फ्रांस और जर्मनी में प्रदर्शनों के दौरान हिंसा और लूटपाट की बड़ी घटनाएं
फ्रांस और जर्मनी में महंगाई और अन्य मुद्दों को लेकर हुए प्रदर्शनों के दौरान हिंसा, पुलिस पर हमले और दुकानों में लूटपाट की घटनाएं सामने आई हैं।
यूरोप के विभिन्न देशों में युवाओं से प्रेरित प्रदर्शनों में शनिवार को लाखों लोगों ने हिस्सा लिया, जहां कुछ स्थानों पर हिंसा की घटनाएं हुईं, लेकिन ज्यादातर स्थानों पर प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहे। फ्रांस में बढ़ती महंगाई के खिलाफ शनिवार को हुए व्यापक प्रदर्शनों के दौरान पिछले दो वीकेंड की तुलना में कम हिंसा हुई, जिससे अधिकारियों ने राहत की सांस ली है। हालांकि, आज स्कूलों के दोबारा खुलने के बाद और प्रदर्शन होने की आशंका जताई जा रही है। इस बीच, जर्मनी में शनिवार को देशव्यापी प्रदर्शनों के बाद कुछ शहरों में हिंसा भड़क गई और दंगाइयों ने पुलिस पर हमले करने के साथ दुकानों में लूटपाट की।
पेरिस के पूर्वी हिस्से में शनिवार को मार्च खत्म होने के बाद दंगाइयों ने पुलिसकर्मियों पर पेट्रोल बम फेंके, जिससे तीन अधिकारी घायल हो गए और एक कार में आग लग गई। शहर में एफिल टावर के सामने स्थित एक दर्शनीय स्थल पर नकाबपोश लोगों के समूहों ने पुलिसकर्मियों पर पटाखे फेंके। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों की भीड़ को तितर-बितर करने के लिए कार्रवाई की। हालांकि, इस बार 17 और 24 अक्टूबर को हुए प्रदर्शनों की तुलना में हिंसा काफी कम हुई। 17 अक्टूबर को प्रदर्शन के दौरान नगर निगम के एक भवन में आग लगा दी गई थी और 2,000 से अधिक दुकानों में लूटपाट की गई थी।
पेरिस और मार्से की पुलिस ने जानकारी दी है कि कुछ दुकानों को निशाना बनाया गया, लेकिन किसी बड़े नुकसान की खबर नहीं है। जर्मनी में शनिवार को एक लाख से अधिक लोगों ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन किए। इनमें ज्यादातर युवा शामिल थे और प्रदर्शनकारियों ने सरकार से शिक्षा, आवास और जलवायु संरक्षण पर अधिक धन खर्च करने तथा रोजमर्रा की जिंदगी को अधिक किफायती बनाने की मांग की। हालांकि, कुछ शहरों में रात के समय प्रदर्शन हिंसक हो गए और स्थिति तनावपूर्ण हो गई।
फ्रैंकफर्ट में प्रदर्शन के बाद दंगाइयों ने शहर के मध्य क्षेत्र में पुलिस पर हमला किया और दुकानों में लूटपाट की। इस दौरान कई प्रदर्शनकारी और पुलिसकर्मी घायल हो गए तथा कुल 30 लोगों को हिरासत में लिया गया। पुलिस ने शहर के मध्य क्षेत्र में एक इलाके की घेराबंदी कर दी, जिसके बाद रविवार तड़के तक स्थिति शांत हो सकी और फ्रैंकफर्ट हेसे प्रांत में स्थित है। हेसे प्रांत के गवर्नर बोरिस राइन ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि मैं फ्रैंकफर्ट में हुई हिंसक घटनाओं से स्तब्ध हूं और इसके लिए जिम्मेदार लोगों को बख्शा नहीं जाएगा।
शनिवार रात कोलोन में भी हिंसा भड़क उठी, जहां पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पानी की बौछारों का इस्तेमाल किया। बर्लिन में प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर बोतलों और आतिशबाजी में इस्तेमाल होने वाली सामग्री से हमला किया। शनिवार को हुए प्रदर्शनों का आयोजन करने वाले युवा संगठन जेन जी रेगेल्ट ने इंस्टाग्राम पर जारी एक बयान में स्पष्ट किया है कि उसका किसी भी तरह की हिंसा या प्रदर्शनों में शामिल नहीं रहे अन्य समूहों और व्यक्तियों की हिंसक गतिविधियों से कोई संबंध नहीं है। इसके अलावा, पुर्तगाल की राजधानी लिस्बन में किफायती आवास की मांग को लेकर हुए प्रदर्शनों के बाद दंगा रोधी पुलिस ने रात में एक चौक पर एकत्र प्रदर्शनकारियों को बलपूर्वक हटा दिया।
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