ट्रंप बोले ईरान पर भरोसा खत्म: ईरान की चेतावनी हमला हुआ तो अमेरिका और इजराइल के बेस पर करेंगे अटैक

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान पर अविश्वास जताया है, जबकि ईरान ने अमेरिकी ठिकानों पर हमले की धमकी दी है। होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही 77 प्रतिशत गिरी।

Aug 1, 2026 - 10:35
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ट्रंप बोले ईरान पर भरोसा खत्म: ईरान की चेतावनी हमला हुआ तो अमेरिका और इजराइल के बेस पर करेंगे अटैक

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आधिकारिक तौर पर यह घोषणा की है कि अब उन्हें ईरान पर बिल्कुल भी भरोसा नहीं रहा है। कैंप डेविड में आयोजित एक कैबिनेट बैठक के दौरान राष्ट्रपति ने ईरान के राजनयिक व्यवहार पर अपनी गहरी नाराजगी व्यक्त की। ट्रंप ने ईरान पर झूठ बोलने और गलत जानकारी फैलाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि ईरान बातचीत की मेज पर आने की बात तो करता है, लेकिन वह बार-बार अपने वादों से मुकर जाता है और अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा नहीं करता है। हालांकि, इन कड़े बयानों के बावजूद ट्रंप ने यह स्पष्ट किया कि दोनों देशों के बीच बातचीत के रास्ते पूरी तरह बंद नहीं हुए हैं और चर्चा अभी भी जारी है और उन्होंने बताया कि अमेरिका की ओर से एक विशेष टीम इस बातचीत को संभाल रही है, जिसमें स्टीव विटकॉफ, जेडी वेंस, मार्को रुबियो और जेरेड कुशनर जैसे प्रमुख नाम शामिल हैं।

ईरान ने दी अमेरिका और इजराइल के ठिकानों को निशाना बनाने की धमकी

वाशिंगटन से आ रही बयानबाजी के जवाब में ईरान के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बेहद सख्त चेतावनी जारी की है और ईरानी अधिकारी ने कहा कि यदि अमेरिका की ओर से ईरान पर कोई भी हमला किया जाता है, तो उसका जवाब पूरी तैयारी और ताकत के साथ दिया जाएगा। ईरान की रणनीति के अनुसार, जवाबी कार्रवाई में अमेरिका और इजराइल के महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों और उनके बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया जाएगा। यह धमकी क्षेत्र में बढ़ते तनाव को और अधिक गंभीर बना देती है। हालांकि, अमेरिका की ओर से किसी नए हमले को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है और पेंटागन ने भी इस संभावित सैन्य कार्रवाई पर किसी भी प्रकार की टिप्पणी करने से साफ इनकार कर दिया है।

पिछले 24 घंटों के 4 सबसे बड़े घटनाक्रम

पश्चिम एशिया के इस संघर्ष में पिछले 24 घंटों के दौरान कई महत्वपूर्ण अपडेट सामने आए हैं जो इस तनाव के मानवीय और आर्थिक पहलुओं को दर्शाते हैं। पहला बड़ा अपडेट भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर और ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची के बीच हुई फोन पर बातचीत है। जयशंकर ने स्पष्ट रूप से कहा कि किसी भी परिस्थिति में व्यापारिक जहाजों और उन पर तैनात नाविकों को निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए। यह अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक मार्गों की सुरक्षा के लिए भारत की चिंता को दर्शाता है।

दूसरा महत्वपूर्ण तथ्य इस संघर्ष में भारतीय नागरिकों की जान जाना है। सरकार ने संसद में जानकारी दी है कि इस साल पश्चिम एशिया में शुरू हुए संघर्ष के कारण अब तक 16 भारतीय नागरिकों की मृत्यु हो चुकी है, जिनमें 10 नाविक भी शामिल हैं। तीसरा बड़ा अपडेट अमेरिका के रक्षा विभाग यानी पेंटागन से जुड़ा है और पेंटागन ने ईरान के साथ युद्ध के दौरान इस्तेमाल की गई मिसाइलों के भंडार को फिर से भरने के लिए 18 अरब 20 करोड़ डॉलर की आपातकालीन फंडिंग की मांग की है, जो भारतीय मुद्रा में करीब 1 लाख 59 हजार करोड़ रुपये के बराबर है। चौथा अपडेट यह है कि ईरानी मीडिया के अनुसार, इराक में हाल ही में हुए अमेरिकी और सऊदी हमलों में मारे गए आईआरजीसी के पांच सदस्यों के शव शुक्रवार को ईरान वापस लाए गए हैं।

होर्मुज स्ट्रेट में समुद्री व्यापार पर पड़ा बुरा असर

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का सीधा असर अब वैश्विक समुद्री व्यापार पर दिखाई देने लगा है। शिप ट्रैकिंग कंपनी केपलर (Kpler) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों की संख्या में भारी गिरावट दर्ज की गई है। महज एक दिन के भीतर जहाजों की आवाजाही में 77 प्रतिशत की कमी आई है। आंकड़ों के मुताबिक, बुधवार को जहां इस रास्ते से 22 जहाज गुजरे थे, वहीं गुरुवार को यह संख्या घटकर केवल 5 रह गई। यह गिरावट वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला के लिए एक बड़ा खतरा मानी जा रही है क्योंकि यह मार्ग तेल परिवहन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

ईरान की तेल सप्लाई रोकने की चेतावनी और हूतियों का रुख

ईरान की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने अमेरिका को चेतावनी दी है कि यदि उसके दक्षिणी बंदरगाहों की समुद्री नाकेबंदी जारी रहती है, तो इसका असर पूरी दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ेगा। परिषद ने संकेत दिया कि ऐसी स्थिति में वे होर्मुज स्ट्रेट पर अपना नियंत्रण और कड़ा कर देंगे और अन्य समुद्री रास्तों को भी प्रभावित कर सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान का इशारा बाब अल-मंदेब स्ट्रेट और गल्फ ऑफ एडन की तरफ है, जहां ईरान के सहयोगी हूती विद्रोहियों का प्रभाव है।

इसी बीच, हूती विद्रोहियों ने बाब अल-मंदेब स्ट्रेट को लेकर एक स्पष्टीकरण जारी किया है। उन्होंने उन खबरों का खंडन किया है जिनमें कहा गया था कि वे वहां से गुजरने वाले जहाजों से शुल्क वसूल रहे हैं। हूती समूह के ह्यूमैनिटेरियन ऑपरेशंस कोऑर्डिनेशन सेंटर ने कहा कि बाब अल-मंदेब से गुजरना पूरी तरह से मुफ्त है और जिन जहाजों पर उनका प्रतिबंध नहीं है, वे पहले की तरह सुरक्षित रूप से वहां से निकल सकते हैं। गौरतलब है कि हूती विद्रोहियों ने 20 जुलाई को सऊदी अरब के खिलाफ नौसैनिक नाकेबंदी की घोषणा की थी।

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