ईरान युद्ध में अमेरिका का मिसाइल भंडार खाली: ATACMS और PrSM के इस्तेमाल पर उठे सवाल

ईरान युद्ध में अमेरिका ने अपनी ATACMS और PrSM मिसाइलों का बड़ा हिस्सा खर्च कर दिया है। रॉयटर्स और CSIS की रिपोर्ट ने अमेरिकी हथियारों के भंडार पर सवाल उठाए हैं।

Aug 4, 2026 - 22:35
 0  0
ईरान युद्ध में अमेरिका का मिसाइल भंडार खाली: ATACMS और PrSM के इस्तेमाल पर उठे सवाल

ईरान के साथ पांच महीने तक चले युद्ध ने अमेरिका की सैन्य ताकत की एक नई तस्वीर दुनिया के सामने रख दी है। दुनिया की सबसे बड़ी सैन्य शक्ति माने जाने वाले अमेरिका ने इस संघर्ष में अपनी लंबी दूरी तक सटीक निशाना लगाने वाली मिसाइलों का इतने बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया है कि अब उसके हथियारों के भंडार को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी सेना ने ATACMS और नई पीढ़ी की PrSM जैसी प्रिसिजन स्ट्राइक मिसाइलों का लगभग पूरा स्टॉक इस्तेमाल कर लिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इसका सीधा असर भविष्य में चीन या रूस जैसे बड़े विरोधियों के साथ होने वाले संभावित संघर्ष की तैयारी पर पड़ सकता है।

मिसाइल भंडार पर बढ़ता दबाव

रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका ने युद्ध की शुरुआत में यह अनुमान लगाया था कि यह संघर्ष बहुत जल्दी खत्म हो जाएगा। लेकिन जैसे-जैसे लड़ाई लंबी खिंचती गई, अमेरिकी सेना को लगातार अपने हाई-प्रिसिजन हथियारों का इस्तेमाल करना पड़ा। ATACMS और PrSM ऐसी जमीन से जमीन पर मार करने वाली मिसाइलें हैं, जिनकी मदद से सुरक्षित दूरी से दुश्मन के ठिकानों पर बेहद सटीक हमला किया जाता है। PrSM को ATACMS का एक आधुनिक और अधिक सक्षम विकल्प माना जा रहा है। लंबी लड़ाई के कारण सेंट्रल कमांड के पास मौजूद इन मिसाइलों का स्टॉक खत्म होने की कगार पर पहुंच गया, जिसके बाद अमेरिका को दुनिया के अन्य सैन्य ठिकानों से मिसाइलें मंगानी पड़ीं।

हथियारों की कमी और वैश्विक आपूर्ति

रिपोर्ट में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि अब अमेरिका के पास कुल कितना स्टॉक बचा है, लेकिन यह जरूर बताया गया है कि सेंट्रल कमांड का भंडार लगभग खाली हो चुका है। इन मिसाइलों की लागत बहुत अधिक होती है, जहां हर मिसाइल की कीमत 10 लाख डॉलर से अधिक बताई जाती है। इतनी अधिक कीमत और जटिल तकनीक के कारण इनका उत्पादन भी एक सीमित गति से ही होता है और हालांकि, व्हाइट हाउस ने हथियारों की कमी की इन आशंकाओं को सिरे से खारिज कर दिया है। व्हाइट हाउस का कहना है कि अमेरिका के पास दुनिया के किसी भी अन्य देश की तुलना में अधिक हथियार हैं और उनकी रक्षा कंपनियां अब रिकॉर्ड स्तर पर उत्पादन बढ़ा रही हैं।

पेंटागन और विशेषज्ञों की अलग-अलग राय

पेंटागन ने भी दावा किया है कि अमेरिकी सेना के पास अपने वैश्विक हितों की रक्षा करने के लिए पर्याप्त सैन्य क्षमता और हथियारों का भंडार मौजूद है। इसके विपरीत, रक्षा विशेषज्ञों की चिंता कम नहीं हुई है। CSIS की एक रिपोर्ट के अनुसार, युद्ध के दौरान केवल हमलावर मिसाइलें ही नहीं, बल्कि बड़ी संख्या में पैट्रियट इंटरसेप्टर और THAAD इंटरसेप्टर भी इस्तेमाल किए गए हैं। इससे इन रक्षात्मक प्रणालियों के भंडार में भी उल्लेखनीय कमी आई है और रिपोर्ट में यह भी जोड़ा गया है कि अमेरिकी नौसेना अपनी टॉमहॉक क्रूज मिसाइलों के एक बड़े हिस्से का उपयोग कर चुकी है।

भविष्य की चुनौतियां और रणनीतिक तैयारी

विशेषज्ञों का तर्क है कि किसी भी लंबी अवधि के युद्ध में केवल शुरुआती सैन्य ताकत ही काफी नहीं होती, बल्कि हथियारों की निरंतर आपूर्ति श्रृंखला भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है। अमेरिका के लिए चिंता का विषय यह है कि क्या मिसाइलों की यह कमी चीन या रूस के साथ भविष्य में होने वाले किसी बड़े संघर्ष में उसके लिए चुनौती बन सकती है। इसी को ध्यान में रखते हुए, अमेरिका अब अपने मिसाइल उत्पादन को और अधिक तेज करने पर जोर दे रहा है और सरकार का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि भविष्य में किसी भी बड़े सैन्य मोर्चे पर अमेरिका की युद्धक तैयारी कमजोर न पड़े और उसके पास पर्याप्त मात्रा में सटीक मार करने वाले हथियारों का भंडार हमेशा उपलब्ध रहे।

What's Your Reaction?

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow