ईरान ने यूरेनियम भंडार के रास्ते किए बंद: सुरंगें ध्वस्त और बिछाईं बारूदी सुरंगें

ईरान ने यूरेनियम भंडार वाली सुरंगों को ध्वस्त कर वहां बारूदी सुरंगें बिछा दी हैं, जिससे परमाणु सामग्री तक पहुंचना मुश्किल हो गया है।

Jun 13, 2026 - 13:35
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ईरान ने यूरेनियम भंडार के रास्ते किए बंद: सुरंगें ध्वस्त और बिछाईं बारूदी सुरंगें

अमेरिकी खुफिया सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, ईरान ने अपने उच्च संवर्धित यूरेनियम भंडार की सुरक्षा को अभेद्य बनाने के लिए कड़े कदम उठाए हैं। रिपोर्टों में दावा किया गया है कि ईरान ने उन सुरंगों को जानबूझकर ध्वस्त कर दिया है जहां परमाणु सामग्री रखी गई थी, और उनके प्रवेश द्वारों पर लैंड माइंस यानी बारूदी सुरंगें बिछा दी हैं और इस कार्रवाई के बाद अब यूरेनियम तक पहुंचना पहले की तुलना में कहीं ज्यादा मुश्किल, खतरनाक और समय लेने वाला काम हो गया है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच एक महत्वपूर्ण शांति समझौते की दिशा में बातचीत आगे बढ़ रही है।

परमाणु भंडार की सुरक्षा और सैन्य खतरे

ईरान के पास इस समय लगभग आधा टन हाईली एनरिच्ड यानी उच्च संवर्धित यूरेनियम मौजूद है। सीएनएन की एक रिपोर्ट के अनुसार, ईरान का यह कदम डोनाल्ड ट्रंप के उन संकेतों के बाद आया है जिसमें उन्होंने कहा था कि जरूरत पड़ने पर अमेरिका इस परमाणु सामग्री को अपने कब्जे में लेने के लिए सैन्य कार्रवाई कर सकता है। अपनी संपत्ति को सुरक्षित करने और किसी भी बाहरी हस्तक्षेप को रोकने के लिए ईरान ने सुरंगों के ढांचे को ही नष्ट कर दिया है। अब इस भंडार तक पहुंचने के लिए न केवल मलबे को हटाना होगा, बल्कि वहां बिछाई गई बारूद से भी निपटना होगा, जो किसी भी बचाव या जब्ती अभियान को बेहद जोखिम भरा बना देता है।

शांति वार्ता और होर्मुज स्ट्रेट का मुद्दा

वर्तमान में ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध को समाप्त करने और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलने को लेकर गंभीर चर्चा चल रही है। इस बातचीत के एजेंडे में ईरान के संवर्धित यूरेनियम को वहां से हटाने और उसे नष्ट करने का मुद्दा भी प्रमुखता से शामिल है। हालांकि, ईरान की ओर से यह स्पष्ट किया गया है कि परमाणु कार्यक्रम पर विस्तृत बातचीत शांति समझौते पर हस्ताक्षर होने के 60 दिनों के बाद ही शुरू होगी। सुरंगों को बंद करने की इस कार्रवाई को कूटनीतिक हलकों में ईरान की सौदेबाजी की शक्ति बढ़ाने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है, जिससे भविष्य की जांच प्रक्रिया और कठिन हो सकती है।

विशेषज्ञों की चिंता और तकनीकी चुनौतियां

पूर्व अमेरिकी परमाणु विशेषज्ञ स्कॉट रोएकर ने इस स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उनका कहना है कि यदि सुरंगों को ध्वस्त करने और माइंस बिछाने की जानकारी सही है, तो यूरेनियम को सुरक्षित तरीके से बाहर निकालना और उसकी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जांच करना एक बड़ी चुनौती बन जाएगा। रोएकर ने यह आशंका भी जताई है कि भविष्य में ईरान यह तर्क दे सकता है कि कुछ यूरेनियम भंडार तक पहुंचना अब तकनीकी रूप से संभव नहीं है, जिससे उसके कुल परमाणु भंडार की सटीक गणना और निगरानी करना मुश्किल हो जाएगा। इस भंडार को निकालने के लिए अब भारी खुदाई मशीनों, विशेषज्ञ इंजीनियरों और बारूदी सुरंगों को हटाने वाली टीमों की आवश्यकता होगी, जिसमें लंबा समय लग सकता है।

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