राम मंदिर चढ़ावा चोरी पर RSS का कड़ा रुख, कहा- राम भक्तों की भावनाओं को पहुंचा आघात
आरएसएस ने राम मंदिर चढ़ावा चोरी को भक्तों की आस्था पर चोट बताया है। एसआईटी अनिल मिश्रा और गोपाल राव से पूछताछ कर रही है, जबकि विनय कटियार ने गबन का आरोप लगाया है।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने अयोध्या के भव्य राम मंदिर में हुए चढ़ावा चोरी विवाद पर अपनी पहली और अत्यंत कड़ी आधिकारिक प्रतिक्रिया जारी की है। संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने इस पूरी घटना को घोर निंदनीय और दुर्भाग्यपूर्ण करार देते हुए स्पष्ट किया है कि इस कृत्य ने दुनिया भर के करोड़ों राम भक्तों की धार्मिक भावनाओं को गहरी ठेस पहुंचाई है और आरएसएस ने इस मामले में किसी भी प्रकार की ढिलाई न बरतने की बात कही है और मांग की है कि राम मंदिर जैसे पवित्र स्थान पर चोरी करने वाले अपराधियों को कानून के तहत सख्त से सख्त सजा मिलनी चाहिए। संघ का यह बयान ऐसे समय में आया है जब मंदिर की सुरक्षा और प्रबंधन को लेकर कई सवाल उठाए जा रहे हैं।
आरएसएस ने जताई गहरी चिंता और आस्था का हवाला दिया
दत्तात्रेय होसबाले ने अपने बयान में इस बात पर जोर दिया कि आरएसएस इस मामले को इतनी गंभीरता से क्यों ले रहा है। उन्होंने कहा कि श्री राम जन्मभूमि पर निर्मित यह भव्य मंदिर केवल पत्थरों की एक संरचना नहीं है, बल्कि यह कई पीढ़ियों के निरंतर संघर्ष और करोड़ों राम भक्तों के अटूट समर्पण, त्याग और बलिदान का एक महान प्रतीक है। यही मुख्य कारण है कि यह मंदिर संपूर्ण हिंदू समाज की अटूट आस्था, गहरी श्रद्धा और निस्वार्थ भक्ति का सबसे प्रमुख केंद्र बना हुआ है। होसबाले ने कहा कि अयोध्या स्थित श्री रामलला मंदिर के दान पात्रों में जमा की गई धनराशि की चोरी होना एक अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण घटना है और इसे हल्के में नहीं लिया जा सकता।
आरएसएस के सरकार्यवाह ने आगे कहा कि इस घटना से पूरे समाज और राम भक्तों की भावनाएं आहत हुई हैं, इसलिए इस पूरे मामले को एक सामान्य या छोटे-मोटे अपराध की तरह नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने इसे करोड़ों लोगों की आस्था से जुड़ा एक अत्यंत गंभीर विषय बताया। संघ ने इस मामले में चल रही विशेष जांच दल (SIT) की जांच का पूर्ण स्वागत किया है। इसके साथ ही, उन्होंने मंदिर प्रबंधन और सरकार से यह पुरजोर मांग की है कि वे वर्तमान व्यवस्था में मौजूद सभी तकनीकी और प्रशासनिक कमियों को तुरंत पहचानें और उन्हें बिना किसी देरी के दूर करें ताकि भविष्य में ऐसी किसी भी अप्रिय घटना की पुनरावृत्ति न हो सके।
एसआईटी की कार्रवाई तेज, करीबियों से पूछताछ जारी
दूसरी ओर, इस मामले की जांच कर रही एसआईटी की टीम इस वक्त पूरी तरह से सक्रिय है और राम मंदिर परिसर में ही मौजूद रहकर अपनी जांच को आगे बढ़ा रही है। जांच टीम का मुख्य ध्यान इस समय ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के करीबियों पर केंद्रित है। आज लगातार दूसरे दिन एसआईटी की टीम अनिल मिश्रा और गोपाल राव से चढ़ावा चोरी के मामले में गहन पूछताछ कर रही है। इससे पहले कल भी इन दोनों व्यक्तियों से करीब 8 घंटे तक लंबी और विस्तृत पूछताछ की गई थी। एसआईटी यह जानने की कोशिश कर रही है कि दान पात्रों के प्रबंधन और चढ़ावे की गिनती की प्रक्रिया में कहां चूक हुई और क्या इसमें कोई आंतरिक मिलीभगत थी।
जांच के घटनाक्रम पर नजर डालें तो पता चलता है कि 30 जून को अयोध्या पुलिस ने इस मामले में चंपत राय से भी करीब 3 घंटे तक पूछताछ की थी और उनका आधिकारिक बयान दर्ज किया था। अब एसआईटी गोपाल राव और अनिल मिश्रा के बयानों को रिकॉर्ड कर रही है ताकि कड़ियों को जोड़ा जा सके। एसआईटी को यह प्रबल संदेह है कि चढ़ावा चोरी के इस बड़े खेल में केवल वे 8 लोग ही शामिल नहीं हैं जो इस वक्त जेल में बंद हैं। जांच टीम का मानना है कि इस बड़ी लूट के पीछे कई और चेहरे भी हो सकते हैं जो पर्दे के पीछे से काम कर रहे थे। इसी व्यापक साजिश का पर्दाफाश करने के लिए एसआईटी अब तक 150 से ज्यादा लोगों से पूछताछ कर चुकी है।
विनय कटियार का बड़ा दावा और गबन के आरोप
इस पूरे विवाद में राम मंदिर आंदोलन के प्रमुख स्तंभ रहे विनय कटियार का एक बेहद चौंकाने वाला बयान सामने आया है जिसने मामले की गंभीरता को और बढ़ा दिया है। विनय कटियार ने सीधे तौर पर कहा है कि राम मंदिर के चढ़ावे में स्पष्ट रूप से गबन हुआ है। उन्होंने अपने बयान में किसी भी तरह की नरमी नहीं दिखाई और दावा किया कि इस मामले की आंच बहुत ऊपर तक जाएगी। कटियार ने यहां तक कह दिया कि जांच के निष्कर्षों के आधार पर चंपत राय भी जेल जा सकते हैं। विनय कटियार जैसे वरिष्ठ नेता के इस बयान ने न केवल मंदिर ट्रस्ट के भीतर हलचल पैदा कर दी है, बल्कि सार्वजनिक रूप से भी इस मामले पर बहस छेड़ दी है।
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