UN में भारत का पाकिस्तान को करारा जवाब, ओसामा बिन लादेन का जिक्र कर आतंकवाद पर घेरा

संयुक्त राष्ट्र में भारत की फर्स्ट सेक्रेटरी पेटल गहलोत ने पाकिस्तान को आतंकवाद और ओसामा बिन लादेन के मुद्दे पर घेरा। उन्होंने जम्मू-कश्मीर को भारत का अभिन्न अंग बताया।

Sep 26, 2026 - 08:35
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UN में भारत का पाकिस्तान को करारा जवाब, ओसामा बिन लादेन का जिक्र कर आतंकवाद पर घेरा

संयुक्त राष्ट्र महासभा में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ द्वारा दिए गए भाषण पर भारत ने अत्यंत तीखा और कड़ा पलटवार किया है। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन की फर्स्ट सेक्रेटरी पेटल गहलोत ने राइट टू रिप्लाई के तहत पाकिस्तान को आतंकवाद और उसके दोहरे चरित्र पर जमकर घेरा। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि बार-बार झूठ बोलने से वह सच्चाई में नहीं बदल जाता और भारत की ओर से यह प्रतिक्रिया पाकिस्तान द्वारा अंतरराष्ट्रीय मंच पर फैलाए जा रहे भ्रम को दूर करने के लिए दी गई है।

आतंकवाद और ओसामा बिन लादेन का उल्लेख

अपने संबोधन के दौरान पेटल गहलोत ने पाकिस्तान के आतंकवाद के काले इतिहास का कच्चा चिट्ठा खोल दिया। उन्होंने दुनिया को याद दिलाया कि 9/11 हमलों का मास्टरमाइंड ओसामा बिन लादेन पाकिस्तान के एबटाबाद में पाया गया था। गहलोत ने कहा कि यह घटना न्यूयॉर्क और पूरी दुनिया द्वारा 9/11 के भयानक आतंकवादी हमले की 25वीं बरसी मनाने के ठीक दो हफ्ते बाद हुई है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इस संदर्भ को समझना बहुत जरूरी है क्योंकि लादेन पाकिस्तानी सेना की मुख्य अकादमी के बिल्कुल पास रह रहा था। यह वही संस्था है जिसके प्रति पाकिस्तानी प्रतिनिधि ने आज गहरा सम्मान व्यक्त किया था।

गहलोत ने पाकिस्तान की वर्तमान सरकार पर तंज कसते हुए इसे फॉर्म 47 सरकार करार दिया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के लोग खुद इसे इसी नाम से पुकारते हैं और ऐसी सरकार से इसी तरह के व्यवहार की उम्मीद की जा सकती है और इसके साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि सीमा पार से फैलाए जा रहे आतंकवाद के गंभीर और दूरगामी नतीजे होंगे, जिसे पाकिस्तान को भुगतना पड़ेगा।

पाकिस्तान की आंतरिक राजनीति और सेना का प्रभाव

भारत की फर्स्ट सेक्रेटरी ने पाकिस्तान में लोकतंत्र की स्थिति पर भी कड़ा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि हमने लोकतांत्रिक अधिकारों और मानवीय मूल्यों के बारे में पाखंडपूर्ण बातें उस सरकार से सुनी हैं, जिसकी राजधानी में इस समय अपने ही नागरिकों के खिलाफ सुरक्षा घेरा बनाया जा रहा है। उन्होंने पाकिस्तान की सत्ता संरचना को सेना की, सेना द्वारा और सेना के लिए बनी सरकार बताया और गहलोत ने कहा कि वहां कठपुतली नेता आते-जाते रह सकते हैं, लेकिन असली फैसले कौन लेता है, इस बारे में किसी को कोई भ्रम नहीं होना चाहिए। उन्होंने पाकिस्तान के 27वें संशोधन और वहां के असली शासकों को मिली आजीवन छूट का जिक्र करते हुए पाकिस्तान की कड़वी सच्चाई को उजागर किया।

धार्मिक असहिष्णुता और अल्पसंख्यकों की स्थिति

धार्मिक मुद्दों पर पाकिस्तान के दावों को खारिज करते हुए पेटल गहलोत ने कहा कि कट्टरता और नफरत का पाकिस्तान का लंबा इतिहास रहा है। उन्होंने कहा कि जो लोग दिन में सुरक्षा का दावा करते हैं, वे असल में रात में आतंकवाद फैलाते हैं। गहलोत ने पाकिस्तान के ईशनिंदा कानूनों का जिक्र करते हुए कहा कि जिस सरकार का आधार ही ऐसे कानून हों, वह धार्मिक असहिष्णुता पर बात करने की हकदार नहीं है। उन्होंने कहा कि पूरी दुनिया जानती है कि पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के साथ कैसा व्यवहार किया जाता है और वहां की खोखली बातें अब दुनिया को गुमराह नहीं कर सकतीं।

जम्मू-कश्मीर और पीओके का मुद्दा

जम्मू-कश्मीर के मुद्दे पर भारत ने अपना रुख एक बार फिर साफ कर दिया। पेटल गहलोत ने स्पष्ट किया कि केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है और हमेशा रहेगा। उन्होंने पाकिस्तान को आईना दिखाते हुए कहा कि अगर कश्मीर पर बात करनी ही है, तो पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर पर ध्यान दिया जाना चाहिए। उन्होंने रावलकोट का उदाहरण देते हुए वहां हो रही बेगुनाह लोगों की हत्याओं, क्रूर हिंसा और बुनियादी अधिकारों के हनन का मुद्दा उठाया। गहलोत ने कहा कि वहां के लोग लंबे समय से इन अत्याचारों को झेल रहे हैं, जिस पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान जाना चाहिए।

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