इंडो-पैसिफिक में भारतीय नौसेना का शक्ति प्रदर्शन: समुद्री सुरक्षा के लिए फिलीपींस में एक साथ आए 6 देश
भारतीय नौसेना के आईएनएस सह्याद्रि और आईएनएस कुलिश ने फिलीपींस में 6 देशों के साथ समुद्री सुरक्षा अभ्यास में भाग लेकर क्षेत्रीय सहयोग को मजबूत किया।
भारतीय नौसेना ने इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में अपनी उपस्थिति और क्षमता का प्रदर्शन करते हुए एक महत्वपूर्ण बहुपक्षीय गतिविधि में सक्रिय रूप से भाग लिया है। भारतीय नौसेना के युद्धपोत आईएनएस सह्याद्रि और मिसाइल कार्वेट आईएनएस कुलिश ने फिलीपींस के सुबिक बे में आयोजित एडीएमएम-प्लस एक्सपर्ट्स वर्किंग ग्रुप (EWG) ऑन मैरीटाइम सिक्योरिटी जॉइंट कोऑपरेशन एक्टिविटी में हिस्सा लिया। इस अभ्यास का मुख्य उद्देश्य भारत और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के देशों के बीच समुद्री सुरक्षा सहयोग को और अधिक मजबूत बनाना था। यह महत्वपूर्ण गतिविधि 25 सितंबर को सफलतापूर्वक संपन्न हुई।
संयुक्त सहयोग गतिविधि का विवरण
यह संयुक्त सहयोग गतिविधि 21 सितंबर को शुरू हुई थी। इस पूरे आयोजन की मेजबानी फिलीपीन नौसेना द्वारा की गई थी, जबकि जापान ने इसमें सह-अध्यक्ष के रूप में अपनी भूमिका निभाई। इस मंच ने विभिन्न देशों की नौसेनाओं को एक साथ आने और समुद्री सुरक्षा से जुड़े जटिल मुद्दों पर चर्चा करने का एक उत्कृष्ट अवसर प्रदान किया। भारतीय नौसेना की भागीदारी इस बात का प्रमाण है कि भारत इस क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
हार्बर चरण: तालमेल और नेतृत्व पर चर्चा
अभ्यास के हार्बर चरण के दौरान, विभिन्न देशों के विशेषज्ञों ने समुद्री शांति और सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर गहन विचार-विमर्श किया। इस दौरान नौसेनाओं के बीच बेहतर तालमेल, वरिष्ठ नौसेना नेतृत्व की भूमिका और समुद्री पर्यावरण संरक्षण जैसे मुद्दों पर विशेष ध्यान दिया गया और पेशेवर चर्चाओं के अलावा, इस चरण में खेल प्रतियोगिताएं, अंतर्राष्ट्रीय दिवस का आयोजन और विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए गए। इन गतिविधियों का उद्देश्य भाग लेने वाली नौसेनाओं के कर्मियों के बीच आपसी समझ और भाईचारे को बढ़ावा देना था, जो समुद्र में वास्तविक ऑपरेशनों के दौरान बहुत प्रभावी साबित होता है।
ऑपरेशनल सिंक्रोनाइजेशन और सामुदायिक जुड़ाव
22 सितंबर को भारतीय नौसेना के जवानों ने ऑपरेशनल सिंक्रोनाइजेशन और टेबलटॉप एक्सरसाइज में हिस्सा लिया। ये अभ्यास विभिन्न नौसेनाओं के बीच सामरिक प्रक्रियाओं और संचार प्रोटोकॉल को एक समान बनाने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण थे और इसके बाद, समुद्र में होने वाले चरण यानी सी-फेज के लिए एक प्री-सेल कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई, जिसमें आगामी अभ्यासों की रूपरेखा तैयार की गई। सैन्य अभ्यासों के साथ-साथ, भारतीय नौसेना के कर्मियों ने जाम्बालेस में शेफर्ड्स ऑफ द हिल सेंटर में एक कम्युनिटी एंगेजमेंट प्रोग्राम (सामुदायिक जुड़ाव कार्यक्रम) में भी भाग लिया, जिससे स्थानीय समुदाय के साथ संबंधों को मजबूती मिली।
सी-फेज: समुद्र में साझा ऑपरेशन
अभ्यास का सी-फेज सबसे चुनौतीपूर्ण और महत्वपूर्ण हिस्सा था और इसमें भारत के साथ फिलीपींस, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, जापान और अमेरिका की नौसेनाओं ने हिस्सा लिया। समुद्र में किए गए इन अभ्यासों में सर्च एंड रेस्क्यू (खोज और बचाव), हाइड्रोग्राफिक सर्वे, कैजुअल्टी और मेडिकल इवैक्युएशन (घायलों को चिकित्सा सहायता के लिए निकालना), डेक लैंडिंग क्वालिफिकेशन और फंसे हुए जहाजों की मदद करने जैसे जटिल ऑपरेशन शामिल थे। इन अभ्यासों के माध्यम से अलग-अलग देशों की नौसेनाओं ने किसी भी आपात स्थिति में एक-दूसरे के साथ मिलकर काम करने की अपनी क्षमता का परीक्षण किया।
क्षेत्रीय सुरक्षा सहयोग और रणनीतिक विजन
इन अभ्यासों के जरिए विभिन्न देशों की नौसेनाओं ने समुद्र में किसी भी आपातकालीन स्थिति के दौरान एक-दूसरे के साथ बेहतर तालमेल और समन्वय का अभ्यास किया। इससे ऑपरेशनल कोऑर्डिनेशन और इंटरऑपरेबिलिटी को मजबूत करने में बड़ी मदद मिली। भारतीय नौसेना की यह भागीदारी भारत की एक्ट ईस्ट पॉलिसी और भारत के महासागर (MAHASAGAR - Mutual and Holistic Advancement for Security and Growth Across Regions) के विजन के अनुरूप है। यह क्षेत्रीय समुद्री सुरक्षा सहयोग को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम है, जो पूरे इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की सुरक्षा और विकास के लिए अनिवार्य है।
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