ईरान ने यूरोपीय संघ की सेनाओं को 'आतंकी संगठन' घोषित किया

ईरान ने यूरोपीय संघ की नौसेना और वायु सेना को आतंकी संगठन घोषित किया है। यह 2019 में IRGC पर लगे प्रतिबंधों की जवाबी कार्रवाई है।

Feb 22, 2026 - 11:35
 0  4
ईरान ने यूरोपीय संघ की सेनाओं को 'आतंकी संगठन' घोषित किया

ईरान के विदेश मंत्रालय ने एक आधिकारिक बयान जारी करते हुए यूरोपीय संघ (EU) के सदस्य देशों की नौसेना और वायु सेना को 'आतंकी संगठन' की श्रेणी में डाल दिया है। तेहरान की यह कार्रवाई साल 2019 में यूरोपीय संघ द्वारा ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) को आतंकवादी संगठन के रूप में मान्यता देने के जवाब में की गई है। ईरान सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह निर्णय राष्ट्रीय सुरक्षा और संप्रभुता की रक्षा के लिए लिया गया है। इस घोषणा के बाद मध्य पूर्व और यूरोप के बीच कूटनीतिक तनाव और गहराने की आशंका जताई जा रही है।

पारस्परिक कार्रवाई कानून का आधार

ईरानी विदेश मंत्रालय के अनुसार, यह निर्णय 2019 में पारित एक विशेष कानून के तहत लिया गया है। इस कानून का अनुच्छेद 7 ईरान को उन देशों या संगठनों के खिलाफ पारस्परिक कार्रवाई करने का अधिकार देता है जो अमेरिका द्वारा आईआरजीसी को आतंकवादी घोषित करने के निर्णय का समर्थन करते हैं। ईरान ने तर्क दिया है कि यूरोपीय संघ ने अमेरिका के नक्शेकदम पर चलते हुए अंतरराष्ट्रीय नियमों की अनदेखी की है। इस कानून के तहत, अब यूरोपीय संघ की सैन्य इकाइयों को ईरान की सुरक्षा एजेंसियों द्वारा उसी तरह देखा जाएगा जैसे इस्लामिक स्टेट (ISIS) और अल-कायदा जैसे प्रतिबंधित संगठनों को देखा जाता है।

अंतरराष्ट्रीय नियमों के उल्लंघन का आरोप

ईरान ने अपने आधिकारिक बयान में कहा है कि यूरोपीय संघ द्वारा आईआरजीसी के खिलाफ की गई कार्रवाई संयुक्त राष्ट्र चार्टर और अंतरराष्ट्रीय कानून के बुनियादी सिद्धांतों के विपरीत थी। तेहरान का मानना है कि किसी देश की आधिकारिक सेना को आतंकवादी घोषित करना संप्रभुता के सिद्धांत का उल्लंघन है और विदेश मंत्रालय ने जोर देकर कहा कि आईआरजीसी ईरान की एक संवैधानिक सैन्य शक्ति है और इसे निशाना बनाना अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक मर्यादाओं का अपमान है। ईरान ने इस मामले को वैश्विक मंचों पर उठाने की बात भी कही है।

इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स की भूमिका

इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) का गठन 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद ईरान की शिया धार्मिक व्यवस्था की रक्षा के लिए किया गया था। वर्तमान में, यह संगठन ईरान की अर्थव्यवस्था और सशस्त्र बलों में व्यापक प्रभाव रखता है। आईआरजीसी न केवल देश की सीमाओं की रक्षा करता है, बल्कि यह ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम और परमाणु कार्यक्रमों की देखरेख भी करता है और इसके अलावा, ईरान के बुनियादी ढांचे और ऊर्जा क्षेत्र में भी इस संगठन की महत्वपूर्ण व्यावसायिक हिस्सेदारी है। यूरोपीय संघ द्वारा इसे आतंकी संगठन घोषित किए जाने से इसके अंतरराष्ट्रीय वित्तीय लेन-देन पर गहरा असर पड़ा था।

परमाणु कार्यक्रम और वैश्विक दबाव

यह घटनाक्रम ऐसे समय में आया है जब अमेरिका, इजरायल और उनके सहयोगी देश ईरान पर अपने यूरेनियम संवर्धन अभियान को बंद करने के लिए लगातार दबाव बना रहे हैं। पश्चिमी देशों ने ईरान द्वारा परमाणु हथियार विकसित करने के कथित प्रयासों पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) की रिपोर्टों के बीच, ईरान ने हमेशा यह दावा किया है कि उसका परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह से शांतिपूर्ण उद्देश्यों और ऊर्जा उत्पादन के लिए है। हालांकि, हालिया सैन्य घोषणाओं ने इस विवाद में एक नया आयाम जोड़ दिया है।

अमेरिका और इजरायल की चेतावनी

अमेरिकी प्रशासन और इजरायल ने ईरान की इस कार्रवाई पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को चेतावनी दी है कि वह 10 से 15 दिनों के भीतर परमाणु समझौते पर अमेरिका के साथ बातचीत की मेज पर आए। ट्रंप ने स्पष्ट किया है कि यदि ईरान समझौते की शर्तों को मानने में विफल रहता है, तो उसे गंभीर और दुर्भाग्यपूर्ण परिणामों का सामना करना पड़ सकता है। इजरायल ने भी ईरान की सैन्य गतिविधियों को क्षेत्रीय स्थिरता के लिए खतरा बताया है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से ईरान पर और अधिक कड़े प्रतिबंध लगाने की मांग की है।

What's Your Reaction?

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow