ईरान ने जारी की इजरायली नेताओं की हिटलिस्ट, नेतन्याहू सबसे ऊपर

ईरान ने प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और मोसाद प्रमुख सहित इजरायली नेताओं की हिटलिस्ट जारी की है। जानिए इस तनाव के पीछे के मुख्य कारण।

Feb 13, 2026 - 15:35
 0  2
ईरान ने जारी की इजरायली नेताओं की हिटलिस्ट, नेतन्याहू सबसे ऊपर

ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव के बीच तेहरान ने पहली बार इजरायली नेतृत्व की एक आधिकारिक हिटलिस्ट जारी की है और ईरानी सरकारी मीडिया द्वारा प्रसारित इस सूची में उन व्यक्तियों को लक्षित किया गया है जिन्हें ईरान अपना प्राथमिक लक्ष्य मानता है। ऐतिहासिक रूप से इस तरह की सूचियां इजरायली खुफिया एजेंसी मोसाद द्वारा जारी की जाती रही हैं, लेकिन यह पहली बार है जब ईरान ने सार्वजनिक रूप से इजरायली अधिकारियों के नामों की घोषणा की है। इस सूची में इजरायल के राजनीतिक और सैन्य तंत्र के सबसे प्रभावशाली चेहरे शामिल हैं।

यह घटनाक्रम मध्य पूर्व में जारी अस्थिरता के बीच एक नए कूटनीतिक और सैन्य टकराव का संकेत देता है। ईरानी मीडिया के अनुसार, यह सूची उन कार्रवाइयों के जवाब में तैयार की गई है जिन्हें तेहरान अपनी संप्रभुता और सुरक्षा के लिए खतरा मानता है। अधिकारियों के अनुसार, इस सूची का प्रकाशन इजरायल के रक्षा और खुफिया ढांचे को सीधे चुनौती देने के उद्देश्य से किया गया है।

ईरान की हिटलिस्ट में शामिल प्रमुख इजरायली अधिकारी

ईरानी सरकारी मीडिया द्वारा जारी की गई सूची में इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का नाम सबसे ऊपर रखा गया है और नेतन्याहू के अलावा, इस हिटलिस्ट में इजरायल की खुफिया एजेंसी मोसाद के प्रमुख डेविड बर्निया और वर्तमान रक्षा मंत्री इसराइल काट्ज़ के नाम भी प्रमुखता से शामिल हैं। सैन्य नेतृत्व की बात करें तो आईडीएफ (IDF) प्रमुख इयल ज़मीर और एयरफोर्स चीफ तोमर बार को भी ईरान ने अपने निशाने पर रखा है।

सूची में अन्य महत्वपूर्ण नामों में मिलिट्री इंटेलिजेंस के प्रमुख श्लोमी बाइंडर और ऑपरेशन चीफ इत्ज़ीक़ कोहेन शामिल हैं। ईरानी मीडिया ने इन अधिकारियों की भूमिकाओं को इजरायल की सैन्य रणनीतियों के लिए महत्वपूर्ण बताया है। हालांकि, रिपोर्ट में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि इन लक्ष्यों के विरुद्ध किसी विशिष्ट कार्रवाई की समयसीमा क्या होगी। यह सूची इजरायल के संपूर्ण सुरक्षा और प्रशासनिक ढांचे के शीर्ष स्तर को कवर करती है।

नेतन्याहू की अमेरिकी यात्रा और कूटनीतिक घटनाक्रम

ईरान द्वारा यह हिटलिस्ट इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की संयुक्त राज्य अमेरिका की आधिकारिक यात्रा के तुरंत बाद जारी की गई है और बुधवार 11 फरवरी को नेतन्याहू ने वाशिंगटन का दौरा किया, जहां उन्होंने व्हाइट हाउस में डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात की। इस बैठक को दोनों देशों के बीच रणनीतिक संबंधों को मजबूत करने के प्रयास के रूप में देखा गया। डोनाल्ड ट्रंप ने इस मुलाकात के बाद मीडिया से बात करते हुए कहा कि दोनों नेताओं के बीच सकारात्मक चर्चा हुई है।

अमेरिकी राष्ट्रपति ने संकेत दिया कि अमेरिका वर्तमान में ईरान के साथ किसी संभावित समझौते की संभावनाओं पर विचार करेगा। ट्रंप ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा कि अमेरिका अभी बातचीत की प्रक्रिया को प्राथमिकता देगा और उसके बाद की स्थितियों का आकलन किया जाएगा। नेतन्याहू की इस यात्रा और अमेरिकी नेतृत्व के साथ उनके संवाद को ईरान ने अपनी सुरक्षा चिंताओं के संदर्भ में देखा है, जिसके परिणामस्वरूप यह सूची सार्वजनिक की गई है।

इजरायल का ऑपरेशन 'राइजिंग लॉयन' और उसकी पृष्ठभूमि

ईरान और इजरायल के बीच इस ताजा टकराव की जड़ें जून 2025 में इजरायल द्वारा चलाए गए एक बड़े सैन्य अभियान में छिपी हैं। इजरायल ने 'राइजिंग लॉयन' (Rising Lion) नामक एक ऑपरेशन शुरू किया था, जिसका मुख्य उद्देश्य ईरान के परमाणु ठिकानों को निष्क्रिय करना था। इस अभियान के दौरान इजरायल ने ईरान के भीतर कई रणनीतिक ठिकानों पर हमले किए थे।

इस ऑपरेशन के दौरान इजरायल ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़े लगभग एक दर्जन वैज्ञानिकों की हत्या कर दी थी। इसके साथ ही ईरानी सेना के कई शीर्ष अधिकारियों को भी निशाना बनाया गया था। इजरायल का दावा था कि यह कार्रवाई ईरान को परमाणु हथियार विकसित करने से रोकने के लिए आवश्यक थी। इस अभियान ने दोनों देशों के बीच सीधे सैन्य संघर्ष की स्थिति पैदा कर दी थी, जिसका प्रभाव वर्तमान घटनाक्रमों पर स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है।

ईरानी सैन्य नेतृत्व को पहुंचे नुकसान का विवरण

इजरायल के पिछले अभियानों में ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) को भारी नुकसान उठाना पड़ा था। 'राइजिंग लॉयन' ऑपरेशन के दौरान मारे गए अधिकारियों में IRGC के प्रमुख हुसैन सलामी का नाम सबसे प्रमुख था। सलामी ईरान की सैन्य रणनीति के मुख्य सूत्रधार माने जाते थे। उनके अलावा, ईरान सशस्त्र बलों के चीफ ऑफ स्टाफ मोहम्मद बाघेरी और IRGC एयर फोर्स के प्रमुख अमीर अली हाजीजादेह भी इजरायली हमलों में मारे गए थे।

इन शीर्ष कमांडरों की मृत्यु को ईरान के रक्षा तंत्र के लिए एक बड़ा झटका माना गया था। ईरान ने उस समय इन हत्याओं का बदला लेने की कसम खाई थी। वर्तमान में जारी की गई हिटलिस्ट को उसी प्रतिशोध की कड़ी के रूप में देखा जा रहा है। ईरानी अधिकारियों के अनुसार, इजरायली नेतृत्व को अब उन्हीं परिस्थितियों का सामना करना पड़ेगा जो ईरानी अधिकारियों ने झेली थीं।

क्षेत्रीय सुरक्षा और आधिकारिक मीडिया की रिपोर्ट

ईरानी सरकारी मीडिया ने इस हिटलिस्ट को जारी करते हुए इसे 'न्याय की सूची' करार दिया है। रिपोर्टों के अनुसार, ईरान ने अपने खुफिया तंत्र को इन लक्ष्यों की निगरानी करने के निर्देश दिए हैं। इस घोषणा के बाद क्षेत्रीय सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट पर हैं और इजरायल की ओर से फिलहाल इस सूची पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इजरायली नेताओं की सुरक्षा व्यवस्था को और कड़ा किया जा सकता है।

मध्य पूर्व के अन्य देश भी इस स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। ईरान और इजरायल के बीच यह सीधा टकराव न केवल दोनों देशों के लिए बल्कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए भी चिंता का विषय बना हुआ है। सरकारी बयानों के अनुसार, ईरान अपनी रक्षा क्षमताओं को मजबूत करना जारी रखेगा और किसी भी बाहरी हस्तक्षेप का कड़ा जवाब देगा।

What's Your Reaction?

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow