Sitaram Yechur News: सीताराम येचुरी की तबीयत बिगड़ी, AIIMS के ICU में एडमिट

Sitaram Yechur News: तबीयत बिगड़ने के बाद सीताराम येचुरी को एम्स के इमरजेंसी में लाया गया था, जहां से अब आईसीयू में शिफ्ट कर दिया गया है. फिलहाल उनकी हालत स्थिर है और वो डॉक्टरों की निगरानी में हैं.

Aug 19, 2024 - 23:10
Aug 19, 2024 - 23:11
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Sitaram Yechur News: सीताराम येचुरी की तबीयत बिगड़ी, AIIMS के ICU में एडमिट

Sitaram Yechur News: सीपीएम नेता सीताराम येचुरी की तबीयत अचानक बिगड़ने पर सोमवार को उन्हें दिल्ली के एम्स में भर्ती कराया गया। उन्हें लंग्स इन्फेक्शन की समस्या है, जिसके चलते उन्हें इमरजेंसी से आईसीयू में शिफ्ट किया गया। फिलहाल उनकी हालत स्थिर है और वे डॉक्टरों की निगरानी में हैं।

सीताराम येचुरी भारतीय राजनीति में एक प्रमुख चेहरा हैं, जो भारतीय कम्यूनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के महासचिव के रूप में कार्यरत हैं। 2016 में राज्यसभा सांसद रहते हुए उन्हें सर्वश्रेष्ठ सांसद का पुरस्कार भी मिला था। तमिल ब्राह्मण परिवार से ताल्लुक रखने वाले येचुरी 1974 में स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) में शामिल हुए और एक साल बाद भारतीय कम्यूनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के सदस्य बने।

जेएनयू और वामपंथी राजनीति

सीताराम येचुरी और प्रकाश करात ने मिलकर जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) को वामपंथ का गढ़ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। येचुरी ने जेएनयू से अर्थशास्त्र में मास्टर्स किया और पीएचडी की पढ़ाई के लिए दाखिला लिया था। लेकिन आपातकाल के दौरान गिरफ्तार होने के कारण वे पीएचडी पूरी नहीं कर पाए। येचुरी का जेएनयू से गहरा संबंध रहा है, और उनकी वामपंथी विचारधारा ने विश्वविद्यालय में एक मजबूत आधार तैयार किया।

राजनीतिक और सामाजिक करियर

2005 में सीताराम येचुरी पहली बार पश्चिम बंगाल से राज्यसभा के सदस्य बने। राज्यसभा में रहते हुए उन्होंने जनहित के कई मुद्दे उठाए और संसद में अपनी महत्वपूर्ण उपस्थिति दर्ज की। येचुरी न केवल एक राजनेता हैं, बल्कि वे एक सामाजिक कार्यकर्ता, अर्थशास्त्री, पत्रकार और लेखक भी हैं। उनकी किताबें जैसे ‘यह हिन्दू राष्ट्र क्या है’, ‘घृणा की राजनीति’, और ’21वीं सदी का समाजवाद’ वामपंथी विचारधारा को समझने के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती हैं।

व्यक्तिगत जीवन

कुछ साल पहले कोविड के दौरान येचुरी के बड़े बेटे आशीष का 35 साल की उम्र में निधन हो गया था। आशीष कोरोना वायरस से संक्रमित थे। इस दुखद घटना ने येचुरी के परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया, लेकिन उन्होंने इस विपरीत परिस्थिति में भी अपनी राजनीतिक और सामाजिक जिम्मेदारियों को निभाना जारी रखा।

सीताराम येचुरी का जीवन और करियर भारतीय राजनीति में उनकी गहरी समझ, विचारधारा, और समाज के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। उनके स्वस्थ होने की प्रार्थनाएँ उनके समर्थकों और पार्टी के सदस्यों द्वारा की जा रही हैं।

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