बलरामपुर में 27 नेपालियों पर मुकदमा: भारतीय आधार और वोटर कार्ड से ले रहे थे सरकारी लाभ
बलरामपुर पुलिस ने 27 नेपालियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है जो भारत और नेपाल की दोहरी नागरिकता का उपयोग कर रहे थे और भारतीय दस्तावेजों से सरकारी योजनाओं का लाभ ले रहे थे।
उत्तर प्रदेश के बलरामपुर जिले में सुरक्षा और सरकारी तंत्र की शुचिता से जुड़ा एक बड़ा मामला सामने आया है। भारत-नेपाल सीमा पर स्थित जरवा कोतवाली क्षेत्र में पुलिस ने 27 लोगों के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है। इन लोगों पर आरोप है कि वे भारत और नेपाल दोनों देशों की नागरिकता और पहचान से संबंधित दस्तावेज रखते थे। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, इन लोगों ने न केवल फर्जी तरीके से भारतीय पहचान पत्र बनवाए, बल्कि इनका उपयोग करके भारतीय नागरिकों के लिए चलाई जा रही विभिन्न सरकारी योजनाओं का अनुचित लाभ भी उठाया।
जिलाधिकारी के आदेश पर हुई बड़ी कार्रवाई
यह पूरी कार्रवाई बलरामपुर के जिलाधिकारी द्वारा दी गई शिकायत और उनके निर्देशों के बाद शुरू हुई है। पुलिस अधीक्षक (एसपी) विकास कुमार ने जानकारी दी कि जिलाधिकारी के कार्यालय से प्राप्त पत्र के आधार पर इस पूरे मामले की गहन पड़ताल कराई गई थी। जांच रिपोर्ट में आरोपों की पुष्टि होने के बाद ही पुलिस ने एक्शन लिया है। जिलाधिकारी की जांच रिपोर्ट में यह स्पष्ट हुआ था कि सीमावर्ती इलाकों में पहचान छिपाकर और गलत जानकारी देकर भारतीय दस्तावेज तैयार किए गए हैं, जो कानून का सीधा उल्लंघन है।
नेपाल के निवासियों ने बलरामपुर में उठाया योजनाओं का लाभ
जांच के दौरान यह तथ्य प्रकाश में आया कि नेपाल के डांग जिले के कोईलाबास इलाके के रहने वाले कुछ लोगों ने खुद को भारतीय नागरिक के रूप में पेश किया। इन लोगों ने बलरामपुर के बालापुर, तुलसीपुर क्षेत्र और शीतलापुर रिजवान गली का निवासी बताकर अपने आधार कार्ड और मतदाता पहचान पत्र जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेज तैयार करवा लिए। इन दस्तावेजों के आधार पर उन्होंने उन सरकारी स्कीमों का फायदा लिया जो केवल पात्र भारतीय नागरिकों के लिए होती हैं। यह मामला अंतरराष्ट्रीय सीमा पर पहचान के दस्तावेजों के दुरुपयोग की एक गंभीर तस्वीर पेश करता है।
दोनों देशों की मतदाता सूची में मिले नाम
एसपी विकास कुमार ने बताया कि जिन 27 लोगों के विरुद्ध केस दर्ज किया गया है, उनके नाम भारत की वोटर लिस्ट के साथ-साथ नेपाल की वोटर लिस्ट में भी दर्ज पाए गए हैं। जांच के दौरान कुछ बेहद चौंकाने वाले मामले भी सामने आए हैं। उदाहरण के तौर पर, लिस्ट में शामिल अब्दुल रहमान पुत्र कल्लू का नाम अनवरडीह के गांव बालापुर में दर्ज है, लेकिन वह वहां रहता ही नहीं है। इसी तरह, अब्दुल अजीज सिद्दीकी नाम के व्यक्ति की कुछ महीने पहले ही मृत्यु हो चुकी है, लेकिन इसके बावजूद उसका नाम कई सरकारी अभिलेखों में सक्रिय रूप से दर्ज पाया गया। इन विसंगतियों ने मामले को और अधिक गंभीर बना दिया है।
भारतीय दस्तावेजों का दुरुपयोग और कानूनी प्रक्रिया
पुलिस के अनुसार, शुरुआती जांच में यह पूरी तरह साफ हो गया है कि संबंधित व्यक्तियों ने अपनी पहचान छिपाई और भारतीय दस्तावेजों का गलत इस्तेमाल किया। सरकारी अभिलेखों में गलत जानकारी दर्ज कराना और दोहरी नागरिकता के लाभ लेना एक दंडनीय अपराध है। जरवा थाने की पुलिस ने संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है और अब विस्तृत जांच की जा रही है। एसपी ने बताया कि वर्तमान में सभी संदिग्ध दस्तावेजों का सत्यापन किया जा रहा है और विभिन्न सरकारी विभागों के रिकॉर्ड से उनका मिलान किया जा रहा है और इस जांच में जो भी नए तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे की कड़ी विधिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
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