EPFO 3.0 में बड़ा बदलाव: अब विशेष परिस्थितियों में निकाल सकेंगे पूरा पीएफ बैलेंस
EPFO 3.0 के तहत अब 75 प्रतिशत पीएफ तुरंत निकाला जा सकता है। विशेष परिस्थितियों में 100 प्रतिशत निकासी की सुविधा भी जारी है, जिसे अब और आसान बना दिया गया है।
0 के माध्यम से एक नई और सरल व्यवस्था लागू करने जा रहा है। इस नई पहल के तहत सबसे महत्वपूर्ण बदलाव पीएफ निकासी के नियमों में किया गया है। अब ईपीएफ खाताधारक अपने कुल पीएफ बैलेंस का 75 प्रतिशत हिस्सा कभी भी और तुरंत निकाल सकेंगे। इस घोषणा के बाद से ही सदस्यों के बीच इस बात को लेकर चर्चा तेज हो गई थी कि क्या अब 100 प्रतिशत पीएफ निकासी की पुरानी सुविधा को समाप्त कर दिया गया है। हालांकि, ईपीएफओ ने इस पर स्थिति स्पष्ट कर दी है कि पूर्ण निकासी का विकल्प अभी भी मौजूद है और इसे और भी सरल बना दिया गया है।
क्या EPFO 3.0 में 100 प्रतिशत निकासी संभव है?
ईपीएफओ ने 15 अक्टूबर 2025 को जारी किए गए अपने आधिकारिक बयान में यह साफ कर दिया है कि पात्र राशि का 75 प्रतिशत हिस्सा बिना किसी दस्तावेजी औपचारिकता के कभी भी निकाला जा सकता है। इसके साथ ही, संगठन ने यह भी पुष्टि की है कि विशेष परिस्थितियों में पूरी 100 प्रतिशत राशि निकालने की सुविधा पहले की तरह ही जारी रहेगी। वर्तमान नियमों के अनुसार, ईपीएफ सदस्य कुछ खास स्थितियों जैसे प्राकृतिक आपदा, महामारी, कंपनी में तालाबंदी या बेरोजगारी के दौरान अपने खाते की पूरी रकम निकाल सकते हैं। पहले इन निकासी के लिए कड़े दस्तावेजी प्रमाण और ठोस कारणों की आवश्यकता होती थी, जिसके कारण कई बार सदस्यों के दावे खारिज हो जाते थे।
किन परिस्थितियों में निकाल सकते हैं पूरा पैसा?
ईपीएफओ के नियमों के अनुसार, चार ऐसी प्रमुख स्थितियां हैं जिनमें सदस्य अपने पीएफ का 100 प्रतिशत हिस्सा निकाल सकते हैं। पहली स्थिति तब बनती है जब कोई कंपनी 15 दिनों से अधिक समय तक बंद रहती है और कर्मचारी को वेतन नहीं मिल रहा होता है। इसके लिए शर्त यह है कि कर्मचारी बेरोजगार हो और उसे कोई मुआवजा न मिल रहा हो। इस स्थिति में नियोक्ता द्वारा जारी प्रमाण पत्र (फॉर्म A और B) जमा करना अनिवार्य होता है। दूसरी स्थिति नौकरी से निकाले जाने या छंटनी के मामले में कोर्ट में मामला लंबित होने की है। ऐसे में सदस्य को कोर्ट में दायर याचिका की प्रति और अपना प्रमाण पत्र देना होता है।
तीसरी स्थिति तब लागू होती है जब कंपनी 6 महीने से ज्यादा समय से बंद हो और कर्मचारी लगातार बेरोजगार हो। इस मामले में भी नियोक्ता का प्रमाण पत्र (फॉर्म A और B) आवश्यक होता है। चौथी और सबसे महत्वपूर्ण स्थिति स्वयं या परिवार के किसी सदस्य के इलाज के लिए धन की आवश्यकता है और इसके लिए नियोक्ता और डॉक्टर द्वारा हस्ताक्षरित प्रमाण पत्र (सर्टिफिकेट C) की आवश्यकता होती है। ये नियम सुनिश्चित करते हैं कि संकट के समय में कर्मचारी को उसकी जमा पूंजी का पूरा लाभ मिल सके।
EPFO 3.0 के नए नियमों में क्या बदला है?
0 का सबसे बड़ा और क्रांतिकारी बदलाव यह है कि अब विशेष परिस्थितियों में निकासी के लिए सदस्य को कारण बताने की आवश्यकता नहीं होगी। 13 अक्टूबर 2025 की सरकारी अधिसूचना के अनुसार, पहले विशेष परिस्थितियों में आंशिक या पूर्ण निकासी के लिए सदस्य को प्राकृतिक आपदा, बेरोजगारी, महामारी या कंपनी बंद होने जैसी वजहों का स्पष्ट उल्लेख करना पड़ता था। कई बार तकनीकी कारणों से या कारण के स्वीकृत श्रेणी में न आने की वजह से आवेदन खारिज कर दिए जाते थे। अब सदस्य बिना किसी कारण का उल्लेख किए इस श्रेणी में आवेदन कर सकेंगे, जिससे दावों के खारिज होने की संभावना न्यूनतम हो जाएगी।
0 ने 100 प्रतिशत पीएफ निकासी की सुविधा को खत्म नहीं किया है, बल्कि इसकी प्रक्रिया को और अधिक सुगम बनाया है। अब 75 प्रतिशत राशि तुरंत निकालने की सुविधा के साथ-साथ विशेष परिस्थितियों में पूरी रकम निकालने का विकल्प भी पहले की तरह उपलब्ध रहेगा। इस बदलाव का मुख्य उद्देश्य खाताधारकों को उनके अपने पैसे तक आसान पहुंच प्रदान करना और प्रशासनिक बाधाओं को कम करना है।
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