AAP का बड़ा एक्शन: बीजेपी में गए राघव चड्ढा समेत 3 सांसदों की सदस्यता रद्द करने की तैयारी

आम आदमी पार्टी ने बीजेपी में शामिल हुए राघव चड्ढा, संदीप पाठक और अशोक मित्तल को राज्यसभा से अयोग्य घोषित करने के लिए 10वीं अनुसूची के तहत कार्रवाई शुरू की है।

Apr 25, 2026 - 10:35
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AAP का बड़ा एक्शन: बीजेपी में गए राघव चड्ढा समेत 3 सांसदों की सदस्यता रद्द करने की तैयारी

आम आदमी पार्टी (AAP) को एक बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। पार्टी के प्रमुख नेता राघव चड्ढा और दो अन्य सांसदों, संदीप पाठक और अशोक मित्तल के भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) में शामिल होने के बाद राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। इस घटनाक्रम के बाद AAP और बीजेपी के बीच जुबानी जंग छिड़ गई है। नेताओं के पाला बदलने से नाराज आम आदमी पार्टी अब सख्त कार्रवाई के मूड में है। पार्टी के वरिष्ठ नेता संजय सिंह ने औपचारिक रूप से घोषणा की है कि वे इन तीनों सदस्यों को राज्यसभा से अयोग्य घोषित करने की प्रक्रिया शुरू करेंगे।

राज्यसभा अध्यक्ष को पत्र सौंपेंगे संजय सिंह

संजय सिंह का यह बयान राघव चड्ढा, संदीप पाठक और अशोक मित्तल द्वारा अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली पार्टी छोड़ने के फैसले के तुरंत बाद आया है। संजय सिंह ने सोशल मीडिया के माध्यम से जानकारी दी कि पार्टी राज्यसभा के पीठासीन अधिकारी से संपर्क कर संविधान की 10वीं अनुसूची लागू करने की मांग करेगी। उन्होंने कहा, 'मैं माननीय राज्यसभा अध्यक्ष को एक पत्र सौंपूंगा, जिसमें यह मांग की जाएगी कि राघव चड्ढा, अशोक मित्तल और संदीप पाठक को बीजेपी में शामिल होने के कारण राज्यसभा सदस्यता से अयोग्य घोषित किया जाए, क्योंकि यह संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत स्वेच्छा से अपनी मूल पार्टी की सदस्यता छोड़ने के बराबर है'।

क्या है संविधान की 10वीं अनुसूची और अयोग्यता के नियम?

भारतीय संविधान की 10वीं अनुसूची, जिसे 'दल-बदल विरोधी कानून' (Anti-Defection Law) के नाम से जाना जाता है, 1985 में 52वें संशोधन के माध्यम से लागू की गई थी। इसका मुख्य उद्देश्य राजनीतिक स्थिरता सुनिश्चित करना और अनैतिक दल-बदल पर रोक लगाना है।

बीजेपी में शामिल होने पर राघव चड्ढा के आरोप

शुक्रवार को राघव चड्ढा, संदीप पाठक और अशोक मित्तल ने दिल्ली स्थित बीजेपी मुख्यालय में पार्टी अध्यक्ष नितिन नबीन की उपस्थिति में औपचारिक रूप से बीजेपी की सदस्यता ग्रहण की। इस मौके पर राघव चड्ढा ने अपनी पुरानी पार्टी पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि विलय का निर्णय AAP के अपनी मूल विचारधारा से भटकने के कारण लिया गया है। चड्ढा ने कहा, 'जिस आम आदमी पार्टी को मैंने अपने खून-पसीने से सींचा और अपनी जवानी के 15 साल दिए, वह अपने सिद्धांतों और मूल्यों से भटक गई है। अब यह पार्टी राष्ट्रहित में नहीं, बल्कि निजी लाभ के लिए काम करती है। मुझे महसूस हो रहा था कि मैं गलत पार्टी में सही आदमी हूं, इसलिए मैं अलग होकर जनता के करीब आ रहा हूं'।

'पंजाब के गद्दार': संजय सिंह और मनीष सिसोदिया का तीखा हमला

AAP नेतृत्व ने इन सांसदों के कदम को विश्वासघात करार दिया है। संजय सिंह ने इन्हें 'पंजाब का गद्दार' बताते हुए कहा कि बीजेपी, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने पंजाब की भगवंत मान सरकार के कार्यों को रोकने के लिए 'ऑपरेशन लोटस' शुरू किया है। उन्होंने कहा कि पंजाब की जनता इन 7 नामों को याद रखेगी और उन्हें कभी माफ नहीं करेगी। वहीं, मनीष सिसोदिया ने भी तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इन नेताओं ने निजी लाभ के लिए कार्यकर्ताओं के खून-पसीने का सौदा किया है। उन्होंने दावा किया कि जहां कार्यकर्ता बीजेपी की धमकियों का सामना कर रहे थे, वहीं इन सदस्यों ने डर और लालच के कारण समझौता कर लिया।

केजरीवाल की प्रतिक्रिया और चड्ढा का पिछला घटनाक्रम

AAP सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल ने भी इस पर अपनी निराशा व्यक्त की। ' गौरतलब है कि बीजेपी में शामिल होने का यह कदम तब आया है जब कुछ दिन पहले ही AAP ने राघव चड्ढा को राज्यसभा में उपनेता पद से हटा दिया था। उस समय पार्टी के कई नेताओं ने उन पर बीजेपी के प्रति नरम रुख रखने का आरोप लगाया था। हालांकि, चड्ढा ने इन आरोपों को 'सुनियोजित हमला' बताते हुए खारिज किया था और कहा था कि उन्होंने कभी भी मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव पर हस्ताक्षर करने से मना नहीं किया था।

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