एस जयशंकर: विदेश मंत्री का 6 देशों का दौरा शुरू कतर से अमेरिका और बेल्जियम तक कूटनीतिक मिशन
विदेश मंत्री एस जयशंकर कतर, बहरीन, कुवैत, ओमान, अमेरिका और बेल्जियम के 6 देशों के दौरे पर हैं। वे ऊर्जा सुरक्षा और यूएनएससी सदस्यता पर चर्चा करेंगे।
विदेश मंत्री एस जयशंकर आज से एक महत्वपूर्ण बहु-देशीय दौरे की शुरुआत कर रहे हैं, जिसमें पश्चिम एशिया, अमेरिका और बेल्जियम के छह देश शामिल हैं और इस कूटनीतिक यात्रा का उद्देश्य पश्चिम एशिया में भारत के ऊर्जा हितों और वहां रहने वाले भारतीय समुदाय की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। इसके साथ ही, इस दौरे के दौरान संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की अस्थायी सदस्यता के लिए भारत के अभियान का आगाज किया जाएगा और भारत-यूरोपीय संघ व्यापार एवं प्रौद्योगिकी परिषद की महत्वपूर्ण बैठक में हिस्सा लिया जाएगा।
पश्चिम एशिया के चार देशों की यात्रा
विदेश मंत्री एस जयशंकर अपने इस दौरे के पहले चरण में चार प्रमुख पश्चिम एशियाई देशों कतर, बहरीन, कुवैत और ओमान की यात्रा करेंगे। इन देशों में वे वहां के विदेश मंत्रियों और शीर्ष नेतृत्व के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। इस दौरे को नई दिल्ली द्वारा पश्चिम एशिया में अपने महत्वपूर्ण साझेदारों के साथ निरंतर संपर्क बनाए रखने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। ये देश भारत के लिए ऊर्जा के प्रमुख स्रोत हैं और यहां बड़ी संख्या में भारतीय प्रवासी निवास करते हैं, जिनकी भलाई भारत सरकार की प्राथमिकता है।
ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के कारण उत्पन्न होने वाली संभावित बाधाओं को देखते हुए, भारत पश्चिम एशिया से तेल और गैस की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए सक्रिय कदम उठा रहा है। विदेश मंत्री की इन मुलाकातों में ऊर्जा सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इन चार देशों के साथ जुड़ाव भारत के रणनीतिक और आर्थिक ढांचे में खाड़ी क्षेत्र के महत्व को रेखांकित करता है।
न्यूयॉर्क में यूएनएससी अभियान की शुरुआत
पश्चिम एशिया की यात्रा के बाद, डॉ और जयशंकर न्यूयॉर्क, अमेरिका के लिए रवाना होंगे। वहां 13 जुलाई को वे वर्ष 2028-29 के कार्यकाल के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की अस्थायी सदस्यता हेतु भारत के आधिकारिक अभियान की शुरुआत करेंगे। यह कदम वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती भूमिका और अंतरराष्ट्रीय शासन प्रणाली में सुधार की उसकी आकांक्षा को दर्शाता है। यह अभियान लॉन्च संयुक्त राष्ट्र में भारत की दीर्घकालिक कूटनीतिक रणनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
बेल्जियम में भारत-यूरोपीय संघ टीटीसी बैठक
दौरे के अंतिम चरण में, विदेश मंत्री 14-15 जुलाई को ब्रुसेल्स, बेल्जियम का दौरा करेंगे। वहां वे भारत-यूरोपीय संघ व्यापार और प्रौद्योगिकी परिषद (TTC) की तीसरी मंत्री-स्तरीय बैठक में भाग लेंगे। इस बैठक का उद्देश्य व्यापार, नई तकनीकों और डिजिटल सहयोग के क्षेत्रों में भारत और यूरोपीय संघ के बीच संबंधों को और मजबूत करना है। ब्रुसेल्स में वे बेल्जियम और यूरोपीय संघ के अपने समकक्षों के साथ भी विस्तृत चर्चा करेंगे ताकि रणनीतिक साझेदारी को और गहरा किया जा सके।
कैरिबियाई देशों की यात्रा का विवरण
इस छह देशों के दौरे से ठीक पहले विदेश मंत्री एस जयशंकर ने दो कैरिबियाई देशों की यात्रा पूरी की है। त्रिनिदाद और टोबैगो की अपनी दो दिवसीय यात्रा के दौरान, भारत और त्रिनिदाद और टोबैगो के बीच पर्यटन, स्वास्थ्य सेवा, बुनियादी ढांचे और आयुर्वेद जैसे क्षेत्रों में 8 समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए। विदेश मंत्रालय के अनुसार, इन समझौतों में त्रिनिदाद और टोबैगो के विदेश और कैरिकॉम मामलों के मंत्रालय की इमारत को सौर ऊर्जा से संचालित करने, वेक्टर कंट्रोल और नेल्सन द्वीप के बुनियादी ढांचे को अपग्रेड करने जैसे महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट शामिल हैं। नेल्सन द्वीप वह स्थान है जहां शुरुआती भारतीय प्रवासी रुके थे।
इसके अतिरिक्त, यूनिवर्सिटी ऑफ वेस्ट इंडीज में आयुर्वेद पर एक इंडियन चेयर स्थापित करने के लिए भी समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए गए। डॉ. जयशंकर ने वहां की प्रधानमंत्री कमला प्रसाद-बिसेसर और अन्य वरिष्ठ नेताओं के साथ द्विपक्षीय सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की। इस दौरान पिछले साल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की त्रिनिदाद और टोबैगो यात्रा के दौरान की गई घोषणाओं की प्रगति की समीक्षा भी की गई, जिसमें बुनियादी ढांचे, सुरक्षा, फोरेंसिक, स्वास्थ्य सेवा और क्षमता निर्माण जैसे विषय शामिल थे और कैरिबियाई देशों की इस यात्रा ने वर्तमान बहु-देशीय कूटनीतिक मिशन के लिए एक सकारात्मक आधार तैयार किया है।
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