ज्ञानेश कुमार को हटना होगा और जाना होगा जेल राहुल गांधी का रामलीला मैदान में हमला

दिल्ली के रामलीला मैदान में राहुल गांधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर तीखा हमला बोला और कहा कि उन्हें पद से हटना होगा और जेल जाना होगा।

Nov 1, 2026 - 22:35
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ज्ञानेश कुमार को हटना होगा और जाना होगा जेल राहुल गांधी का रामलीला मैदान में हमला

दिल्ली के ऐतिहासिक रामलीला ग्राउंड में रविवार को विपक्ष की ओर से एक बड़ा शक्ति प्रदर्शन किया गया। इस विशाल आयोजन में राहुल गांधी की अगुवाई में देश भर से विपक्षी दलों के दिग्गज नेता जुटे। इस रैली में कांग्रेस सांसद और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव, राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्वी यादव और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी समेत इंडिया गठबंधन के तमाम बड़े नेता रामलीला मैदान में मौजूद रहे। इस शक्ति प्रदर्शन के दौरान मुख्य मंच से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्षी नेताओं ने एक-एक करके तीखे निशाने साधे और देश की मौजूदा राजनीतिक तथा चुनावी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए।

रैली को संबोधित करते हुए लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त पर सीधा और बेहद आक्रामक हमला बोला। उन्होंने कहा कि इस देश में पिछले कई सालों से लगातार वोटों की चोरी हो रही है। राहुल गांधी ने अपने भाषण में कई राज्यों और चुनावों का विशेष रूप से जिक्र किया। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश, हरियाणा, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, कर्नाटक और साल 2024 के लोकसभा चुनाव- इन सभी चुनावों में वोटों की बड़े पैमाने पर चोरी हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन यानी ईवीएम के जरिए, और वोटर लिस्ट से सोची-समझी साजिश के तहत नाम हटाने या उसमें फर्जी नाम जोड़ने के जरिए आम जनता के वोट चुराए गए हैं।

ज्ञानेश कुमार को पद से हटना होगा और वह जेल जाएंगे

अपने संबोधन को आगे बढ़ाते हुए राहुल गांधी ने दावा किया कि वह जो भी कहते हैं, वह हमेशा सच साबित होता है। उन्होंने देश के हर नागरिक और खासकर देश के हर युवा को संबोधित करते हुए कहा कि ज्ञानेश कुमार को मुख्य चुनाव आयुक्त के पद से निश्चित रूप से हटा दिया जाएगा। राहुल गांधी ने बेहद कड़े शब्दों में यह भी घोषणा की कि ज्ञानेश कुमार को सिर्फ अपने पद से ही नहीं हटना होगा, बल्कि वह जेल भी जाएंगे। उन्होंने देश के मौजूदा हालातों पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आज देश का अन्नदाता यानी किसान अपनी मेहनत का हक पाने के लिए तरस रहा है, देश के युवाओं को उनकी योग्यता के अनुसार रोजगार नहीं मिल रहा है, और मेहनतकश मजदूरों को उनका हक नहीं मिल पा रहा है। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि देश की सारी संपत्ति और संसाधन कुछ दो-तीन चुनिंदा उद्योगपतियों और पूंजीपतियों के हाथों में चले गए हैं। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि हमें ऐसा भारत बिल्कुल नहीं चाहिए और देश की जनता ऐसे भारत को कभी भी स्वीकार नहीं करेगी।

देश को वापस सही रास्ते पर लाने का पहला कदम

राहुल गांधी ने समावेशी और न्यायसंगत भारत की कल्पना को साझा करते हुए कहा कि जैसे भगवान शिव की बारात में किसी भी प्रकार का कोई भेदभाव नहीं होता और उसमें कोई भी शामिल हो सकता है, ठीक उसी प्रकार देश की व्यवस्था होनी चाहिए। उन्होंने सवालिया लहजे में कहा कि क्या किसी भी नागरिक को देश की मुख्यधारा में हिस्सा लेने से रोका जा सकता है। हम बिल्कुल ऐसा ही भारत देखना चाहते हैं। राहुल गांधी ने जोर देकर कहा कि अगर देश का कोई किसान दिन-रात कड़ी मेहनत करता है, तो उसे उसकी फसल का सही और पूरा फल मिलना ही चाहिए। इसी तरह, अगर देश का कोई छात्र दिन-रात एक करके अठारह घंटे तक पढ़ाई करता है, तो उसे उसकी योग्यता के आधार पर रोजगार मिलना ही चाहिए और हम ऐसा देश कतई नहीं चाहते जो महज दो-तीन उद्योगपतियों का बनकर रह जाए। देश को वापस सही और लोकतांत्रिक रास्ते पर लाने का सबसे पहला और अनिवार्य कदम मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को उनके पद से हटाना है।

ज्ञानेश कुमार के डरे होने पर राहुल गांधी ने जताई संवेदना

राहुल गांधी ने अपने भाषण में एक अनोखा पहलू रखते हुए कहा कि उन्हें इस बात का बुरा लग रहा है कि ज्ञानेश कुमार अंदर से डरे हुए हैं और वह रात को ढंग से सो नहीं पा रहे हैं और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि मैं आपको यह बात पूरी जिम्मेदारी के साथ बता रहा हूँ कि ज्ञानेश कुमार रात को चैन से सो नहीं पाते हैं। मुझे व्यक्तिगत रूप से इस बात का थोड़ा बुरा लग रहा है कि ज्ञानेश कुमार डरे हुए हैं और अनिद्रा के शिकार हो रहे हैं। लेकिन इसके साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उन्होंने देश के खिलाफ सबसे बड़ा अपराध किया है। ज्ञानेश कुमार ने देश की जनता की आवाज और उसकी मूल आत्मा को दबाने का कुत्सित प्रयास किया है। इसके बावजूद उन्होंने कहा कि हम नफरत या दुश्मनी की राजनीति करने वाले लोग नहीं हैं, बल्कि हम देश में प्यार और मोहब्बत बांटने वाले लोग हैं। हम इस महान देश में एक बार फिर से आपसी प्यार, भाईचारा और सद्भाव वापस लाना चाहते हैं। यह विरोध प्रदर्शन किसी एक राजनीतिक दल या किसी एक नेता का निजी विरोध नहीं है, बल्कि यह एक संयुक्त और राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शन है। यह भारत का विरोध है और यह भारत की अपनी आवाज है।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने उठाए सवाल

दूसरी ओर, राहुल गांधी की इस रामलीला मैदान की रैली की टाइमिंग को लेकर देश के केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने तीखे सवाल उठाए हैं। अमित शाह ने सार्वजनिक रूप से सवाल पूछते हुए कहा कि आखिर क्या वजह है कि जिस खास दिन और समय पर सिखों की हत्या हुई थी, ठीक उसी दिन राहुल गांधी ने इस तरह का बड़ा जलसा और राजनीतिक रैली आयोजित की। इस प्रकार, रामलीला मैदान की इस महारैली ने चुनावी पारदर्शिता, संवैधानिक संस्थाओं की भूमिका और राजनीतिक बयानबाजी के मोर्चे पर देश की सियासत में एक बार फिर से भारी उबाल ला दिया है, जहाँ विपक्ष और सत्ता पक्ष आमने-सामने आ गए हैं।

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