सऊदी अरब के यमन में हवाई हमले, महिलाओं और बच्चों सहित कुल 33 लोगों की मौत

यमन की राजधानी सना के पास सऊदी अरब के हवाई हमलों में 33 लोगों की मौत और 39 घायल। मरने वालों में अधिकांश महिलाएं और बच्चे शामिल हैं।

Nov 8, 2026 - 09:35
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सऊदी अरब के यमन में हवाई हमले, महिलाओं और बच्चों सहित कुल 33 लोगों की मौत

यमन की राजधानी सना के पास सऊदी अरब की ओर से किए गए भीषण हवाई हमलों में तैंतीस लोगों की दर्दनाक मौत हो गई है, जबकि उनतालीस लोग गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं। इस भयानक हवाई हमले में जान गंवाने वालों में एक बहुत बड़ा हिस्सा महिलाओं और मासूम बच्चों का है। हूती विद्रोहियों के नियंत्रण वाली प्रमुख समाचार एजेंसी सबा और यमन के स्वास्थ्य मंत्रालय ने आधिकारिक तौर पर इस মর্মান্তिक घटना की पूरी जानकारी दुनिया के सामने रखी है। अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी रॉयटर्स से मिली विस्तृत जानकारी के अनुसार, सऊदी अरब ने सना के ठीक पूर्व दिशा में स्थित बनी हुशैश गांव को अपना मुख्य निशाना बनाते हुए ये क्रूर हवाई हमले किए। यह विशिष्ट इलाका यमन में हूती विद्रोहियों का एक बहुत बड़ा और मजबूत गढ़ माना जाता है, जहां अक्सर सैन्य और रणनीतिक गतिविधियां चलती रहती हैं।

इस सुनियोजित हवाई हमले के दौरान कई रिहायशी घरों को सीधे तौर पर निशाना बनाया गया, जिसके परिणामस्वरूप देखते ही देखते कई मकान जमींदोज हो गए। मकानों के मलबे में तब्दील हो जाने के कारण बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक मलबे के नीचे दब गए और यह क्रूर हमला इसी साल यानी जुलाई महीने में सऊदी अरब और हूती विद्रोहियों के बीच एक बार फिर से लड़ाई शुरू होने के बाद से दर्ज किए गए सबसे घातक और खौफनाक हमलों में से एक है। इस हमले के बाद से पूरे इलाके में अफरा-तफरी का माहौल पैदा हो गया है और स्थानीय स्तर पर बचाव कार्य बेहद कठिन परिस्थितियों में चलाए जा रहे हैं ताकि मलबे में दबे हुए अन्य लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला जा सके।

सना शहर स्थित प्रसिद्ध सेहतुना अस्पताल के सम्मानित निदेशक अब्दुल-अजीज अल-दैलामी ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि मलबे के ढेर के नीचे अभी भी कई लोग फंसे हुए हैं और इन फंसे हुए लोगों में कई बहादुर बचावकर्मी भी शामिल हैं जो अपनी जान जोखिम में डालकर दूसरों की मदद कर रहे थे। उन्होंने बेहद दुख जताते हुए कहा कि जब भी राहत और बचाव दल मलबे में फंसे नागरिकों को बाहर निकालने के लिए मौके पर पहुंचते हैं, तभी एक और नया हवाई हमला कर दिया जाता है और इस तरह के लगातार और सुनियोजित हमलों के कारण कुछ समर्पित मेडिकल कर्मचारियों की भी अपनी ड्यूटी के दौरान मौत हो चुकी है। अस्पताल में इस समय भर्ती कराए गए घायलों की शारीरिक स्थिति बेहद नाजुक और गंभीर बनी हुई है और डॉक्टरों के अनुसार, इन घायलों के सिर, छाती और पैरों में बेहद गंभीर अंदरूनी चोटें आई हैं, और कई दुर्भाग्यपूर्ण लोगों की हड्डियां भी बुरी तरह से टूट चुकी हैं। दूसरी ओर, सऊदी अरब के सेंटर फॉर इंटरनेशनल कम्युनिकेशन की तरफ से जारी आधिकारिक बयान में कहा गया है कि वे इस पूरे मामले की पूरी गंभीरता से जांच कर रहे हैं।

सऊदी अरब और यमन के हूती विद्रोहियों के बीच साल दो हजार बाईस में संयुक्त राष्ट्र की मध्यस्थता से एक महत्वपूर्ण युद्धविराम समझौता हुआ था। इस समझौते के लागू होने के बाद दोनों पक्षों के बीच चल रहे सैन्य हमलों पर काफी हद तक विराम लग गया था और शांति की एक उम्मीद बंधी थी। लेकिन जुलाई दो हजार छब्बीस के आते-आते यह नाज़ुक स्थिति बदल गई और दोनों पक्षों के बीच लड़ाई एक बार फिर से शुरू हो गई। आपको बता दें कि हूती विद्रोही मध्य पूर्व में ईरान के प्रत्यक्ष समर्थन वाले एक शक्तिशाली सशस्त्र संगठन हैं और यमन की राजनीतिक राजधानी सना पर पूरी तरह से उनका कब्जा बना हुआ है। इन विद्रोहियों ने अतीत में सऊदी अरब के कई प्रमुख हवाई अड्डों और महत्वपूर्ण तेल ठिकानों पर अत्याधुनिक मिसाइलों और ड्रोन के जरिए कई बड़े हमले किए हैं। इन तमाम हमलों के कड़े जवाब में ही सऊदी अरब यमन के भीतर अपने सहयोगी संगठनों और आधिकारिक ताकतों की मदद के लिए लगातार हवाई हमले कर रहा है।

यमन देश में पिछले लगभग बारह लंबे वर्षों से लगातार विनाशकारी युद्ध चल रहा है। इस चल रहे संघर्ष का सीधा संबंध वैश्विक स्तर पर अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे बड़े भू-राजनीतिक और सामरिक संघर्ष से भी जुड़ा हुआ है। इस लगातार और अंतहीन युद्ध ने अरब देशों की सूची में शामिल सबसे गरीब देश यमन को एक अत्यंत गंभीर और दयनीय मानवीय संकट के गर्त में धकेल दिया है। अंतरराष्ट्रीय प्रवासन संगठन यानी आईओएम द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के मुताबिक, जुलाई महीने में लड़ाई के दोबारा भड़कने के बाद से अब तक दो लाख से भी ज्यादा आम नागरिक अपने पुश्तैनी घरों को छोड़कर सुरक्षित स्थानों की तलाश में पलायन करने को मजबूर हो चुके हैं। लगातार हो रहे इन घातक हमलों और बमबारी के कारण यमन के आम नागरिकों की परेशानियां दिन-प्रतिदिन बढ़ती ही जा रही हैं और देश का भविष्य अंधकारमय होता जा रहा है।

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