अमेरिका से समझौते पर ईरान में छिड़ा गृहयुद्ध जैसा विवाद, कट्टरपंथियों ने डील को बताया हराम

ईरान और अमेरिका के बीच समझौते पर ईरान में आंतरिक कलह शुरू हो गई है। कट्टरपंथी गुटों और धार्मिक नेताओं ने इस डील का कड़ा विरोध किया है।

Jun 21, 2026 - 17:35
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अमेरिका से समझौते पर ईरान में छिड़ा गृहयुद्ध जैसा विवाद, कट्टरपंथियों ने डील को बताया हराम

ईरान और अमेरिका के बीच हुए हालिया समझौते ने ईरान के भीतर एक बड़े राजनीतिक विवाद को जन्म दे दिया है। इस कूटनीतिक घटनाक्रम ने न केवल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल मचाई है, बल्कि ईरान के राजनीतिक और धार्मिक नेतृत्व के बीच मौजूद गहरे मतभेदों को भी उजागर कर दिया है। जहां राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन और उनके समर्थक इस समझौते को देश की प्रगति के लिए एक आवश्यक कदम मान रहे हैं, वहीं कट्टरपंथी गुटों, धार्मिक नेताओं और सरकारी मीडिया संस्थानों ने इस सौदे के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।

सर्वोच्च नेतृत्व की चेतावनी और समर्थन

ईरान के भीतर बढ़ते इस तनाव के बीच ईरान के सुप्रीम लीडर मुज्तबा खामेनेई के नाम से जारी एक संदेश ने इस बहस को एक नया मोड़ दे दिया है और समझौते पर हस्ताक्षर होने के बाद मुज्तबा खामेनेई ने स्पष्ट रूप से कहा कि ऐसे बयान या कदम, जो जनता के बीच निराशा और अविश्वास पैदा करते हैं, वे वास्तव में दुश्मनों की मदद करने के समान हैं। इस बयान को उन कट्टरपंथी नेताओं और संगठनों के लिए एक सीधी चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है जो लगातार इस समझौते का विरोध कर रहे थे।

इस चेतावनी के तुरंत बाद, राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन और अमेरिका के साथ बातचीत की प्रक्रिया में शामिल प्रमुख नेता मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे देश के सर्वोच्च नेतृत्व द्वारा दिए गए निर्देशों का पूरी तरह से पालन करेंगे और वार्ता की इस प्रक्रिया का समर्थन जारी रखेंगे। गालिबाफ ने यह भी कहा कि जो लोग सर्वोच्च नेतृत्व के निर्देशों का विरोध करेंगे, उन्हें भविष्य में जनता की कड़ी प्रतिक्रिया का सामना करना पड़ सकता है।

कट्टरपंथी गुटों और मीडिया का कड़ा विरोध

पिछले कई हफ्तों से ईरान के कुछ कट्टरपंथी मीडिया संस्थान और राजनीतिक समूह इस समझौते की तीखी आलोचना कर रहे हैं। उनका तर्क है कि अमेरिका के साथ किसी भी प्रकार का समझौता करना ईरान के राष्ट्रीय हितों के खिलाफ है और इससे देश को दीर्घकालिक नुकसान हो सकता है और इस विरोध में ‘कायहान’ अखबार के संपादक हुसैन शरीयत मदारी प्रमुखता से शामिल हैं, जो लंबे समय से अमेरिका के साथ किसी भी बातचीत के कट्टर आलोचक रहे हैं। उनके साथ सांसद इस्माइल कोसारी ने भी इस समझौते पर अपनी गंभीर चिंताएं व्यक्त की हैं।

ईरानी वेबसाइट खबर ऑनलाइन की एक रिपोर्ट के अनुसार, यह विरोध केवल सामान्य आलोचना तक सीमित नहीं है, बल्कि यह बातचीत को विफल करने और देश के भीतर मतभेद बढ़ाने की एक संगठित कोशिश है। रिपोर्ट में सरकारी टीवी चैनल IRIB को इस समझौते का सबसे बड़ा और मुखर विरोधी बताया गया है और iRIB पर प्रसारित होने वाले कार्यक्रमों में लगातार इस डील की खामियों को गिनाया जा रहा है।

धार्मिक नेताओं के कड़े तेवर

इस विवाद में धार्मिक कोण भी जुड़ गया है और रिपोर्टों के अनुसार, कई प्रभावशाली मौलवियों ने अमेरिका के साथ बातचीत को धार्मिक आधार पर गलत ठहराया है। मौलवी गुलामरेज़ा गासेमियन ने अपने बयान में कहा कि अमेरिका से बातचीत करना हराम है। वहीं, एक अन्य धार्मिक नेता शेख इस्माइल रमज़ानी ने कहा कि वॉशिंगटन के साथ अच्छे संबंध बनाना कभी भी संभव नहीं है।

कट्टरपंथी पायदारी पार्टी भी इस समझौते की आलोचना करने में पीछे नहीं है। पार्टी से जुड़े सांसद और मीडिया संस्थान लगातार वार्ता टीम की योग्यता और इरादों पर सवाल उठा रहे हैं। हालांकि सर्वोच्च नेतृत्व के हस्तक्षेप के बाद विरोध की आवाजें कुछ धीमी जरूर पड़ी हैं, लेकिन यह स्पष्ट है कि अमेरिका के साथ संबंधों को सुधारने के मुद्दे पर ईरान के भीतर अभी भी गहरी वैचारिक खाई मौजूद है।

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