कुख्यात डकैत जगन गुर्जर की अजमेर जेल में हत्या, 100 से ज्यादा मामले थे दर्ज
कुख्यात डकैत जगन गुर्जर की अजमेर हाई सिक्योरिटी जेल में हत्या की खबर से हड़कंप। 100 से ज्यादा मामलों के आरोपी की संदिग्ध मौत की जांच में जुटी एफएसएल टीम।
अजमेर की हाई सिक्योरिटी जेल से एक बड़ी खबर सामने आ रही है जहां कुख्यात डकैत जगन गुर्जर की हत्या की सूचना मिली है। इस घटना के बाद जेल प्रशासन और पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है। जगन गुर्जर एक ऐसा नाम था जिसका राजस्थान, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के डांग और चंबल क्षेत्रों में दशकों तक खौफ रहा था। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, जेल परिसर के भीतर ही उसका शव मिला है, जिससे जेल की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई शुरू कर दी है।
एसपी ने की पुष्टि और एफएसएल टीम की जांच
अजमेर के एसपी हर्षवर्धन अग्रवाल ने इस घटना की आधिकारिक पुष्टि की है और मामले की गंभीरता और जगन गुर्जर के आपराधिक इतिहास को देखते हुए एफएसएल (विधि विज्ञान प्रयोगशाला) की टीम को तुरंत मौके पर बुलाया गया। एफएसएल टीम घटनास्थल से साक्ष्य जुटाने में लगी है ताकि मौत के सही कारणों और परिस्थितियों का पता लगाया जा सके और पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि यह किसी आपसी रंजिश का परिणाम है या सुरक्षा में कोई बड़ी चूक हुई है। मौके पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया है और जेल के भीतर की गतिविधियों की गहनता से जांच की जा रही है।
अपराध की दुनिया का बड़ा नाम: 100 से ज्यादा मामले
जगन गुर्जर का आपराधिक रिकॉर्ड बेहद लंबा और डरावना रहा है और उस पर हत्या के प्रयास, लूट, फिरौती के लिए अपहरण, नकबजनी और डकैती जैसे संगीन अपराधों के 100 से ज्यादा मामले दर्ज बताए जाते हैं। चंबल के बीहड़ों से लेकर शहरों तक उसके नाम की दहशत थी। राजस्थान के साथ-साथ पड़ोसी राज्यों की पुलिस के लिए भी वह लंबे समय तक सिरदर्द बना रहा था। इतने बड़े अपराधी की हाई सिक्योरिटी जेल के भीतर संदिग्ध मौत होना प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है।
टोंक जेल के वायरल वीडियो ने पहले ही उठाए थे सवाल
जेलों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठना कोई नई बात नहीं है। इससे पहले सितंबर 2025 में टोंक जिले की जेल से एक वीडियो वायरल हुआ था जिसने पूरे सिस्टम को हिलाकर रख दिया था। उस वीडियो में हत्या और पुलिस पर फायरिंग करने वाले 2 कैदी खुलेआम हथियार लहराते नजर आए थे। इतना ही नहीं, वे जेल के अंदर मोबाइल फोन पर बात कर रहे थे और सिगरेट व गुटखा का सेवन कर रहे थे। " उस घटना के बाद भी जांच के आदेश दिए गए थे, लेकिन जेलों के भीतर कैदियों को मिलने वाली अवैध सुविधाओं पर पूरी तरह लगाम नहीं लग पाई है।
जेल प्रशासन और सुरक्षा पर उठते सवाल
देशभर की जेलों से अक्सर ऐसी तस्वीरें और वीडियो सामने आते रहते हैं जो यह दर्शाते हैं कि रसूखदार कैदी जेल के भीतर भी उन सुख-सुविधाओं का आनंद लेते हैं जो आम लोग अपने घरों में लेते हैं। जेलों के अंदर होने वाली हिंसा और हत्याएं इसी लचर व्यवस्था का परिणाम मानी जाती हैं। जगन गुर्जर की मौत के मामले में भी अब जांच के बाद ही स्थिति पूरी तरह साफ हो पाएगी। पुलिस और प्रशासन के लिए अब यह साबित करना जरूरी हो गया है कि जेलों के भीतर कानून का राज है। फिलहाल एफएसएल की रिपोर्ट और पुलिसिया तफ्तीश पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं।
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