मक्का पर हमला हुआ तो आखिरी सांस तक सऊदी का साथ देगा पाकिस्तान

पाकिस्तान ने सऊदी अरब की सुरक्षा को लेकर अपनी नीति बदली है। सेना ने ऐलान किया है कि मक्का पर हमले की स्थिति में पाकिस्तान आखिरी सांस तक सऊदी का साथ देगा।

Sep 19, 2026 - 09:35
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मक्का पर हमला हुआ तो आखिरी सांस तक सऊदी का साथ देगा पाकिस्तान

सऊदी अरब और हूतियों के बीच चल रहे संघर्ष में पाकिस्तान ने एक बहुत बड़ा यू-टर्न लिया है। पाकिस्तान ने अब यह साफ कर दिया है कि अगर पवित्र शहर मक्का पर किसी भी तरह का हमला होता है, तो वह अपनी आखिरी सांस तक सऊदी अरब का साथ देगा। यह बयान ऐसे समय में आया है जब हूती विद्रोही लगातार सऊदी अरब के विभिन्न ठिकानों को निशाना बना रहे हैं। शुरुआत में पाकिस्तान इस मामले में थोड़ा पीछे हटता दिख रहा था, लेकिन अब उसने अपनी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट कर दी है।

नीति में बदलाव और ख्वाजा आसिफ का बयान

कुछ समय पहले तक पाकिस्तान की सरकार इस मामले में सीधे तौर पर शामिल होने से बच रही थी। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने कहा था कि सऊदी अरब के साथ पाकिस्तान का मक्का पैक्ट जरूर है, लेकिन इस तरह के आपसी झगड़ों में पाकिस्तान अपनी फौज को नहीं उतारेगा। उनके इस बयान से यह संकेत गया था कि पाकिस्तान इस युद्ध में तटस्थ रहना चाहता है। लेकिन हूतियों के बढ़ते हमलों और पाकिस्तान के भीतर बढ़ते दबाव ने सरकार और सेना को अपनी रणनीति बदलने पर मजबूर कर दिया है।

पाकिस्तानी सेना का बड़ा ऐलान

पाकिस्तान के डीजी आईएसपीआर अहमद शरीफ चौधरी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान देश की नई नीति का खुलासा किया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अगर मक्का पर हमला हुआ तो पाकिस्तान इस जंग में खुलकर सऊदी अरब का साथ देगा और अहमद शरीफ चौधरी ने जोर देकर कहा कि पवित्र स्थल मक्का की सुरक्षा करना हर मुसलमान की जिम्मेदारी है और इसका मक्का पैक्ट से कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान पूरी तरह से सऊदी अरब के साथ खड़ा है और सऊदी के लोग जो भी मदद मांगेंगे, पाकिस्तान वह देने के लिए पूरी तरह तैयार है।

जनता का दबाव और विरोध प्रदर्शन

पाकिस्तान सरकार और फौज द्वारा लिया गया यह फैसला अचानक नहीं आया है। असल में, जब रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने फौज भेजने से इनकार किया था, तब पाकिस्तान के भीतर उनके खिलाफ जबरदस्त विरोध शुरू हो गया था। विपक्षी दलों और धार्मिक संगठनों ने पूरे मुल्क में रैलियां और प्रोटेस्ट शुरू कर दिए थे। सरकार पर यह आरोप लगाया जा रहा था कि वह इस्लाम के सबसे पवित्र स्थल की रक्षा करने के अपने कर्तव्य से पीछे हट रही है। लोगों का कहना था कि मक्का पर हमला होने की स्थिति में जिहाद करना हर मुसलमान का फर्ज है।

फजलुर रहमान की चेतावनी

इस पूरे विरोध प्रदर्शन में जमीयत उलेमा ए इस्लाम के चीफ फजलुर रहमान ने मुख्य भूमिका निभाई। उन्होंने पाकिस्तान के अलग-अलग हिस्सों में बड़े-बड़े जलसे किए और सरकार को चेतावनी दी। फजलुर रहमान ने एक बड़ी रैली में कहा था कि अगर पाकिस्तान की फौज पीछे हटेगी, तो पाकिस्तान का बच्चा-बच्चा सऊदी अरब जाकर जिहाद करने के लिए तैयार है। इस तरह के बयानों ने जनता के बीच एक लहर पैदा कर दी, जिससे शहबाज शरीफ की सरकार भारी दबाव में आ गई। इसी दबाव का नतीजा है कि आज पाकिस्तानी फौज को खुलकर सऊदी के समर्थन में आना पड़ा है।

शहबाज शरीफ का रहस्यमयी दौरा

एक तरफ जहां पाकिस्तान में जंग के नगाड़े बज रहे हैं और सेना बड़े-बड़े दावे कर रही है, वहीं दूसरी तरफ प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ चुपचाप देश छोड़कर लंदन निकल गए हैं। बताया जा रहा है कि वह 3 दिन तक लंदन में रुकेंगे और उसके बाद वहां से अमेरिका जाएंगे। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि सरकार ने इस दौरे के बारे में कोई विस्तृत जानकारी साझा नहीं की है और शहबाज शरीफ लंदन क्यों गए हैं और वहां उनकी मुलाकात किससे होने वाली है, इसे लेकर सस्पेंस बना हुआ है।

अमेरिका और सऊदी अरब के बदलते रिश्ते

सऊदी अरब के लिए मौजूदा स्थिति काफी चुनौतीपूर्ण है क्योंकि वह इस जंग में खुद को अकेला महसूस कर रहा है और सबसे चिंताजनक बात यह है कि अमेरिका ने सऊदी अरब का साथ छोड़ दिया है। खबरें यह भी हैं कि अमेरिका पर्दे के पीछे हूती फाइटर्स के साथ बातचीत कर रहा है। इसके पीछे मुख्य कारण यह बताया जा रहा है कि अमेरिका को सऊदी अरब की सुरक्षा से ज्यादा कच्चे तेल की आपूर्ति की चिंता है और अमेरिका नहीं चाहता कि इस युद्ध की वजह से तेल की कीमतों में कोई बड़ा उछाल आए, इसलिए वह हूतियों के साथ नरमी बरत रहा है। ऐसे में पाकिस्तान का समर्थन सऊदी अरब के लिए बहुत मायने रखता है।

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