लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव ला सकता है विपक्ष: सूत्र

विपक्षी दल लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की तैयारी कर रहे हैं। बजट सत्र में हंगामे और पक्षपात के आरोपों के बीच यह फैसला लिया गया है।

Feb 9, 2026 - 12:35
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लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव ला सकता है विपक्ष: सूत्र

नई दिल्ली: भारतीय संसद के निचले सदन, लोकसभा में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया है। सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, विपक्षी दलों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की गंभीर तैयारी शुरू कर दी है। यह कदम बजट सत्र के दौरान सदन में लगातार हो रहे हंगामे और विपक्षी सांसदों द्वारा स्पीकर पर लगाए गए पक्षपात के आरोपों के बाद उठाया जा रहा है। राजनीतिक गलियारों में इस संभावित प्रस्ताव को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं, जो आगामी दिनों में संसदीय कार्यवाही को और अधिक प्रभावित कर सकती हैं।

बजट सत्र में बढ़ता गतिरोध और विपक्षी लामबंदी

संसद का वर्तमान बजट सत्र शुरुआत से ही काफी हंगामेदार रहा है और राष्ट्रपति के अभिभाषण के बाद धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान सदन की कार्यवाही में बार-बार व्यवधान उत्पन्न हुआ। सूत्रों के मुताबिक, विपक्षी दलों का मानना है कि सदन के भीतर उनकी आवाज को दबाया जा रहा है। आज सुबह लोकसभा की कार्यवाही शुरू होने से पहले कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे के आवास पर एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में विभिन्न विपक्षी दलों के प्रमुख नेताओं ने हिस्सा लिया और स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की रणनीति पर विस्तार से चर्चा की।

पक्षपात के आरोप और प्रधानमंत्री के भाषण में व्यवधान

विपक्ष का मुख्य आरोप है कि लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला सत्ता पक्ष को बोलने का अधिक अवसर प्रदान करते हैं, जबकि विपक्षी सदस्यों के माइक बंद कर दिए जाते हैं या उन्हें पर्याप्त समय नहीं दिया जाता और इस तकरार का असर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबोधन पर भी पड़ा। राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव का जवाब देते समय प्रधानमंत्री को भारी शोर-शराबे का सामना करना पड़ा। विशेष रूप से कांग्रेस की महिला सांसदों द्वारा प्रधानमंत्री की सीट के समीप विरोध प्रदर्शन किए जाने के कारण स्थिति काफी तनावपूर्ण हो गई थी। विपक्ष के इस कड़े रुख के कारण सदन की कार्यवाही को कई बार स्थगित करना पड़ा।

अविश्वास प्रस्ताव की संवैधानिक प्रक्रिया और नियम

लोकसभा अध्यक्ष को हटाने की प्रक्रिया भारतीय संविधान के अनुच्छेद 94 और 96 के तहत निर्धारित है। नियमों के अनुसार, स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने के लिए कम से कम 14 दिनों का पूर्व नोटिस देना अनिवार्य होता है। इसके अलावा, इस प्रस्ताव को सदन में पेश करने के लिए कम से कम 50 सांसदों का समर्थन आवश्यक है। यदि प्रस्ताव सदन में स्वीकार कर लिया जाता है, तो उस पर चर्चा होती है और फिर मतदान कराया जाता है। सूत्रों का कहना है कि विपक्षी दल जल्द ही लोकसभा महासचिव को इस संबंध में औपचारिक नोटिस सौंपने की तैयारी कर रहे हैं।

विश्लेषकों के अनुसार राजनीतिक प्रभाव

संसदीय विश्लेषकों के अनुसार, स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाना एक दुर्लभ और गंभीर कदम है। हालांकि सत्ता पक्ष के पास सदन में स्पष्ट बहुमत है, लेकिन विपक्ष का यह कदम सरकार पर दबाव बनाने और अपनी एकजुटता प्रदर्शित करने का एक तरीका माना जा रहा है। विश्लेषकों का कहना है कि यदि यह प्रस्ताव लाया जाता है, तो इससे सदन की गरिमा और विधायी कार्यों पर दूरगामी प्रभाव पड़ सकता है। वर्तमान में विपक्षी खेमे में इस बात पर सहमति बनती दिख रही है कि संसदीय लोकतंत्र की रक्षा के लिए यह कदम उठाना आवश्यक हो गया है।

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