होर्मुज जलडमरूमध्य से टोल वसूलने की तैयारी में ईरान, तेल निर्यात से ज्यादा होगी कमाई
ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य में 1 डॉलर प्रति बैरल टोल लगाने पर विचार कर रहा है, जिससे सालाना 70 से 80 अरब डॉलर की आय हो सकती है, जो उसके तेल निर्यात से अधिक है।
होर्मुज जलडमरूमध्य आज के समय में केवल एक समुद्री मार्ग मात्र नहीं रह गया है बल्कि यह वैश्विक राजनीति और ऊर्जा सुरक्षा का एक प्रमुख केंद्र बन चुका है। ईरान द्वारा इस मार्ग से गुजरने वाले जहाजों पर टोल या सेवा शुल्क लगाने की संभावित योजना उसकी राष्ट्रीय आय को बढ़ाने का एक नया और शक्तिशाली जरिया बन सकती है। हालांकि इस योजना के क्रियान्वयन के मार्ग में अंतरराष्ट्रीय कानून और कूटनीतिक चुनौतियां भी काफी बड़ी हैं जिन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। यह जलडमरूमध्य न केवल एक भौगोलिक संरचना है बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण धमनी की तरह है और इसकी परिचालन स्थिति में कोई भी बदलाव दुनिया भर के देशों के लिए दूरगामी परिणाम लेकर आता है।
शांति की ओर बढ़ते कदम और होर्मुज का महत्व
पिछले 100 दिनों से भी अधिक समय से जारी ईरान और अमेरिका के बीच का संघर्ष अब शांति की दिशा में आगे बढ़ता हुआ दिखाई दे रहा है। ईरान की अर्ध-सरकारी मेहर न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध विराम को लेकर बातचीत लगभग अंतिम चरण में पहुंच गई है। दोनों देशों ने युद्ध को तुरंत और स्थायी रूप से समाप्त करने पर अपनी सहमति व्यक्त की है। इस पूरे घटनाक्रम के बीच होर्मुज स्ट्रेट एक बार फिर से चर्चा के केंद्र में आ गया है। फारस की खाड़ी को खुले समुद्र से जोड़ने वाला यह संकरा समुद्री रास्ता पूरी दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति की रीढ़ की हड्डी माना जाता है। इस क्षेत्र की स्थिरता वैश्विक ऊर्जा कीमतों को स्थिर रखने और आपूर्ति श्रृंखला को निर्बाध बनाए रखने के लिए अत्यंत आवश्यक है।
वैश्विक स्तर पर समुद्र के माध्यम से होने वाले कुल तेल व्यापार का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा इसी मार्ग से होकर गुजरता है। इसके अतिरिक्त बड़ी मात्रा में एलएनजी यानी लिक्विफाइड नेचुरल गैस भी इसी रास्ते से दुनिया के अलग-अलग देशों तक पहुंचाई जाती है। हालिया घटनाक्रमों के बीच ऐसी खबरें सामने आई हैं कि ईरान होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों पर ट्रांजिट शुल्क लगाने की संभावनाओं पर गंभीरता से विचार कर रहा है। यदि यह योजना धरातल पर उतरती है तो यह ईरान के लिए उसके स्वयं के तेल निर्यात से भी बड़ा आय का स्रोत साबित हो सकता है। होर्मुज स्ट्रेट द्वारा प्रदान किया गया रणनीतिक लाभ ईरान को युद्ध के बाद के युग में अपने खजाने को मजबूत करने के लिए ऐसे आर्थिक उपायों पर विचार करने का अवसर देता है।
प्रति बैरल शुल्क और आय का अनुमान
विभिन्न रिपोर्टों के मुताबिक ईरान होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले तेल टैंकरों पर 1 डॉलर प्रति बैरल का शुल्क लगाने की योजना बना रहा है। विशेषज्ञों का यह अनुमान है कि यदि यह व्यवस्था पूरी तरह से लागू कर दी जाती है तो ईरान को हर साल 70 से 80 अरब डॉलर तक की भारी-भरकम आय हो सकती है। यह आंकड़ा इसलिए भी बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि ईरान की तेल निर्यात से होने वाली आय इससे काफी कम रही है। उपलब्ध आंकड़ों को देखें तो ईरान ने साल 2023 में तेल निर्यात के जरिए लगभग 41 अरब और 10 करोड़ डॉलर की कमाई की थी। वहीं साल 2024 में यह आंकड़ा 46 अरब और 70 करोड़ डॉलर रहा था। ऐसे में ट्रांजिट शुल्क से होने वाली संभावित आय तेल निर्यात की कमाई को भी काफी पीछे छोड़ सकती है और राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था को एक बड़ी मजबूती प्रदान कर सकती है।
युद्ध के तनाव के बीच भी बढ़ी तेल से आय
पिछले कुछ वर्षों के दौरान अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों और क्षेत्रीय तनावों का सामना करने के बावजूद ईरान ने अपने तेल निर्यात के स्तर को बनाए रखने में सफलता प्राप्त की है। हालिया रिपोर्टों के अनुसार मार्च 2026 में ईरान की दैनिक तेल आय करीब 139 मिलियन डॉलर तक पहुंच गई जो कि फरवरी के महीने में 115 मिलियन डॉलर दर्ज की गई थी। एक दिलचस्प तथ्य यह भी है कि संघर्ष की स्थिति के बावजूद ईरान का कच्चे तेल का निर्यात लगभग 16 लाख बैरल प्रतिदिन के स्तर पर स्थिर बना हुआ है। इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय बाजार में ईरानी तेल पर दी जाने वाली छूट में भी कमी आई है जिससे ईरान को अब अपने तेल की बेहतर कीमत मिलने लगी है। यह लचीलापन ईरान की उस क्षमता को दर्शाता है जिसके माध्यम से वह आर्थिक दबावों के बीच भी एक प्रमुख ऊर्जा उत्पादक के रूप में अपनी स्थिति बनाए रखने में सक्षम है।
होर्मुज संकट की पृष्ठभूमि
इस क्षेत्र में तनाव की शुरुआत तब हुई जब फरवरी के अंत में अमेरिका और इजराइल द्वारा किए गए सैन्य हमलों के जवाब में ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही को सीमित करने का निर्णय लिया। ईरान का यह कदम वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए एक बहुत बड़ा झटका साबित हुआ क्योंकि दुनिया का लगभग पांचवां हिस्सा तेल और एलएनजी इसी मार्ग से होकर गुजरता है। होर्मुज स्ट्रेट में आवाजाही बाधित होने के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में अचानक तेजी देखी गई और वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता का माहौल बन गया और इस दौरान हजारों जहाज जलडमरूमध्य के दोनों ओर फंस गए थे जिससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार और रसद आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हुई थी। यह घटनाक्रम इस बात को रेखांकित करता है कि वैश्विक ऊर्जा मार्ग क्षेत्रीय भू-राजनीतिक बदलावों के प्रति कितने संवेदनशील हैं।
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