धर्मेंद्र प्रधान की पहली प्रतिक्रिया: इस्तीफे के बाद बोले Gen Z को गुमराह करने की कोशिश हुई

धर्मेंद्र प्रधान ने शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफे के बाद पहली बार प्रतिक्रिया दी। उन्होंने जेन जेड को गुमराह करने का आरोप लगाया और नवीन पटनायक पर निशाना साधा।

Aug 9, 2026 - 07:35
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धर्मेंद्र प्रधान की पहली प्रतिक्रिया: इस्तीफे के बाद बोले Gen Z को गुमराह करने की कोशिश हुई

भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के वरिष्ठ नेता और संबलपुर से सांसद धर्मेंद्र प्रधान ने केंद्रीय मंत्रिमंडल से अपने इस्तीफे को लेकर पहली बार सार्वजनिक रूप से अपनी बात रखी है। शनिवार को एक कार्यक्रम के दौरान प्रधान ने कहा कि नीट पेपर लीक मामले को लेकर हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान जेन जेड (Gen Z) यानी आज की युवा पीढ़ी को गुमराह करने की कोशिशें की गईं। केंद्रीय शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद यह उनकी पहली विस्तृत प्रतिक्रिया है, जो उन्होंने संबलपुर की जीएम यूनिवर्सिटी में छात्रों और शिक्षकों को संबोधित करते हुए दी।

इस्तीफे के पीछे की कहानी

धर्मेंद्र प्रधान ने बताया कि दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए बड़े विरोध प्रदर्शनों और नीट विवाद के बीच उन्होंने खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की थी। उन्होंने प्रधानमंत्री के सामने केंद्रीय मंत्रिपरिषद से इस्तीफा देने की पेशकश की थी। प्रधान ने आधिकारिक तौर पर 25 जुलाई को केंद्रीय शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया था। अपने संबोधन में उन्होंने स्पष्ट किया कि उनके लिए पद कभी भी महत्वपूर्ण नहीं था, बल्कि छात्रों का भविष्य और देश की शिक्षा व्यवस्था की शुचिता अधिक मायने रखती है।

युवाओं की आकांक्षाएं और आंकड़े

जेन जेड के बारे में बात करते हुए प्रधान ने उन्हें हमारे बच्चे बताया। उन्होंने कहा कि कुछ लोगों ने राजनीतिक स्वार्थ के लिए इन युवाओं को भ्रमित करने का प्रयास किया। उन्होंने देश की जनसांख्यिकीय स्थिति पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारत में हर साल कम से कम 2 करोड़ बच्चे जन्म लेते हैं। इस हिसाब से पिछले 10 सालों में देश में 20 करोड़ बच्चे पैदा हुए हैं। प्रधान के अनुसार, इन सभी बच्चों की अपनी अलग आकांक्षाएं हैं और यही युवा पीढ़ी भविष्य में भारत को विश्व गुरु बनाने का सपना पूरा करेगी।

नवीन पटनायक और बीजेडी पर प्रहार

धर्मेंद्र प्रधान ने रायराखोल में एक अन्य बैठक के दौरान ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री और बीजेडी अध्यक्ष नवीन पटनायक पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि वह बीजेडी कार्यकर्ताओं द्वारा किए जा रहे विरोध-प्रदर्शनों और वापस जाओ के नारों से बिल्कुल भी विचलित नहीं हैं। एयरपोर्ट के पास बीजेडी की युवा और छात्र विंग द्वारा किए गए प्रदर्शन का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि मैं एक किसान का बेटा हूं। अगर आप मुझे वापस जाने के लिए कहेंगे भी, तो भी मैं बार-बार वापस आऊंगा। उन्होंने नवीन पटनायक पर आरोप लगाया कि वह युवाओं को उनके खिलाफ विरोध-प्रदर्शनों में झोंक रहे हैं और प्रधान ने यह भी कहा कि नवीन बाबू उन्हें ओडिशा के लोगों के लिए शर्म की बात और एक बुरा इंसान तक कहते हैं।

ओडिशा की प्रतिष्ठा और प्रसन्ना आचार्य

अपने संबोधन के दौरान प्रधान ने जनता से पूछा कि क्या उन्होंने कभी ऐसा कोई काम किया है जिससे ओडिशा के लोगों को शर्मिंदा होना पड़े? इस पर वहां मौजूद भीड़ ने जोर से नहीं में जवाब दिया और उन्होंने कहा कि भले ही वह राज्य के लिए नया सम्मान न ला पा रहे हों, लेकिन उन्होंने कभी ऐसा काम नहीं किया जिससे राज्य की प्रतिष्ठा धूमिल हो। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय भगवान जगन्नाथ और संबलपुर की अधिष्ठात्री देवी समलेश्वरी के आशीर्वाद को दिया, जिनकी कृपा से वह 12 साल पहले केंद्रीय मंत्री बने थे। विशेष बात यह रही कि प्रधान ने यह टिप्पणी उस मंच से की जहां बीजेडी विधायक और ओडिशा विधानसभा में उप-नेता प्रसन्ना आचार्य भी मौजूद थे। प्रधान ने बताया कि उन्होंने यहां आने से पहले प्रसन्ना भाई से सलाह ली थी और उनकी अनुमति के बाद ही वह कार्यक्रम में शामिल हुए।

बीजेडी का पलटवार और गंभीर आरोप

धर्मेंद्र प्रधान के बयानों पर बीजेडी ने भी कड़ी प्रतिक्रिया दी है। संबलपुर के जिलाध्यक्ष और पूर्व मंत्री रोहित पुजारी ने कहा कि प्रधान को किसी और ने नहीं बल्कि उनकी अपनी सरकार की नीतियों ने बदनाम किया है। पुजारी ने आरोप लगाया कि जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे छात्रों पर पुलिस द्वारा किए गए लाठी-चार्ज और आंसू गैस के इस्तेमाल ने सरकार की छवि खराब की। उन्होंने एक बेहद गंभीर दावा करते हुए कहा कि इन घटनाओं की वजह से 21 बच्चों ने आत्महत्या की है। पुजारी के अनुसार, परीक्षा में शामिल होने वाले 22 लाख छात्रों में से लगभग 21 लाख छात्र डिप्रेशन का शिकार हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि प्रधान ने खुद को ही बदनाम किया है और इसके लिए किसी और को दोष देना गलत है। इस बीच, विरोध की आशंका को देखते हुए संबलपुर पुलिस ने एहतियात के तौर पर बीजेडी के लगभग 30 कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया था।

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