दिल्ली में हाई अलर्ट: सुरक्षा एजेंसियों ने किया सुदर्शन शक्ति-V टेरर मॉक ड्रिल
स्वतंत्रता दिवस से पहले दिल्ली में सुरक्षा एजेंसियों ने 17 घंटे तक चलने वाला सुदर्शन शक्ति-V मॉक ड्रिल किया ताकि आतंकी खतरों से निपटने की तैयारी को परखा जा सके।
15 अगस्त को होने वाले स्वतंत्रता दिवस समारोह से पहले राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में आतंकी हमले के इनपुट मिलने के बाद हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है। सुरक्षा व्यवस्था को चाक-चौबंद करने और किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने की तैयारी को परखने के लिए दिल्ली पुलिस और देश की प्रमुख सुरक्षा एजेंसियों ने शनिवार को एक व्यापक काउंटर टेररिज्म मॉक ड्रिल का आयोजन किया। सुदर्शन शक्ति-V नाम से किए गए इस संयुक्त अभ्यास का मुख्य उद्देश्य विभिन्न सुरक्षा इकाइयों के बीच तालमेल और उनकी त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता का परीक्षण करना था और गृह मंत्रालय के निर्देश पर आयोजित इस ड्रिल में सुरक्षा के हर पहलू को बारीकी से जांचा गया।
सुदर्शन शक्ति-V: एक व्यापक सुरक्षा अभ्यास
यह अभ्यास दिल्ली में आयोजित होने वाली वार्षिक सुरक्षा कवायद का 5वां संस्करण है। इससे पहले इस अभ्यास को ऑपरेशन ऑल आउट के नाम से जाना जाता था। गृह मंत्रालय के निर्देशों पर इस पूरी एक्सरसाइज का समन्वय नेशनल सिक्योरिटी गार्ड (NSG) और दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल द्वारा किया गया। यह अभ्यास 7 अगस्त को सुबह 10 बजे शुरू हुआ और अगले दिन 8 अगस्त को सुबह करीब 4 बजे तक चला। कुल 17 घंटों तक चले इस सघन अभ्यास के दौरान सुरक्षा बलों ने विभिन्न चुनौतीपूर्ण और आपातकालीन परिस्थितियों में अपनी दक्षता और तैयारी का प्रदर्शन किया।
शामिल होने वाली प्रमुख एजेंसियां और इकाइयां
इस बड़े पैमाने के अभ्यास में सुरक्षा और आपातकालीन सेवाओं की कई महत्वपूर्ण इकाइयों ने हिस्सा लिया। दिल्ली पुलिस की ओर से स्पेशल सेल की SWAT टीम ने आतंकियों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई और ऑपरेशन चलाने की अपनी क्षमता दिखाई और इसके अलावा जिला पुलिस, बम डिस्पोजल स्क्वॉड, ट्रैफिक पुलिस, क्राइम ब्रांच, आईजीआई एयरपोर्ट यूनिट, मेट्रो पुलिस और पीसीआर समेत कई विंग इसमें शामिल हुए। राष्ट्रीय स्तर पर NSG, भारतीय सेना, NDRF और CISF जैसी प्रमुख एजेंसियों ने भी इस ड्रिल में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। विमानन और परिवहन सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए BCAS, AAI और DMRC के अधिकारियों ने भी अभ्यास में भाग लिया। किसी भी हमले के बाद की स्थिति को संभालने के लिए फायर सर्विस, FSL, कैट्स एंबुलेंस और स्वास्थ्य विभाग की टीमों को भी तैनात किया गया था ताकि एक एकीकृत प्रतिक्रिया तंत्र को परखा जा सके।
आतंकी हमलों के विभिन्न परिदृश्य और मॉक ड्रिल
अभ्यास के दौरान दिल्ली के अलग-अलग हिस्सों में एक साथ कई आतंकी हमलों की काल्पनिक स्थितियां बनाई गईं। इनमें कई महत्वपूर्ण स्थानों पर एक साथ बम धमाके, भीड़भाड़ वाले इलाकों में अंधाधुंध फायरिंग और लोगों को बंधक बनाए जाने जैसे गंभीर हालात शामिल थे। सुरक्षा बलों ने विमान हाईजैक की स्थिति और CBRNE यानी केमिकल, बायोलॉजिकल, रेडियोलॉजिकल और न्यूक्लियर खतरों से निपटने का भी विशेष अभ्यास किया। इन जटिल परिस्थितियों के माध्यम से यह देखा गया कि अलग-अलग एजेंसियां कितनी तेजी से मौके पर पहुंचती हैं और आपस में कितना बेहतर समन्वय स्थापित कर स्थिति को नियंत्रित करती हैं।
इन महत्वपूर्ण और रणनीतिक स्थानों पर हुई ड्रिल
मॉक ड्रिल के लिए दिल्ली के उन स्थानों को चुना गया जहां लोगों की भारी आवाजाही रहती है या जो रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। इनमें कश्मीरी गेट ISBT, कनॉट प्लेस, नेहरू प्लेस मार्केट और सफदरजंग अस्पताल जैसे प्रमुख स्थान शामिल थे और इसके अलावा दिल्ली सचिवालय, JLN स्टेडियम, IGI एयरपोर्ट और V3S मॉल में भी सुरक्षा अभ्यास किया गया। लाल किला मेट्रो स्टेशन, संस्कृति स्कूल, इस्कॉन मंदिर और कालकाजी मंदिर जैसे प्रमुख स्थलों को भी इस ड्रिल का हिस्सा बनाया गया। इन स्थानों पर अभ्यास करने का मकसद यह सुनिश्चित करना था कि शहर के हर कोने में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत रहे और किसी भी हमले की स्थिति में एजेंसियां तुरंत कार्रवाई कर सकें।
स्वतंत्रता दिवस से पहले सुरक्षा की तैयारी
दिल्ली में स्वतंत्रता दिवस समारोह से ठीक पहले इस एक्सरसाइज को बेहद अहम माना जा रहा है। इसका मुख्य मकसद यह देखना था कि अगर राजधानी में एक साथ कई जगह आतंकी हमला होता है, तो अलग-अलग सुरक्षा एजेंसियां कितनी जल्दी मौके पर पहुंचती हैं और आपस में कितना बेहतर तालमेल बनाकर हालात को काबू में करती हैं। 17 घंटे तक चले इस अभ्यास ने सुरक्षा बलों की मुस्तैदी को साबित किया है और यह सुनिश्चित किया है कि राष्ट्रीय राजधानी किसी भी संभावित खतरे से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है।
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