राहुल गांधी रैली से व्यापारियों को 12000 करोड़ का नुकसान, पढ़ें पूरी रिपोर्ट और ताज़ा अपडेट
दिल्ली के रामलीला मैदान में राहुल गांधी की रैली के कारण व्यापारियों को 12000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। CTI के चेयरमैन बृजेश गोयल ने दी जानकारी।
दिल्ली के रामलीला मैदान में कांग्रेस और विपक्षी दलों की महारैली के चलते दिल्ली के व्यापारियों को बहुत भारी नुकसान का सामना करना पड़ा है और इस पूरे मामले को लेकर चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री यानी CTI के चेयरमैन बृजेश गोयल ने बड़ा दावा किया है। उनका कहना है कि फेस्टिव सीजन में दीपावली से ठीक पहले हुई दिल्ली रैली के दौरान दिल्ली के अलग-अलग बाजारों की करीब ढ़ाई लाख दुकानें बंद रहीं और कारोबारियों को 12 हजार करोड़ रुपये का भारी नुकसान उठाना पड़ा है। CTI के साथ ही देश के सबसे पुराने व्यापारी संगठन 'किराना कमिटी दिल्ली' और 'नट्स एंड ड्राई फ्रूट्स काउंसिल' ने भी इस रैली के कारण बहुत भारी नुकसान होने का अनुमान जताया है।
विपक्ष ने रामलीला मैदान में जो विशाल रैली आयोजित की थी और उस रैली से पहले राहुल गांधी ने जो मार्च निकाला था, उसके कारण एक तरफ तो सेंट्रल दिल्ली कई घंटे तक पूरी तरह जाम रही। तो वहीं दूसरी तरफ राहुल गांधी की इस रैली के दौरान सेंट्रल दिल्ली के दो दर्जन से ज्यादा बाजार पूरी तरह से बंद रहे। कारोबारियों ने रैली से पहले जो तमाम आशंकाएं जताई थीं, वे रैली के दिन बिल्कुल सच साबित हुईं। दिल्ली के कारोबारियों ने सीधे तौर पर दावा किया कि कस्टमर यानी ग्राहकों के बाजार में नहीं पहुंच पाने के कारण उन्हें यह भारी नुकसान झेलना पड़ा है। चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री यानी CTI के चेयरमैन बृजेश गोयल ने विस्तार से बताया कि राहुल की रैली के कारण मुख्य सड़कें पूरी तरह जाम रहीं और भारी भीड़ के कारण रामलीला मैदान से सटे 25 बाजारों का व्यापार और कारोबार पूरी तरह से ठप हो गया। इन सभी प्रमुख बाजारों में करीब 80 फीसदी दुकानें बंद रहीं जिससे हालात और ज्यादा खराब हो गए।
राहुल गांधी की रैली से कुल 25 बाजारों में कारोबार पूरी तरह ठप
राहुल गांधी की इस रैली के प्रभाव से जिन इलाकों में व्यापार पर सबसे बुरा असर पड़ा, उनमें कश्मीरी गेट, चांदनी चौक, भागीरथ पैलेस, लाजपत मार्केट, करोलबाग, सदर बाजार, मीनाबाजार, चावड़ी बाजार, पहाड़गंज और कनॉट प्लेस समेत कुल 25 बड़े बाजार पूरी तरह से बंद रहे। CTI का यह पुख्ता दावा है कि राहुल की रैली के कारण दिल्ली के कारोबारियों को 10 से 12 हजार करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। विपक्षी दलों की इस दिल्ली रैली के संपन्न होने के बाद अब देश की राजधानी के व्यापारी कांग्रेस और अन्य विपक्षी पार्टियों के खिलाफ गहरे गुस्से में हैं और वे फेस्टिव सीजन के इस व्यस्त समय के बीच अपने व्यापार को हुए भारी नुकसान की भरपाई करने की पुरजोर मांग कर रहे हैं। व्यापारियों की इस गहरी नाराजगी की सबसे बड़ी और मुख्य वजह यह है कि उन्होंने प्रशासन और नेताओं को एक-दो नहीं बल्कि चार-चार बार पत्र लिखे थे।
व्यापारियों ने चार अलग-अलग पत्र लिखकर राहुल गांधी से इस रैली को या तो पूरी तरह से टालने की या फिर रैली का स्थल बदलने की जोरदार मांग की थी ताकि त्यौहार के समय उनका व्यापार प्रभावित न हो। चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री यानी CTI ने राहुल गांधी को अपनी सबसे पहली चिट्ठी 24 अक्टूबर 2026 को भेजी थी। उस पहली चिट्ठी में त्योहारी सीजन के महत्वपूर्ण समय के दौरान इस रैली को स्थगित करने की साफ तौर पर मांग की गई थी। इसके बाद CTI की तरफ से दूसरी चिट्ठी 27 अक्टूबर को और तीसरी चिट्ठी 28 अक्टूबर को लिखी गई। इन पत्रों के माध्यम से व्यापारियों ने राहुल गांधी से केवल 20 मिनट का समय मांगा था और कहा था कि वे आपस में बैठकर इस बात पर चर्चा करें कि इस बड़ी रैली से उनके व्यापार को भारी नुकसान होगा या कोई फायदा पहुंचेगा।
हालांकि व्यापारियों के इन तमाम पत्रों और अपीलों का कोई भी असर नहीं हुआ और इसके बाद CTI ने अपनी चौथी और अंतिम चिट्ठी राहुल गांधी की रैली के ठीक दिन यानी 1 नवंबर को लिखी। इस चौथी चिट्ठी में रैली के खतरनाक प्रभाव और बाजारों के अनिश्चितकाल तक बंद रहने की गंभीर चिंताओं को लेकर पहले ही पूरी तरह से आगाह कर दिया गया था। बावजूद इसके रैली का आयोजन हुआ और व्यापारियों को वह भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा जिसकी आशंका उन्होंने पहले ही जता दी थी। अब देखना यह होगा कि इस भारी नुकसान के बाद व्यापारी संगठन आगे क्या कदम उठाते हैं और राजनीतिक दल इस पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं।
What's Your Reaction?