पाकिस्तान में किसानों का महाआंदोलन: 100 शहरों में प्रदर्शन, MSP और निजीकरण पर टकराव

पाकिस्तान के 100 से अधिक शहरों में किसानों ने MSP और निजीकरण के खिलाफ बड़ा प्रदर्शन किया। जानें क्या हैं उनकी मुख्य मांगें।

Apr 18, 2026 - 17:35
 0  0
पाकिस्तान में किसानों का महाआंदोलन: 100 शहरों में प्रदर्शन, MSP और निजीकरण पर टकराव

पाकिस्तान में शुक्रवार को किसानों ने देशव्यापी स्तर पर बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन 'अंतरराष्ट्रीय किसान संघर्ष दिवस' के अवसर पर पाकिस्तान किसान राबिता कमेटी (PKRC) के आह्वान पर आयोजित किया गया था। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, देश के 100 से अधिक शहरों में किसान सड़कों पर उतरे और सरकार की मौजूदा कृषि नीतियों के खिलाफ अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया। प्रदर्शनकारी किसानों ने सरकार से अपनी आजीविका की रक्षा के लिए तत्काल सुधारात्मक कदम उठाने की मांग की है।

मुख्य मांगें और न्यूनतम समर्थन मूल्य का मुद्दा

प्रदर्शन के दौरान किसानों की सबसे प्रमुख मांग गेहूं के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) को लेकर रही। किसानों ने मांग की है कि गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य 4,000 पाकिस्तानी रुपये प्रति मन (maund) निर्धारित किया जाए। इसके साथ ही, किसानों ने सरकार की उस योजना का भी पुरजोर विरोध किया है, जिसके तहत गेहूं की खरीद की जिम्मेदारी 11 निजी कंपनियों को सौंपने की तैयारी की जा रही है। किसानों का तर्क है कि इस फैसले से छोटे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान होगा और उनकी बाजार में स्थिति और भी कमजोर हो जाएगी।

कॉरपोरेट खेती के मॉडल का विरोध और बेदखली

किसानों ने सरकार द्वारा प्रस्तावित कॉरपोरेट खेती के मॉडल को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। प्रदर्शनकारियों ने मांग की है कि बटाई पर खेती करने वाले किसानों को जारी किए गए बेदखली के नोटिस तुरंत वापस लिए जाएं। किसानों का कहना है कि कॉरपोरेट हितों को बढ़ावा देने वाली ये नीतियां ग्रामीण अर्थव्यवस्था को तबाह कर देंगी।

देशव्यापी प्रदर्शन के प्रमुख केंद्र

यह विरोध प्रदर्शन पाकिस्तान के लगभग सभी प्रांतों में देखा गया। पंजाब प्रांत में लाहौर, मुल्तान, बहावलपुर, साहीवाल और सरगोधा जैसे प्रमुख शहरों में बड़े स्तर पर रैलियां निकाली गईं। सिंध प्रांत में किसानों ने हैदराबाद, सुक्कुर, लरकाना और ठट्टा में सड़कों पर उतरकर अपना गुस्सा जाहिर किया। खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के पेशावर, स्वात, एबटाबाद और बन्नू में भी विशाल रैलियां आयोजित की गईं। वहीं, बलूचिस्तान प्रांत के क्वेटा, मस्तुंग और कलात में भी किसानों ने सरकार विरोधी प्रदर्शनों में हिस्सा लिया।

सरकार की नीतियों पर तीखा प्रहार

लाहौर में आयोजित एक बड़ी सभा को संबोधित करते हुए पाकिस्तान किसान राबिता कमेटी (PKRC) की महासचिव रिफ्फत मकसूद ने सरकार की कार्यप्रणाली की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि सरकार के पिछले दो साल का कार्यकाल किसानों के लिए 'बहुत नुकसानदायक' साबित हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ग्रामीण क्षेत्रों की समस्याओं की अनदेखी कर रही है और छोटे किसानों के कल्याण के बजाय कॉरपोरेट घरानों के हितों को प्राथमिकता दे रही है।

आंदोलन तेज करने की चेतावनी

किसान संगठनों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर तुरंत ध्यान नहीं दिया गया, तो आने वाले महीनों में यह आंदोलन और भी उग्र और तेज किया जाएगा और रिपोर्टों के अनुसार, पाकिस्तान के किसान पहले से ही खेती की बढ़ती लागत, फसलों के अस्थिर बाजार मूल्य और जलवायु परिवर्तन से जुड़ी गंभीर समस्याओं का सामना कर रहे हैं। आर्थिक संकट से जूझ रहे पाकिस्तान के लिए किसानों का यह देशव्यापी असंतोष एक नई और बड़ी चुनौती बनकर उभरा है।

What's Your Reaction?

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow