राम मंदिर चंदा चोरी पर संसद में विपक्ष का अनोखा प्रदर्शन: पुजारी बने पप्पू यादव और राहुल गांधी ने दिया दान
संसद में विपक्षी सांसदों ने राम मंदिर चंदा चोरी के खिलाफ अनोखा प्रदर्शन किया। पप्पू यादव पुजारी बने और राहुल गांधी ने दान पात्र में पैसे डाले।
संसद भवन के परिसर में शुक्रवार को विपक्षी दलों द्वारा एक बेहद अनोखा और प्रतीकात्मक प्रदर्शन देखने को मिला और विपक्षी सांसदों ने अयोध्या में राम मंदिर के चंदे में हुई कथित चोरी के मुद्दे को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा। इस प्रदर्शन का मुख्य केंद्र संसद का मकर द्वार रहा, जहां निर्दलीय सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव एक पुजारी का वेश धारण कर बैठ गए। इस प्रदर्शन के माध्यम से विपक्ष ने भारतीय जनता पार्टी और उससे जुड़े संगठनों पर मंदिर के चंदे में हेराफेरी करने का गंभीर आरोप लगाया और इस विषय पर संसद में विस्तृत चर्चा कराने की मांग की।
मकर द्वार पर पुजारी के वेश में पप्पू यादव
बिहार के पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव एक पारंपरिक पुजारी की वेशभूषा पहनकर संसद भवन के मकर द्वार पर पहुंचे। उन्होंने वहां जमीन पर आसन जमाया और एक पुजारी की तरह बैठ गए और उनके पास ही समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव ने एक 'दान पात्र' रखा। यह पूरा दृश्य एक मंदिर के वातावरण को दर्शाने के लिए बनाया गया था। इस प्रदर्शन में विपक्षी एकजुटता दिखाते हुए लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी भी शामिल हुए। राहुल गांधी ने उस दान पात्र में कुछ पैसे डाले, जिसके बाद अन्य विपक्षी सांसदों ने भी सांकेतिक रूप से दान दिया।
चंदा चोरी का प्रतीकात्मक चित्रण
इस प्रदर्शन का सबसे चौंकाने वाला हिस्सा तब आया जब राहुल गांधी और अन्य नेताओं द्वारा दान पात्र में डाले गए पैसों को पप्पू यादव ने उठाकर अपनी जेब में रख लिया। इस क्रिया के माध्यम से विपक्ष यह संदेश देना चाहता था कि जिस तरह पप्पू यादव ने दान के पैसे अपनी जेब में डाले, उसी तरह राम मंदिर के चढ़ावे और चंदे की चोरी की गई है। जैसे ही पप्पू यादव ने पैसे जेब में रखे, वहां मौजूद अन्य विपक्षी सदस्यों ने उन्हें घेर लिया और 'चोर-चोर' तथा 'चढ़ावा चोर' के नारे लगाने शुरू कर दिए। इस पूरी प्रस्तुति का उद्देश्य अयोध्या में हो रही कथित वित्तीय अनियमितताओं को उजागर करना था।
संसद में चर्चा और जवाबदेही की मांग
विपक्षी दल अब पेपर लीक मामले के बाद राम मंदिर चंदा चोरी के मुद्दे को प्रमुखता से उठा रहे हैं। फैजाबाद (अयोध्या) से समाजवादी पार्टी के सांसद अवधेश प्रसाद ने इस मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि यह मामला अब पूरे देश में चर्चा का विषय बन चुका है। उन्होंने कहा कि इस लड़ाई की नींव अखिलेश यादव ने रखी थी और अयोध्या की जनता ने उन्हें जो जिम्मेदारी सौंपी है, उसके तहत वे इस मुद्दे को संसद में पूरी मजबूती से उठाएंगे। अवधेश प्रसाद ने जोर देकर कहा कि अयोध्या भगवान श्रीराम की पावन भूमि है और वहां का अपमान किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
CCTV फुटेज और 2020 के ट्रस्ट पर गंभीर आरोप
समाजवादी पार्टी के सांसद धर्मेंद्र यादव ने इस मामले में कुछ बेहद गंभीर और तकनीकी आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि अयोध्या में चढ़ावा चढ़ाने वाले भक्तों को रसीदें नहीं दी जा रही हैं और पैसा दान पेटी तक पहुंचने से पहले ही गायब किया जा रहा है। धर्मेंद्र यादव ने आरोप लगाया कि जहां पैसों की गिनती होती है, वहां के CCTV कैमरों ने कुछ ही दिनों में गड़बड़ी के 70 वीडियो रिकॉर्ड किए थे, लेकिन बाद में उन सभी पुराने फुटेज को डिलीट कर दिया गया। उन्होंने कहा कि यह लूट तब से जारी है जब 2020 में मंदिर निर्माण के लिए ट्रस्ट का गठन किया गया था। उनके अनुसार, यह सारा पैसा BJP, RSS और विश्व हिंदू परिषद से जुड़े लोगों के खातों और जेबों में जा रहा है।
गृह मंत्री के इस्तीफे की मांग और अन्य मुद्दे
चंदा चोरी के मुद्दे के साथ-साथ विपक्षी सांसदों ने दिल्ली पुलिस द्वारा प्रदर्शनकारी छात्रों पर की गई कार्रवाई का भी विरोध किया। उन्होंने इसे 'बर्बर' कार्रवाई बताते हुए संसद परिसर में नारेबाजी की और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के इस्तीफे की मांग की। विपक्ष का कहना है कि वे लगातार लोकसभा अध्यक्ष से इस मामले पर चर्चा की मांग कर रहे हैं ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके। सांसदों ने स्पष्ट किया कि उनका यह विरोध केवल सांकेतिक नहीं है, बल्कि वे इस मुद्दे को तब तक उठाते रहेंगे जब तक सरकार इस पर जवाबदेही तय नहीं करती और सच्चाई सामने नहीं आती।
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