राघव चड्ढा ने छोड़ी AAP: बीजेपी में शामिल, दो-तिहाई सांसदों के साथ का दावा

राघव चड्ढा ने आम आदमी पार्टी छोड़ बीजेपी का दामन थाम लिया है। जानें पंजाब सरकार से लेकर राज्यसभा तक उनके और केजरीवाल के बीच आई दूरियों की पूरी कहानी।

Apr 24, 2026 - 20:35
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राघव चड्ढा ने छोड़ी AAP: बीजेपी में शामिल, दो-तिहाई सांसदों के साथ का दावा

आम आदमी पार्टी के प्रमुख चेहरों में शुमार रहे और अरविंद केजरीवाल के बेहद करीबी माने जाने वाले राघव चड्ढा ने आधिकारिक तौर पर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) में शामिल होने की घोषणा कर दी है। राघव चड्ढा के साथ दो अन्य सांसदों ने भी बीजेपी अध्यक्ष नितिन नबीन से मुलाकात की और पार्टी की सदस्यता ग्रहण की। इस बड़े राजनीतिक घटनाक्रम के बाद राघव चड्ढा ने एक बड़ा दावा किया है कि आम आदमी पार्टी के कुल राज्यसभा सांसदों में से दो-तिहाई सांसद जल्द ही बीजेपी का दामन थामेंगे। उनके इस ऐलान के बाद आम आदमी पार्टी ने उन पर तीखा हमला बोला है और उन्हें 'गद्दार' करार दिया है।

पंजाब में 'डि-फैक्टो सीएम' और भगवंत मान से टकराव

साल 2022 में जब पंजाब में आम आदमी पार्टी की पूर्ण बहुमत की सरकार बनी, तब राघव चड्ढा की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती थी। उस दौरान उन्हें पंजाब का 'डि-फैक्टो सीएम' (De-facto CM) कहा जाता था। राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा आम थी कि राघव चड्ढा सीधे अरविंद केजरीवाल के संपर्क में रहते हैं और बैक डोर से पंजाब सरकार का संचालन कर रहे हैं। इसी समय के दौरान पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान और राघव चड्ढा के बीच टकराव की खबरें भी प्रमुखता से सामने आईं। राघव चड्ढा पर आरोप लगे कि वे भगवंत मान के समानांतर पंजाब सरकार चला रहे हैं, अधिकारियों की बैठकें ले रहे हैं और महत्वपूर्ण नीतिगत फैसले ले रहे हैं। हालांकि, उस समय न तो राघव चड्ढा और न ही भगवंत मान ने सार्वजनिक रूप से कोई नाराजगी जाहिर की, लेकिन अंदरूनी तौर पर यह सत्ता संघर्ष जारी रहा।

केजरीवाल की गिरफ्तारी और राघव की बढ़ती दूरियां

पार्टी सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री भगवंत मान ने राघव चड्ढा की कार्यशैली को लेकर अरविंद केजरीवाल के सामने कई बार अपनी नाराजगी व्यक्त की थी, लेकिन राघव लंबे समय तक केजरीवाल के पसंदीदा बने रहे और हालांकि, पार्टी आलाकमान और राघव के बीच वास्तविक दरार तब शुरू हुई जब आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और विशेष रूप से अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी हुई। इस संकट की घड़ी में भगवंत मान अपने कैबिनेट मंत्रियों और विधायकों के साथ दिल्ली में धरना देने पहुंचे, लेकिन राघव चड्ढा इन सभी विरोध कार्यक्रमों से पूरी तरह दूर रहे। पार्टी को उम्मीद थी कि राघव इस कठिन समय में मजबूती से साथ खड़े होंगे, जबकि भगवंत मान लगातार अपनी वफादारी साबित करने के लिए प्रदर्शनों में सक्रिय रहे। केजरीवाल के जेल से बाहर आने के बाद राघव चड्ढा को पंजाब के मामलों से पूरी तरह अलग कर दिया गया और धीरे-धीरे वे केंद्रीय नेतृत्व से भी दूर होते चले गए।

संसद में पार्टी लाइन से अलग रुख और पद से निष्कासन

राघव चड्ढा और पार्टी के बीच मतभेद तब और गहरे हो गए जब उन्होंने राज्यसभा में पार्टी के निर्देशों के विपरीत आचरण करना शुरू किया। जिन मुद्दों पर आम आदमी पार्टी ने अन्य विपक्षी दलों के साथ खड़े होने का निर्णय लिया था, राघव उन मौकों पर अनुपस्थित रहे। इसके अतिरिक्त, पार्टी ने राज्यसभा में जिन विषयों को उठाने के निर्देश दिए थे, राघव ने उनकी जगह मिडिल क्लास, टैक्स और गिग वर्कर्स जैसे अन्य मुद्दों को प्राथमिकता दी। पार्टी नेतृत्व को लगा कि राघव चड्ढा पार्टी लाइन से हटकर अपनी एक स्वतंत्र नेता की छवि बनाने का प्रयास कर रहे हैं। इसी के परिणामस्वरूप, उन्हें राज्यसभा में आम आदमी पार्टी के डिप्टी लीडर के पद से हटा दिया गया। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने भी उन पर निशाना साधते हुए उन्हें 'कॉम्प्रोमाइज्ड' करार दिया था।

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