राहुल गांधी में समझ और ज्ञान की कमी, ज्ञानेश कुमार के मुद्दे पर भाजपा का पलटवार
भाजपा नेता सुधांशु त्रिवेदी ने राहुल गांधी की राजनीतिक समझ पर सवाल उठाते हुए कहा कि वे सपा और मुस्लिम लीग जैसे सहयोगियों के बिना चुनाव नहीं जीत सकते।
भारतीय जनता पार्टी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और SIR के मुद्दे पर राहुल गांधी द्वारा की गई प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद उन पर एक अत्यंत तीखा और व्यापक पलटवार किया है। भाजपा सांसद और राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने मीडिया को संबोधित करते हुए स्पष्ट रूप से कहा कि राहुल गांधी में समझ और ज्ञान की भारी कमी है और वे देश की वास्तविक राजनीतिक परिस्थितियों को समझ पाने में पूरी तरह से असमर्थ हैं और त्रिवेदी ने हमला जारी रखते हुए कहा कि राहुल गांधी का विवेक शून्य है और वे अपने दम पर एक भी लोकसभा सीट जीतने की क्षमता नहीं रखते हैं। भाजपा नेता के अनुसार, राहुल गांधी रायबरेली में केवल समाजवादी पार्टी की बैसाखी के सहारे चुनाव जीतने में सफल रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि एक दौर था जब कांग्रेस पर एंटी-इनकम्बेंसी का कोई असर नहीं होता था, लेकिन आज स्थिति इसके बिल्कुल विपरीत हो चुकी है और कांग्रेस पूरी तरह से बैसाखियों पर टिकी हुई है।
एंटी-इनकम्बेंसी का इतिहास और कांग्रेस की विफलता
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सुधांशु त्रिवेदी ने राहुल गांधी के उस बयान का विस्तार से जवाब दिया जिसमें उन्होंने कहा था कि देश में एंटी-इनकम्बेंसी एक स्थापित सच है। त्रिवेदी ने तर्क दिया कि कांग्रेस के खिलाफ एंटी-इनकम्बेंसी निश्चित रूप से बहुत लगातार और मजबूत रही है, जिसे राहुल गांधी अपनी समझ की कमी के कारण देख नहीं पा रहे हैं और उन्होंने इतिहास का हवाला देते हुए बताया कि 1967 के बाद से कांग्रेस तमिलनाडु में कभी सत्ता में वापस नहीं आ सकी, जबकि उस समय भारतीय जनता पार्टी का अस्तित्व भी नहीं था। इसी तरह, पश्चिम बंगाल में 1977 के बाद से कांग्रेस सत्ता से पूरी तरह बाहर है। वहां 1977 से 2011 तक 34 साल तक कम्युनिस्टों का शासन रहा, लेकिन राहुल गांधी इन ऐतिहासिक तथ्यों को न तो देखते हैं और न ही समझते हैं। त्रिवेदी ने कहा कि राहुल गांधी को भारतीय राजनीति की बुनियादी समझ भी नहीं है और वे केवल सतही बातें करते हैं।
चुनावी धांधली का दौर और कांग्रेस की कार्यशैली
भाजपा नेता ने कांग्रेस पार्टी को उस दौर की याद दिलाई जब देश में वोटर आईडी कार्ड नहीं होते थे और चुनाव के दौरान बूथ कैप्चरिंग, बैलेट बॉक्स लूटना और गोलीबारी जैसी हिंसक घटनाएं आम बात थीं और उन्होंने विशेष रूप से उल्लेख किया कि उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे बड़े राज्यों में शायद ही कोई ऐसा चुनाव होता था जिसमें लोग हताहत न हों। उस समय कांग्रेस के खिलाफ एंटी-इनकम्बेंसी इसलिए काम नहीं करती थी क्योंकि चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता का अभाव था। त्रिवेदी ने दावा किया कि आज सत्ता-विरोधी भावना स्वयं कांग्रेस पार्टी और विशेष रूप से गांधी परिवार के अंदर इतनी गहरी हो गई है कि वे किसी सहयोगी के बिना चुनाव लड़ने की स्थिति में भी नहीं हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी लगातार 100 सालों से किसी न किसी रूप में सत्ता में रही है, लेकिन आज उनकी हालत यह है कि वे सहयोगियों के बिना एक कदम भी नहीं चल सकते।
सहयोगियों पर निर्भरता: रायबरेली से वायनाड तक
सुधांशु त्रिवेदी ने गांधी परिवार की चुनावी जीत के पीछे के असली कारणों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि पिछले 25 सालों से कांग्रेस रायबरेली और अमेठी में केवल समाजवादी पार्टी के समर्थन से ही जीतती आ रही है। उन्होंने दावा किया कि न तो सोनिया गांधी और न ही राहुल गांधी में इतनी व्यक्तिगत काबिलियत है कि वे सपा के समर्थन के बिना अपने परिवार के इन गढ़ों को बचा सकें। इसके अलावा, उन्होंने राहुल गांधी और प्रियंका गांधी की वायनाड में जीत का जिक्र करते हुए कहा कि वे वहां केवल इसलिए जीते क्योंकि उन्हें मुस्लिम लीग का समर्थन प्राप्त था। उन्होंने बताया कि वायनाड एक ऐसी सीट है जहां मुस्लिम आबादी 60 से 65 प्रतिशत है। त्रिवेदी ने जोर देकर कहा कि राहुल गांधी में मुस्लिम लीग के समर्थन के बिना कोई भी सीट जीतने की राजनीतिक हैसियत नहीं बची है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जमीन से जुड़ा नेता बताया, जबकि राहुल गांधी को जमीन से उड़े हुए नेता की संज्ञा दी।
चुनाव आयोग पर आरोपों की सत्यता पर सवाल
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से जुड़े विवाद और मीडिया रिपोर्टों पर बोलते हुए सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि वे प्रेस की आजादी का पूरा सम्मान करते हैं, लेकिन किसी भी खबर का एक ठोस आधार होना चाहिए। उन्होंने सवाल किया कि क्या कांग्रेस के पास ऐसी कोई आधिकारिक रिपोर्ट है जिससे यह साबित हो सके कि चुनाव आयोग का फैसला सर्वसम्मति से नहीं लिया गया था? उन्होंने इस तथ्य की ओर भी ध्यान दिलाया कि ऐसी कोई प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं हुई है जिसमें तीनों चुनाव आयुक्त एक साथ मौजूद न रहे हों। त्रिवेदी ने कांग्रेस से सीधा सवाल किया कि जब किसी भी चुनाव आयुक्त का कोई आधिकारिक या अनौपचारिक बयान उपलब्ध नहीं है, तो राहुल गांधी के इन दावों का आधार क्या है? उन्होंने अप्रैल 2012 की एक पुरानी मीडिया रिपोर्ट का उदाहरण दिया जिसमें सेना द्वारा तख्तापलट की आशंका जताई गई थी और पूछा कि क्या जनता को ऐसी सभी अटकलों पर यकीन करना चाहिए जिनका कोई प्रमाण न हो।
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