यूपी बिजली बिल: 3.73 करोड़ उपभोक्ताओं को बड़ी राहत, अगस्त में 2.92 प्रतिशत कम आएगा बिल
उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन ने अगस्त के बिजली बिलों में 2 दशमलव 92 प्रतिशत की कटौती का आदेश दिया है, जिससे 3 करोड़ 73 लाख उपभोक्ताओं को 221 करोड़ 14 लाख रुपये की राहत मिलेगी।
उत्तर प्रदेश के बिजली उपभोक्ताओं के लिए अगस्त का महीना राहत भरी खबर लेकर आया है। प्रदेश के लगभग 3 करोड़ 73 लाख बिजली उपभोक्ताओं को अगस्त महीने के बिजली बिल में बड़ी राहत मिलने जा रही है। उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (यूपीपीसीएल) ने मई महीने की कम बिजली खरीद लागत का सीधा लाभ उपभोक्ताओं तक पहुंचाने का निर्णय लिया है। इस निर्णय के तहत अगस्त में जारी होने वाले बिजली बिलों में 2 दशमलव 92 प्रतिशत की कटौती की जाएगी। इस कटौती के माध्यम से प्रदेश के उपभोक्ताओं को कुल 221 करोड़ 14 लाख रुपये की बड़ी वित्तीय राहत प्राप्त होगी।
बिजली खरीद लागत में कमी का मिला फायदा
बिजली बिलों में इस कटौती का मुख्य कारण मई महीने के दौरान बिजली खरीद की लागत में आई कमी है। टैरिफ आदेशों के प्रावधानों के अनुसार, उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग ने मई माह के लिए बिजली खरीद की अनुमानित लागत 4 रुपये 94 पैसे प्रति यूनिट निर्धारित की थी। हालांकि, जब वास्तविक आंकड़ों का मिलान किया गया, तो पता चला कि वास्तविक खरीद लागत केवल 4 रुपये 73 पैसे प्रति यूनिट ही रही। अनुमानित लागत और वास्तविक लागत के बीच के इस अंतर के कारण फ्यूल सरचार्ज में कमी आई है। यूपीपीसीएल ने इसी ईंधन एवं बिजली खरीद लागत समायोजन (एफपीपीसीए) के तहत उपभोक्ताओं को लाभ देने का आधिकारिक आदेश जारी कर दिया है।
लगातार दूसरे महीने उपभोक्ताओं को मिली राहत
यह लगातार दूसरा ऐसा महीना है जब उत्तर प्रदेश के करोड़ों उपभोक्ताओं को बिजली बिल के मोर्चे पर राहत मिल रही है। इससे पहले जून के महीने में उपभोक्ताओं को 10 प्रतिशत का अतिरिक्त ईंधन अधिभार चुकाना पड़ा था। लेकिन इसके बाद जुलाई के महीने में उपभोक्ताओं को 4 दशमलव 43 प्रतिशत की राहत दी गई थी। अब अगस्त के महीने में भी 2 दशमलव 92 प्रतिशत की कमी के साथ बिल कम आएगा। यह सिलसिला उपभोक्ताओं के लिए आर्थिक रूप से काफी मददगार साबित हो रहा है, विशेषकर उन परिवारों के लिए जो बढ़ती बिजली दरों से चिंतित थे।
नियामक आयोग की सख्ती का असर
उपभोक्ताओं को मिल रही इस राहत के पीछे उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग का कड़ा रुख एक बड़ी वजह रहा है। दरअसल, यूपीपीसीएल प्रबंधन ने पुराने बकाया भुगतानों को भी ईंधन अधिभार की गणना में शामिल करने की कोशिश की थी। इसी आधार पर जून और जुलाई के बिलों में 10-10 प्रतिशत की अतिरिक्त वसूली का निर्णय लिया गया था। जून में यह वसूली की भी गई, लेकिन जब जुलाई में भी इसे लागू करने की तैयारी थी, तब नियामक आयोग ने इस पर आपत्ति जताई। आयोग ने स्पष्ट निर्देश दिया कि एफपीपीसीए की गणना केवल वर्तमान बिजली खरीद लागत और ट्रांसमिशन शुल्क के आधार पर ही की जा सकती है। इसमें पुराने भुगतानों या अन्य मदों को जोड़ना नियमों के विरुद्ध है। आयोग की इसी सख्ती के कारण जुलाई में 4 दशमलव 43 प्रतिशत और अब अगस्त में 2 दशमलव 92 प्रतिशत की राहत का रास्ता साफ हुआ है।
पारदर्शिता और उपभोक्ता परिषद की भूमिका
विद्युत उपभोक्ता परिषद इस पूरी प्रक्रिया पर अपनी पैनी नजर बनाए हुए है ताकि उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा की जा सके। विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश वर्मा ने इस संबंध में कहा कि परिषद एफपीपीसीए की गणना प्रक्रिया की लगातार निगरानी करेगी। उनका कहना है कि बिजली खरीद लागत में होने वाली किसी भी कमी का पूरा और समय पर लाभ उपभोक्ताओं तक पहुंचना चाहिए। परिषद का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी बनी रहे और 3 करोड़ 73 लाख उपभोक्ताओं को उनके हक की पूरी राहत मिले। इस कटौती से न केवल घरेलू उपभोक्ताओं बल्कि व्यावसायिक और औद्योगिक उपभोक्ताओं को भी अपने खर्चों को प्रबंधित करने में मदद मिलेगी।
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