रुपये में आई दमदार मजबूती डॉलर के मुकाबले 16 पैसे चढ़कर 94 रुपये 39 पैसे पर पहुंचा
भारतीय रुपया 16 पैसे की मजबूती के साथ 94 रुपये 39 पैसे पर बंद हुआ। कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और डॉलर की कमजोरी से रुपये को मिला समर्थन।
भारतीय रुपये ने गुरुवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले अपनी स्थिति मजबूत करते हुए शानदार प्रदर्शन किया। विदेशी मुद्रा बाजार में घरेलू मुद्रा 16 पैसे की बढ़त के साथ 94 रुपये 39 पैसे प्रति डॉलर के स्तर पर बंद हुई। बाजार विशेषज्ञों का विश्लेषण है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई लगातार गिरावट और अमेरिकी डॉलर की कमजोरी ने रुपये को मजबूती देने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है, ऐसे में तेल की कीमतें कम होने से विदेशी मुद्रा की मांग में कमी आती है, जिसका सीधा फायदा रुपये को मिलता है।
शेयर बाजार की तेजी और रुपये का उतार चढ़ाव
विदेशी मुद्रा बाजार के जानकारों के मुताबिक, घरेलू शेयर बाजारों में बने सकारात्मक माहौल ने भी रुपये की मजबूती को सहारा दिया। गुरुवार को कारोबार के दौरान रुपया 94 रुपये 30 पैसे के स्तर पर खुला था। दिनभर के सत्र में इसमें काफी हलचल देखी गई और यह 94 रुपये 13 पैसे से लेकर 94 रुपये 56 पैसे के दायरे में कारोबार करता रहा। अंत में यह 94 रुपये 39 पैसे प्रति डॉलर पर स्थिर हुआ। इससे पहले बुधवार को भी रुपये में 21 पैसे की मजबूती देखी गई थी और यह 94 रुपये 55 पैसे प्रति डॉलर पर बंद हुआ था। लगातार दूसरे दिन की इस तेजी ने निवेशकों के बीच सकारात्मक संदेश भेजा है।
विदेशी निवेशकों की बिकवाली का दबाव
रुपये में आई इस तेजी के बीच विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी एफआईआई की बिकवाली एक बड़ी चिंता के रूप में उभरी है। शेयर बाजार से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, बुधवार को विदेशी निवेशकों ने 1843 करोड़ 40 लाख रुपये के शेयर बेचे। इसी भारी बिकवाली के कारण रुपये की बढ़त उतनी नहीं हो पाई जितनी उम्मीद की जा रही थी। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि विदेशी निवेशकों द्वारा बाजार से पैसा निकालने का यह सिलसिला जारी रहता है, तो आने वाले समय में रुपये पर फिर से दबाव देखने को मिल सकता है।
वैश्विक संकेत और डॉलर इंडेक्स की स्थिति
दुनिया की छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की मजबूती को दर्शाने वाला डॉलर इंडेक्स 0 पॉइंट 04 प्रतिशत गिरकर 101 पॉइंट 57 के स्तर पर आ गया। वहीं अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमतों में भी 1 पॉइंट 33 प्रतिशत की नरमी देखी गई, जिससे यह 72 डॉलर 76 पैसे प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा था। मिराए एसेट शेयरखान के रिसर्च एनालिस्ट अनुज चौधरी ने बताया कि जिंसों की कीमतों में गिरावट और डॉलर की नरमी रुपये के लिए अच्छे संकेत हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी आगाह किया कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व के सख्त रुख के कारण डॉलर को फिर से समर्थन मिल सकता है, जिससे रुपये की चाल में उतार चढ़ाव बना रहेगा।
बाजार का समापन और भविष्य की राह
घरेलू शेयर बाजारों में भी गुरुवार को बढ़त का रुख रहा। सेंसेक्स 109 अंकों की तेजी के साथ 77100 पॉइंट 47 पर और निफ्टी 34 अंक चढ़कर 24056 के स्तर पर बंद हुआ। आने वाले दिनों में बाजार के निवेशकों की पैनी नजर अमेरिकी फेडरल रिजर्व की आगामी नीतियों, कच्चे तेल की वैश्विक कीमतों और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर टिकी रहेगी। ये सभी कारक भविष्य में रुपये की दिशा और दशा तय करने में निर्णायक भूमिका निभाएंगे।
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