जयशंकर का यूरोप को करारा जवाब: आप हमारे दुश्मनों को हथियार बेचते हैं और तेल पर सवाल उठाते हैं

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने रूस से तेल खरीदने पर यूरोप की आलोचना का कड़ा जवाब देते हुए हथियारों की सप्लाई पर सवाल उठाए हैं।

Jun 12, 2026 - 12:35
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जयशंकर का यूरोप को करारा जवाब: आप हमारे दुश्मनों को हथियार बेचते हैं और तेल पर सवाल उठाते हैं

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने रूस से तेल खरीदने के मामले में भारत की आलोचना करने वाले यूरोपीय देशों को कड़ा और स्पष्ट जवाब दिया है। यूरोप की अपनी यात्रा के दौरान फिनलैंड में एक कार्यक्रम में बोलते हुए विदेश मंत्री ने पश्चिमी देशों के रुख में मौजूद नैतिक और ऐतिहासिक विरोधाभासों को उजागर किया। उन्होंने सीधे तौर पर कहा कि यूरोप उन देशों को हथियार बेचता है जिनका इस्तेमाल भारत पर हमलों के लिए किया जाता है और जयशंकर का यह बयान भारत के राष्ट्रीय हितों और ऊर्जा सुरक्षा को लेकर देश के अडिग रुख को दर्शाता है।

कुलतारंता टॉक्स में तीखी चर्चा

विदेश मंत्री जयशंकर ने फिनलैंड की विदेश मंत्री एलिना वाल्टोनन और यूएई की सहायक विदेश मंत्री लाना नुसेबेह के साथ कुलतारंता टॉक्स (Kultaranta Talks) में हिस्सा लिया। इस कार्यक्रम में इमर्जिंग पावर्स एंड द न्यू जियोपॉलिटिकल कॉम्पिटिशन विषय पर पैनल चर्चा आयोजित की गई थी। समाचार एजेंसी एएनआई की रिपोर्ट के अनुसार, चर्चा के दौरान जब एक पत्रकार ने भारत के रूस के प्रति सहानुभूति रखने और वहां से तेल खरीदने की उत्सुकता पर सवाल उठाया, तो जयशंकर ने 2 अहम बातों का जिक्र करते हुए सख्ती से जवाब दिया। उन्होंने भारत के व्यावहारिक नजरिए और राष्ट्रीय हितों की रक्षा पर जोर दिया।

हथियारों की सप्लाई और सुरक्षा पर प्रहार

जयशंकर ने अपने जवाब में यूरोप की ऐतिहासिक और नैतिक विसंगतियों की ओर इशारा किया। उन्होंने कहा कि यूरोप हथियार बेचता है, जिनका इस्तेमाल भारत पर हमले के लिए भी किया जाता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह स्थिति केवल आज की नहीं है, बल्कि यह कई सालों से होता आ रहा है। विदेश मंत्री ने एक महत्वपूर्ण तुलना करते हुए कहा कि किसी भी यूरोपीय देश पर भारतीय हथियारों से हमला नहीं हुआ है, और उन्होंने इच्छा जताई कि काश यही बात वह यूरोप के हथियारों के मामले में भी भारत के लिए कह पाते। उन्होंने जोर देकर कहा कि हम भारतीयों ने कभी भी यूरोप को खतरे में डालने वाला कोई काम नहीं किया है, इसलिए उनका यह तर्क पूरी तरह से वाजिब है।

तेल खरीद का तर्क और बाजार की स्थिति

रूस से तेल खरीदने के फैसले पर सफाई देते हुए विदेश मंत्री ने कहा कि वह कीमत और उपलब्धता के आधार पर तेल खरीदते हैं। उन्होंने समझाया कि उस समय बाजार में ज्यादातर तेल रूस का ही उपलब्ध था क्योंकि यूरोपीय देश मुख्य रूप से मध्य पूर्व से तेल खरीद रहे थे। मध्य पूर्व भारत का पारंपरिक सप्लायर रहा है, लेकिन यूरोपीय देशों की मांग बढ़ने के कारण भारत को अपनी ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक खास दिशा में आगे बढ़ने के लिए मजबूर होना पड़ा। उन्होंने इसे एक व्यावहारिक निर्णय बताया जो देश की जरूरतों को पूरा करने के लिए लिया गया था।

अमेरिका का रुख और वैश्विक स्थिरता

साल 2022 की घटनाओं का जिक्र करते हुए जयशंकर ने कहा कि मॉस्को पर पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों के बाद वैश्विक ऊर्जा बाजार में स्थिरता लाने में भारत की भूमिका को अमेरिका ने भी स्वीकार किया था। विदेश मंत्री के अनुसार, वैश्विक स्तर पर महंगाई को काबू में रखने और तेल की सप्लाई में बड़ी रुकावट को रोकने के लिए वॉशिंगटन ने नई दिल्ली को रूसी कच्चा तेल खरीदना जारी रखने के लिए प्रोत्साहित किया था। उन्होंने अमेरिका के बदलते रुख पर तंज कसते हुए कहा कि पिछले साल रूसी तेल खरीदने के लिए भारत पर भारी टैरिफ लगाने के बाद, अमेरिका ने खुद रूसी तेल पर अपने प्रतिबंध हटा लिए थे।

सिद्धांतों के दिखावे पर तंज

अपने संबोधन के अंत में जयशंकर ने पश्चिमी देशों की नीतियों को एक खेल करार दिया। उन्होंने कहा कि पॉलिसी एक दिन लागू होती है और अगले दिन खत्म हो जाती है, यानी जब उनके लिए सही हो तो करो और जब न हो तो मत करो। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि हम सब समझदार लोग हैं और जानते हैं कि यह खेल कैसे खेला जाता है। जयशंकर ने कहा कि यह असल में सिद्धांतों या नैतिक दिखावे के बारे में नहीं है, बल्कि यह हितों की राजनीति है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत अपने हितों को सर्वोपरि रखते हुए अपने फैसले लेना जारी रखेगा।

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