रिलायंस ने ईरान से तेल खरीदने की खबरों को नकारा, बताया बेबुनियाद

रिलायंस इंडस्ट्रीज ने ईरान से 50 लाख बैरल कच्चा तेल खरीदने की खबरों को पूरी तरह खारिज किया है। कंपनी ने रॉयटर्स की रिपोर्ट को बेबुनियाद और भ्रामक बताया।

Mar 26, 2026 - 21:35
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रिलायंस ने ईरान से तेल खरीदने की खबरों को नकारा, बताया बेबुनियाद

रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL) ने गुरुवार को उन मीडिया रिपोर्टों को आधिकारिक तौर पर खारिज कर दिया जिनमें दावा किया गया था कि कंपनी ने ईरान से कच्चा तेल खरीदा है। कंपनी ने एक आधिकारिक बयान जारी कर इन खबरों को पूरी तरह से बेबुनियाद और भ्रामक बताया है और यह स्पष्टीकरण रॉयटर्स की उस रिपोर्ट के बाद आया है जिसमें दावा किया गया था कि भारतीय रिफाइनिंग दिग्गज ने अमेरिकी प्रतिबंधों के बीच ईरानी तेल की खरीद की है। रिलायंस ने मीडिया संस्थानों से अपील की है कि वे इस तरह की संवेदनशील जानकारी प्रकाशित करने से पहले तथ्यों की गहनता से जांच करें। कंपनी के अनुसार, इस तरह की गलत खबरें न केवल जनता को गुमराह करती हैं बल्कि अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक संबंधों के संदर्भ में भी भ्रामक स्थिति पैदा करती हैं।

रिलायंस इंडस्ट्रीज का आधिकारिक स्पष्टीकरण

रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड ने अपने बयान में स्पष्ट रूप से कहा है कि हाल ही में आई मीडिया रिपोर्ट्स, जिनमें ईरान से कच्चे तेल की खरीद का दावा किया गया है, पूरी तरह से गलत हैं। कंपनी ने कहा कि वह इन दावों को सख्ती से नकारती है। रिलायंस के प्रवक्ता के अनुसार, कंपनी अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए वैश्विक मानकों और अंतरराष्ट्रीय नियमों का कड़ाई से पालन करती है। कंपनी ने यह भी रेखांकित किया कि मीडिया में प्रसारित हो रही जानकारी में कोई सच्चाई नहीं है और यह पूरी तरह से निराधार है। रिलायंस ने इस बात पर जोर दिया कि वह अपनी आपूर्ति श्रृंखला और कच्चे तेल के स्रोत के बारे में पारदर्शी रहती है और किसी भी अवैध या प्रतिबंधित व्यापारिक गतिविधि में शामिल नहीं है।

रॉयटर्स की रिपोर्ट में किए गए दावे

रॉयटर्स ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया था कि रिलायंस इंडस्ट्रीज ने नेशनल ईरानियन ऑयल कंपनी (NIOC) से लगभग 50 लाख बैरल कच्चा तेल खरीदा है। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया था कि यह सौदा ब्रेंट फ्यूचर्स की तुलना में अधिक कीमत पर किया गया था। रॉयटर्स के अनुसार, यह तेल उन शिपमेंट्स का हिस्सा था जो समुद्र में मौजूद थे और जिन्हें अमेरिकी प्रतिबंधों में मिली एक विशेष छूट के तहत बेचा जा रहा था और रिपोर्ट में दावा किया गया था कि रिलायंस ने इस अवसर का लाभ उठाते हुए ईरानी तेल की खेप प्राप्त की थी। हालांकि, रिलायंस ने इन सभी तकनीकी विवरणों और दावों को सिरे से खारिज करते हुए इन्हें कल्पना मात्र बताया है।

अमेरिकी प्रतिबंधों और छूट का संदर्भ

ईरान पर लगे अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण अधिकांश वैश्विक कंपनियां वहां से तेल खरीदने से बचती हैं। रॉयटर्स की रिपोर्ट में तर्क दिया गया था कि अमेरिका ने कुछ समय के लिए प्रतिबंधों में ढील दी थी, जिससे समुद्र में पहले से लोड किए गए ईरानी तेल की डिलीवरी की अनुमति मिली थी और रिपोर्ट के अनुसार, यह छूट उन शिपमेंट्स पर लागू थी जो 20 मार्च तक लोड किए गए थे और जिन्हें 19 अप्रैल तक डिलीवर किया जाना था। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इस तरह की छूट को अक्सर 'विंडो ऑफ अपॉर्चुनिटी' के रूप में देखा जाता है, लेकिन रिलायंस ने स्पष्ट किया है कि उसने इस अवधि के दौरान या उसके बाद ईरान से किसी भी प्रकार का तेल नहीं खरीदा है। कंपनी ने अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के अनुपालन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है।

वैश्विक तेल बाजार और रिलायंस की स्थिति

रिलायंस इंडस्ट्रीज गुजरात के जामनगर में दुनिया का सबसे बड़ा रिफाइनिंग कॉम्प्लेक्स संचालित करती है। इस रिफाइनरी की क्षमता और जटिलता इसे दुनिया भर के विभिन्न प्रकार के कच्चे तेल को प्रोसेस करने की अनुमति देती है। रिलायंस आमतौर पर मध्य पूर्व, अमेरिका, लैटिन अमेरिका और रूस जैसे विभिन्न क्षेत्रों से कच्चा तेल खरीदती है। वैश्विक तेल बाजार में रिलायंस एक प्रमुख खिलाड़ी है और इसकी खरीद रणनीतियों पर दुनिया भर के विश्लेषकों की नजर रहती है। कंपनी ने हमेशा यह सुनिश्चित किया है कि उसकी खरीद प्रक्रिया अंतरराष्ट्रीय कानूनों और भू-राजनीतिक सीमाओं के भीतर रहे। ईरान से तेल खरीदने की खबरों का खंडन करना कंपनी की इसी छवि को बनाए रखने की दिशा में एक कदम है।

मीडिया रिपोर्टिंग और तथ्यों की पुष्टि

रिलायंस ने अपने बयान में मीडिया की जिम्मेदारी पर भी सवाल उठाए हैं। कंपनी ने कहा कि इस तरह की खबरें प्रकाशित करने से पहले आधिकारिक सूत्रों से पुष्टि करना अनिवार्य है और ऊर्जा क्षेत्र में इस तरह की गलत जानकारी से बाजार में अनावश्यक अटकलें पैदा हो सकती हैं। रिलायंस ने स्पष्ट किया कि वह अपनी व्यावसायिक गतिविधियों के बारे में समय-समय पर आवश्यक जानकारी साझा करती रहती है। कंपनी के अनुसार, रॉयटर्स जैसी प्रतिष्ठित एजेंसी द्वारा बिना ठोस सबूत के इस तरह के दावे करना चिंताजनक है। रिलायंस ने भविष्य में इस तरह की भ्रामक रिपोर्टिंग से बचने और तथ्यों की सत्यता सुनिश्चित करने का आग्रह किया है।

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