं बल्कि सदियों तक इंतजार करना पड़ सकता है। इस रिपोर्ट में अमेरिकी नागरिकता और आव्रजन सेवा (USCIS) के आंकड़ों का गहन विश्लेषण किया गया है, जो भारतीय कार्यबल के लिए एक अत्यंत चुनौतीपूर्ण तस्वीर पेश करता है।
ईबी-2 श्रेणी में 179 साल का लंबा इंतजार
रिपोर्ट के सबसे चौंकाने वाले आंकड़ों में ईबी-2 श्रेणी का जिक्र है। एनएफएपी के विश्लेषण के मुताबिक, यदि कोई भारतीय नागरिक जनवरी 2026 या उसके बाद ईबी-2 श्रेणी के तहत ग्रीन कार्ड के लिए आवेदन करता है, तो उसे संभावित रूप से 179 साल तक इंतजार करना पड़ सकता है। ईबी-2 श्रेणी में आमतौर पर वे पेशेवर शामिल होते हैं जिनके पास उच्च शैक्षणिक योग्यता होती है या जो अपने क्षेत्र में विशेष योग्यता रखते हैं। इतनी लंबी प्रतीक्षा अवधि का अर्थ है कि वर्तमान नियमों के तहत कई भारतीयों के लिए अपने जीवनकाल में ग्रीन कार्ड प्राप्त करना लगभग असंभव हो गया है।
अन्य श्रेणियों की स्थिति: ईबी-1 और ईबी-3
रिपोर्ट में अन्य श्रेणियों के लिए भी प्रतीक्षा समय का विवरण दिया गया है। ईबी-3 श्रेणी, जिसमें स्नातक डिग्री वाले पेशेवर और कुशल कर्मचारी शामिल होते हैं, में भारतीयों के लिए प्रतीक्षा समय लगभग 38 साल बताया गया है। वहीं, ईबी-1 श्रेणी, जो असाधारण क्षमता वाले व्यक्तियों, प्रमुख शोधकर्ताओं और बहुराष्ट्रीय कंपनियों के अधिकारियों के लिए है, में भारतीयों को लगभग 5 साल तक का इंतजार करना पड़ सकता है। ये आंकड़े दर्शाते हैं कि भारतीय पेशेवरों के लिए अमेरिकी आव्रजन प्रणाली में किस कदर रुकावटें हैं।
10 लाख भारतीय बैकलॉग में फंसे
रिपोर्ट के अनुसार, रोजगार आधारित आप्रवासन बैकलॉग में फंसे भारतीयों की संख्या चिंताजनक स्तर पर पहुंच गई है। दिसंबर 2025 तक भारत के लगभग 10 लाख लोग इस बैकलॉग में फंसे हुए हैं। यह संख्या दिसंबर 2025 तक कुल ग्रीन कार्ड स्टॉक का 79 प्रतिशत हिस्सा है। कुल बैकलॉग की बात करें तो यह दिसंबर 2025 तक लगभग 12 लाख 60 हजार तक पहुंचने का अनुमान है, जो अप्रैल 2020 में लगभग 10 लाख 50 हजार था। इसका मतलब है कि पिछले पांच वर्षों में बैकलॉग में लगभग 20 दशमलव 6 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।
कानूनी सीमाएं और प्रति देश कोटा
इस भारी बैकलॉग का मुख्य कारण अमेरिकी कानून के तहत तय की गई सीमाएं हैं। अमेरिकी कानून के अनुसार, हर साल केवल 1 लाख 40 हजार रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड जारी किए जा सकते हैं। इसके अलावा, एक और कड़ा नियम यह है कि किसी भी एक देश के नागरिकों को कुल ग्रीन कार्ड का 7 प्रतिशत से अधिक हिस्सा नहीं दिया जा सकता। भारत जैसे देश के लिए, जहां से बड़ी संख्या में उच्च कुशल पेशेवर अमेरिका जाते हैं, यह 7 प्रतिशत की सीमा एक बड़ी बाधा बन गई है। विदेशी वैज्ञानिकों और इंजीनियरों की भारी मांग के बावजूद, यह कोटा सिस्टम बैकलॉग को लगातार बढ़ा रहा है।
चीन और भारत के बीच बड़ा अंतर
एनएफएपी की रिपोर्ट में भारतीय और चीनी आवेदकों के बीच प्रतीक्षा समय में एक बड़ा अंतर दिखाया गया है। जहां भारतीयों को ईबी-2 में 179 साल इंतजार करना पड़ सकता है, वहीं चीनी नागरिकों के लिए यह इंतजार लगभग 25 साल है। ईबी-3 श्रेणी में भारतीयों के लिए 38 साल की तुलना में चीनी नागरिकों के लिए यह समय केवल 7 साल है। रिपोर्ट स्पष्ट करती है कि राष्ट्रीयता के आधार पर मिलने वाले ग्रीन कार्ड कोटा का सबसे गंभीर प्रभाव भारतीय नागरिकों पर पड़ रहा है, जो चीन या फिलीपींस के नागरिकों की तुलना में कहीं अधिक है।
ग्रीन कार्ड की प्रमुख श्रेणियों को समझना
रिपोर्ट में उन तीन प्रमुख श्रेणियों को भी परिभाषित किया गया है जिनके तहत भारतीय आवेदन करते हैं:
- ईबी-1: इसमें अपने क्षेत्र में असाधारण क्षमता रखने वाले लोग, प्रमुख शिक्षक, शोधकर्ता और बहुराष्ट्रीय कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारी आते हैं।
- ईबी-2: इस श्रेणी में उच्च शैक्षणिक योग्यता वाले पेशेवर और विशेष योग्यता रखने वाले लोग शामिल होते हैं।
- ईबी-3: इसमें स्नातक डिग्री वाले पेशेवरों के साथ-साथ कुशल और अन्य श्रेणी के कर्मचारी शामिल होते हैं।
भविष्य की चुनौतियां
हालांकि ये अनुमान मौजूदा बैकलॉग और वर्तमान नियमों पर आधारित हैं, लेकिन ये भारतीय पेशेवरों के सामने आने वाली वास्तविक कठिनाइयों को उजागर करते हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि जब तक अमेरिकी आव्रजन नियमों में कोई बड़ा बदलाव नहीं होता, तब तक भारतीय पेशेवरों के लिए स्थायी नागरिकता का सपना एक लंबी और अनिश्चित प्रतीक्षा बना रहेगा।
What's Your Reaction?