Chaitra Navratri 2026 4thDay: आज मां कूष्मांडा की पूजा के समय जरूर पढ़ें ये मंत्र और आरती, मिलेगी माता की कृपा!

चैत्र नवरात्रि 2026 के चौथे दिन मां कूष्मांडा की पूजा की जाती है। जानें पूजा विधि, मंत्र और आरती का महत्व।

Mar 22, 2026 - 10:35
 0  5
Chaitra Navratri 2026 4thDay: आज मां कूष्मांडा की पूजा के समय जरूर पढ़ें ये मंत्र और आरती, मिलेगी माता की कृपा!

चैत्र नवरात्रि 2026 के पावन अवसर पर आज चौथे दिन मां दुर्गा के चतुर्थ स्वरूप, मां कूष्मांडा की आराधना की जा रही है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां कूष्मांडा ने अपनी मंद मुस्कान से ब्रह्मांड की रचना की थी, जिसके कारण उन्हें सृष्टि की आदिस्वरूपा कहा जाता है। देश भर के मंदिरों और घरों में भक्त आज के दिन विधि-विधान से माता का पूजन कर सुख-समृद्धि की कामना कर रहे हैं।

पौराणिक ग्रंथों में मां कूष्मांडा को अष्टभुजी देवी के रूप में वर्णित किया गया है। उनके हाथों में धनुष, बाण, कमल-पुष्प, अमृत कलश, चक्र और गदा सुशोभित हैं। माता का यह स्वरूप ऊर्जा और प्रकाश का प्रतीक माना जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार, चैत्र मास की शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को यह पूजन संपन्न होता है।

मां कूष्मांडा का दिव्य स्वरूप और महत्व

मां कूष्मांडा का निवास सूर्यमंडल के भीतर माना जाता है, जिससे उनकी प्रभा सूर्य के समान दैदीप्यमान है। आठ भुजाएं होने के कारण उन्हें अष्टभुजी भी कहा जाता है। आध्यात्मिक दृष्टि से माता कूष्मांडा अनाहत चक्र को नियंत्रित करती हैं। भक्तों का विश्वास है कि उनकी पूजा से बौद्धिक विकास, यश और रोगों से मुक्ति प्राप्त होती है। उन्हें ब्रह्मांड की ऊर्जा का स्रोत माना गया है।

पूजा विधि और विशेष भोग का विधान

नव नवरात्रि के चौथे दिन ब्रह्म मुहूर्त में स्नान के पश्चात माता का पूजन आरंभ होता है। मां कूष्मांडा को मालपुए का भोग अत्यंत प्रिय है, इसलिए आज के दिन विशेष रूप से मालपुए अर्पित किए जाते हैं। इसके अतिरिक्त, माता को हलवा और दही का भोग भी लगाया जाता है। पूजन में कुमकुम, अक्षत, और लाल पुष्पों का प्रयोग अनिवार्य माना गया है। धूप और दीप जलाकर माता का आह्वान किया जाता है।

मंत्रों का जाप और आध्यात्मिक प्रभाव

पूजा के दौरान मंत्रों का उच्चारण विशेष फलदायी बताया गया है और मूल मंत्र 'ॐ कुष्माण्डायै नम:' का जाप श्रद्धापूर्वक किया जाता है। इसके साथ ही स्तुति मंत्र 'सुरासम्पूर्णकलशं रुधिराप्लुतमेव च। दधाना हस्तपद्माभ्यां कूष्माण्डा शुभदास्तु मे॥' का पाठ किया जाता है और बीज मंत्र 'ॐ ऐं ह्रीं क्लीं कूष्मांडायै नम' के माध्यम से भक्त माता का ध्यान करते हैं। यह मंत्रोच्चार मानसिक शांति और एकाग्रता प्रदान करने वाला माना जाता है।

मां कूष्मांडा की आरती और समापन

पूजन का समापन आरती के साथ होता है। आरती के बोल 'कूष्मांडा जय जग सुखदानी, मुझ पर दया करो महारानी' से वातावरण भक्तिमय हो जाता है। श्रद्धालु माता से अपने कष्टों को दूर करने और जीवन में खुशहाली लाने की प्रार्थना करते हैं। आरती के पश्चात कपूर जलाकर आरती की जाती है और फिर प्रसाद वितरण किया जाता है, जो इस धार्मिक अनुष्ठान का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

What's Your Reaction?

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow