Share Market Crash:शेयर बाजार ने किया कंगाल, निवेशकों के 100 दिन में डूबे 60 लाख करोड़

Share Market Crash: 27 सितंबर 2024 को शेयर बाजार यानी सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ही 52 हफ्तों के हाई पर पहुंच गए थे. तब सेंसेक्स 85,978.25 अंकों के साथ रिकॉर्ड

Jan 14, 2025 - 17:40
Jan 16, 2025 - 10:11
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Share Market Crash:शेयर बाजार ने किया कंगाल, निवेशकों के 100 दिन में डूबे 60 लाख करोड़

Share Market Crash: बीते 100 दिनों में भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट देखने को मिली है। मकर संक्रांति के दिन शेयर बाजार में मामूली तेजी दर्ज की गई, लेकिन कुल मिलाकर सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ही पिछले कुछ महीनों में अपने रिकॉर्ड स्तर से काफी नीचे आ चुके हैं। इस गिरावट का सबसे बड़ा असर निवेशकों पर पड़ा है, जिनका कुल मिलाकर लगभग 60 लाख करोड़ रुपए का नुकसान हो चुका है। आइए विस्तार से जानते हैं कि शेयर बाजार में आई इस गिरावट के क्या कारण हैं और इसका निवेशकों पर क्या प्रभाव पड़ा है।

शेयर बाजार में रिकॉर्ड हाई से गिरावट

27 सितंबर 2024 को शेयर बाजार अपने 52 हफ्तों के उच्चतम स्तर पर था। उस दिन बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) का प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 85,978.25 अंकों पर बंद हुआ था। वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का निफ्टी भी 26,277.35 अंकों पर पहुंच गया था। हालांकि, इसके बाद से बाजार में गिरावट का सिलसिला शुरू हो गया।

  • सेंसेक्स में गिरावट: 27 सितंबर 2024 से अब तक सेंसेक्स में 9,642.5 अंकों की गिरावट हो चुकी है, जो कि लगभग 11.21 फीसदी है।

  • निफ्टी में गिरावट: इसी अवधि में निफ्टी भी 3,143.2 अंक यानी करीब 12 फीसदी नीचे आ चुका है।

निवेशकों को हुआ भारी नुकसान

शेयर बाजार में गिरावट का सीधा असर निवेशकों की संपत्ति पर पड़ा है। 27 सितंबर 2024 को बीएसई का मार्केट कैप 4,77,93,022.68 करोड़ रुपए था। इसके बाद से लगातार गिरावट के चलते 100 दिनों में यह घटकर 4,18,10,903.02 करोड़ रुपए पर आ गया। इसका मतलब है कि निवेशकों को इस अवधि में करीब 59.82 लाख करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है।

एफपीआई की बिकवाली बनी प्रमुख वजह

इस गिरावट का मुख्य कारण विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) की भारी बिकवाली को माना जा रहा है। नेशनल सिक्योरिटीज डिपॉजिटरी लिमिटेड (एनएसडीएल) और बीएसई लिमिटेड के आंकड़ों के मुताबिक, अक्टूबर से 12 जनवरी तक एफपीआई ने भारतीय शेयर बाजार से 1.85 लाख करोड़ रुपए की निकासी की है।

हालांकि, घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) ने इस अवधि में 2.18 लाख करोड़ रुपए का निवेश किया है, लेकिन बाजार में स्थिरता नहीं आ सकी है। डीआईआई कम कीमतों पर खरीदारी कर रहे हैं, जिससे बाजार में सुधार देखने को नहीं मिल रहा है।

रुपया और कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट का असर

शेयर बाजार में गिरावट के पीछे कच्चे तेल की कीमतों और रुपए की कमजोरी को भी अहम वजह माना जा रहा है।

  • कच्चा तेल: 27 सितंबर के बाद से ब्रेंट क्रूड की कीमत में 12 फीसदी का इजाफा हुआ है और यह 80 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच चुका है।

  • रुपया: डॉलर के मुकाबले रुपया भी कमजोर होकर 86.58 प्रति डॉलर के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया है। रुपए की कमजोरी का असर एफपीआई के रिटर्न पर पड़ा है, जिससे वे भारतीय बाजार से पैसा निकाल रहे हैं।

अमेरिका में बॉन्ड यील्ड और फेडरल रिजर्व का प्रभाव

शेयर बाजार में गिरावट के पीछे अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी और फेडरल रिजर्व की नीतियों का भी असर देखने को मिला है।

  • बॉन्ड यील्ड: सितंबर के मध्य में अमेरिकी बॉन्ड यील्ड 3.7 फीसदी थी, जो अब बढ़कर 4.76 फीसदी हो चुकी है।

  • फेडरल रिजर्व: अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने पिछले चार साल में पहली बार ब्याज दरों में कटौती की है। तीन पॉलिसी मीटिंग के दौरान फेड ने कुल 100 बेसिस प्वाइंट की कटौती की है।

मंगलवार को बाजार में मामूली तेजी

हालांकि, 14 जनवरी को शेयर बाजार मामूली तेजी के साथ बंद हुआ। सेंसेक्स 169.62 अंकों की बढ़त के साथ 76,499.63 अंकों पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान यह 76,335.75 अंकों के लोअर लेवल तक भी पहुंचा था। वहीं, निफ्टी 90.10 अंकों की बढ़त के साथ 23,176.05 अंकों पर बंद हुआ।

निवेशकों के लिए क्या है आगे की राह?

विशेषज्ञों का मानना है कि बाजार में अभी और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। एफपीआई की खरीदारी दोबारा शुरू होने की संभावना फिलहाल कम नजर आ रही है। इसके पीछे प्रमुख वजह रुपए में गिरावट और कच्चे तेल की ऊंची कीमतें हैं।

हालांकि, म्यूचुअल फंड और डीआईआई द्वारा की जा रही खरीदारी बाजार में कुछ हद तक स्थिरता ला सकती है। निवेशकों को इस दौरान सतर्कता बरतने की जरूरत है और लंबी अवधि के लिए निवेश करने वालों के लिए यह समय अच्छे शेयरों को सस्ते दामों पर खरीदने का अवसर भी हो सकता है।

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