NDLS Stampede:NDLS हादसे पर RPF की रिपोर्ट में खुलासा- प्लेटफॉर्म बदलने से मची भगदड़...
NDLS Stampede: नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर हादसे को लेकर RPF ने एक रिपोर्ट तैयार की है. इस भगदड़ में 30 लोग घायल हुए थे, जिसमें से 20 लोगों की मौत हो गई थी.
NDLS Stampede: 15 फरवरी को नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर हुए दर्दनाक हादसे में 20 लोगों की जान चली गई, जिनमें अधिकांश महिलाएं और बच्चे थे। रेलवे सुरक्षा बल (RPF) ने घटना की जांच कर रिपोर्ट तैयार की है, जिसमें भीड़ प्रबंधन में गंभीर चूकें उजागर हुई हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, शिवगंगा एक्सप्रेस के प्लेटफार्म नंबर 12 से रवाना होने के बाद यात्रियों की अत्यधिक भीड़ जमा हो गई, जिससे प्लेटफार्म नंबर 12, 13, 14, 15 और 16 पर जाने वाले रास्ते पूरी तरह अवरुद्ध हो गए।
गलत अनाउंसमेंट बना भगदड़ का कारण
रिपोर्ट के अनुसार, आरपीएफ इंस्पेक्टर ने स्टेशन डायरेक्टर को भीड़ नियंत्रण के लिए स्पेशल ट्रेन को जल्द चलाने की सलाह दी थी। प्रयागराज के लिए टिकटों की बढ़ती मांग को देखते हुए रेलवे टीम को टिकट बिक्री रोकने के लिए कहा गया। लेकिन स्थिति तब बिगड़ गई जब रात 8:45 पर घोषणा हुई कि प्रयागराज जाने वाली कुंभ स्पेशल ट्रेन प्लेटफार्म नंबर 12 से जाएगी। कुछ ही देर में यह अनाउंसमेंट बदलकर प्लेटफार्म नंबर 16 कर दिया गया, जिससे यात्रियों में हड़कंप मच गया।
अव्यवस्थित भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा चूक
घोषणाओं में भ्रम की स्थिति बनने से प्लेटफार्म 12-13 और 14-15 के यात्री जल्दबाजी में फुट ओवर ब्रिज 2 और 3 पर चढ़ने लगे। इस दौरान अन्य ट्रेनों के यात्री सीढ़ियों से नीचे उतर रहे थे, जिससे अफरातफरी मच गई और भगदड़ हो गई। यह हादसा रात 8:48 पर हुआ।
सीसीटीवी कैमरे थे खराब
सूत्रों के अनुसार, जिस स्थान पर भगदड़ हुई, वहां लगे सीसीटीवी कैमरे खराब थे, जिससे दुर्घटना के स्पष्ट फुटेज उपलब्ध नहीं हो सके। हालांकि, एस्केलेटर के पास लगे कैमरे सही काम कर रहे थे। नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर भीड़ नियंत्रण के लिए आरपीएफ के 270 जवान तैनात हैं, लेकिन उस समय केवल 80 जवान ड्यूटी पर थे, क्योंकि बाकी कर्मियों को प्रयागराज भेजा गया था।
असामान्य रूप से बढ़ी टिकट बुकिंग
नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर आमतौर पर शाम 6 से 8 बजे के बीच 7000 टिकट बुक किए जाते हैं, लेकिन हादसे के दिन यह संख्या बढ़कर 9,600 हो गई। सामान्य दिनों की तुलना में 2600 अधिक टिकट बिकने से अजमेरी गेट साइड प्लेटफॉर्म पर भीड़ नियंत्रण करना मुश्किल हो गया।
रेलवे प्रशासन की बड़ी लापरवाही
विशेषज्ञों का कहना है कि इस हादसे को रोका जा सकता था यदि रेलवे ने यात्री प्रबंधन के लिए उचित योजना बनाई होती। कुंभ मेले के कारण यात्रियों की संख्या बढ़ने की संभावना पहले से थी, लेकिन रेलवे ने इस चुनौती से निपटने के लिए पर्याप्त तैयारियां नहीं कीं।
जरूरत है मजबूत भीड़ नियंत्रण व्यवस्था की
इस हादसे के बाद रेलवे को अपनी भीड़ प्रबंधन रणनीति पर पुनर्विचार करने की आवश्यकता है। महत्वपूर्ण सीसीटीवी कैमरों की नियमित जांच, पर्याप्त सुरक्षा बलों की तैनाती और सटीक घोषणाओं से इस तरह की घटनाओं को रोका जा सकता है।
नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर हुई इस त्रासदी ने रेलवे प्रशासन की नीतियों और प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि इस घटना से सबक लेकर रेलवे अपनी व्यवस्थाओं में सुधार करता है या नहीं।
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