Delhi Election:दिल्ली की कितनी सीटों पर पूर्वांचल फैक्टर? जिसके लिए AAP-BJP होगी आमने-सामने

Delhi Election: दिल्ली में विधानसभा चुनाव को लेकर सियासत गरम हो गई है. जेपी नड्डा के एक बयान को आधार बनाकर सत्ताधारी आम आदमी पार्टी बीजेपी को घेरने में जुटी हुई

Dec 22, 2024 - 09:40
Dec 22, 2024 - 23:07
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Delhi Election:दिल्ली की कितनी सीटों पर पूर्वांचल फैक्टर? जिसके लिए AAP-BJP होगी आमने-सामने

Delhi Election: दिल्ली में जैसे-जैसे सर्दी बढ़ रही है, वैसे-वैसे राजनीति का तापमान भी चढ़ रहा है। खासकर पूर्वांचल के वोटरों को लेकर जो राजनीतिक माहौल बन रहा है, वह दिलचस्प हो चुका है। दिल्ली में पूर्वांचल के लोग एक महत्वपूर्ण वोट बैंक माने जाते हैं, और दिल्ली की 70 विधानसभा सीटों में से लगभग 35 सीटों पर इन वोटरों का सीधा असर है। इन सीटों पर जीत-हार का फैसला पूर्वांचलियों के वोट पर निर्भर करता है। यही कारण है कि दिल्ली में इस बार भाजपा और आम आदमी पार्टी (AAP) दोनों ही पूर्वांचली वोटरों को अपनी ओर खींचने की पूरी कोशिश कर रही हैं।

पूर्वांचलियों की राजनीतिक अहमियत

दिल्ली में कुल 1.5 करोड़ मतदाता हैं, जिनमें से करीब 40-45 लाख वोटर पूर्वांचल से आते हैं। इनमें पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड के लोग शामिल हैं। दिल्ली के विभिन्न इलाकों में इनका अच्छा-खासा प्रभाव है, जैसे विकासपुरी, द्वारका, करावल नगर, मॉडल टाउन, बुराड़ी, उत्तम नगर, पटपड़गंज, लक्ष्मी नगर, बदरपुर, पालम, राजेंद्र नगर और देवली जैसी सीटों पर पूर्वांचली वोटरों की संख्या सबसे अधिक है। इन सीटों पर पूर्वांचली वोटरों की संख्या 40 से 50 प्रतिशत तक हो सकती है, जो चुनाव परिणाम को निर्णायक बना सकती है।

AAP और BJP के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा

आम आदमी पार्टी (AAP) ने 2015 और 2020 के विधानसभा चुनावों में पूर्वांचल के वोटरों से अच्छा समर्थन प्राप्त किया था, जिससे दिल्ली में पार्टी को भारी सफलता मिली थी। लेकिन अब भाजपा, आम आदमी पार्टी के इस प्रभावी वोट बैंक को तोड़ने की योजना बना रही है। भाजपा की कोशिश है कि वह पूर्वांचलियों को अपनी ओर आकर्षित कर, AAP का गणित बिगाड़ सके। इस संबंध में भाजपा के नेताओं ने लगातार बयानबाजी की है, जबकि आम आदमी पार्टी ने इन आरोपों का विरोध किया है और खुद को पूर्वांचलियों का सच्चा हमदर्द बताया है।

बांग्लादेशी घुसपैठ का मुद्दा

हाल ही में दिल्ली नगर निगम (MCD) द्वारा अवैध बांग्लादेशी अप्रवासियों से संबंधित स्कूलों को जारी नोटिस ने इस विवाद को और बढ़ा दिया है। MCD ने स्कूलों को निर्देश दिया कि वे अवैध बांग्लादेशी छात्रों की पहचान करें और स्वास्थ्य विभाग को ऐसे अप्रवासियों के लिए बर्थ सर्टिफिकेट बनाने से मना कर दिया। इसके अलावा, MCD ने कहा कि अगर बांग्लादेशी अप्रवासियों ने अवैध निर्माण किए हैं तो उन्हें गिरा दिया जाए। इस नोटिस के बाद राजनीति में और भी गर्मी बढ़ गई है। आम आदमी पार्टी ने आरोप लगाया कि भाजपा जानबूझकर पूर्वांचलियों को टारगेट कर रही है, जबकि भाजपा का दावा है कि AAP अवैध बांग्लादेशी घुसपैठियों को वोटर लिस्ट में शामिल कर रही है।

AAP और BJP के आरोप-प्रत्यारोप

आम आदमी पार्टी के नेता और राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने भाजपा के खिलाफ तीखा हमला करते हुए कहा कि भाजपा जानबूझकर पूर्वांचलियों को निशाना बना रही है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि भाजपा की मंशा पूर्वांचलियों के मकानों और दुकानों पर बुलडोजर चलाने की है। दूसरी ओर, भाजपा ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि AAP भ्रम फैला रही है। भाजपा के नेता और दिल्ली से सांसद मनोज तिवारी ने कहा कि भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा का जन्म पटना में हुआ है और उनके दिल में पूर्वांचलियों के लिए सम्मान और प्रेम है। उन्होंने यह भी कहा कि आम आदमी पार्टी भाजपा के खिलाफ दुष्प्रचार कर रही है।

क्या है आगे का राजनीतिक परिदृश्य?

दिल्ली की राजनीति में पूर्वांचली वोटरों की भूमिका अहम होने वाली है, और यह देखना होगा कि अगले चुनावों में यह वोट बैंक किसके पक्ष में झुकता है। भाजपा और आम आदमी पार्टी के बीच के आरोप-प्रत्यारोप से यह साफ है कि दोनों ही दल इस महत्वपूर्ण वोट बैंक को हासिल करने के लिए हर संभव कोशिश कर रहे हैं। आगामी चुनावों में यह तय होगा कि पूर्वांचलियों का रुख किस पार्टी की ओर होगा, और किस पार्टी को इसका राजनीतिक लाभ मिलेगा।

इस बार दिल्ली के चुनावी दंगल में सर्दी तो बढ़ ही रही है, लेकिन राजनीति की गर्मी भी अपने चरम पर है।

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