जयशंकर की चीन को दो टूक सीमा पर शांति के बिना रिश्ते सामान्य होना मुश्किल

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने स्पष्ट किया है कि चीन के साथ संबंधों को सामान्य बनाने के लिए सीमा पर शांति अनिवार्य है। उन्होंने व्यापार असंतुलन और 2020 के तनाव पर भी चर्चा की।

Oct 14, 2026 - 12:35
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जयशंकर की चीन को दो टूक सीमा पर शांति के बिना रिश्ते सामान्य होना मुश्किल

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भारत और चीन के बीच द्विपक्षीय संबंधों को लेकर एक कड़ा और स्पष्ट संदेश दिया है। उन्होंने कहा है कि दोनों देशों के रिश्तों में सीमा के हालात अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। एक महत्वपूर्ण चर्चा के दौरान, मंत्री ने यह साफ कर दिया कि सीमा पर शांति स्थापित किए बिना संबंधों को सामान्य कर पाना बेहद मुश्किल है और उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि सीमावर्ती इलाकों में शांति और सुकून का होना अनिवार्य है। जयशंकर ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि यदि सीमा पर किसी भी प्रकार की गड़बड़ी या अशांति होती है, तो इसका सीधा असर दोनों देशों के आपसी संबंधों पर पड़ेगा। दिल्ली में ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम के एडिटर-इन-चीफ जॉन मिकलेथवेट के साथ बातचीत करते हुए उन्होंने चीन के संदर्भ में ये बातें कहीं।

सीमा विवाद का ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य

भारत और चीन के बीच की सीमा स्थिति पर चर्चा करते हुए एस जयशंकर ने कहा कि दोनों देशों के बीच कोई तय सीमा नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह कोई नई समस्या नहीं है, बल्कि यह मुद्दा पिछले कई दशकों से चला आ रहा है। ऐतिहासिक आंकड़ों का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि वर्ष 1975 से लेकर वर्ष 2020 तक, यानी पूरे 45 साल के लंबे समय तक, उस सीमा पर कोई खून-खराबा नहीं हुआ था। उन्होंने याद दिलाया कि 2020 से पहले आखिरी बार सीमा पर मौतें वर्ष 1975 में हुई थीं। इस 45 साल की लंबी अवधि के दौरान भारत और चीन के बीच रिश्तों में विस्तार हुआ और वे आगे बढ़े। हालांकि, विदेश मंत्री ने कहा कि वर्ष 2020 में स्थितियां पूरी तरह बदल गईं, जब सीमा पर तनाव बढ़ा और हिंसक झड़प हुई। इस झड़प में दोनों पक्षों के सैनिकों को अपनी जान गंवानी पड़ी थी।

2020 की झड़प और उसके परिणाम

जयशंकर ने 2020 की घटनाओं का विस्तार से वर्णन करते हुए कहा कि जब भारत कोविड लॉकडाउन के दौर से गुजर रहा था, तब सीमा पर कई गंभीर मसले सामने आए। इसका परिणाम एक ऐसी झड़प के रूप में निकला जिसमें दोनों तरफ के कई सैनिक मारे गए। उन्होंने कहा कि हमारे लिए यह स्थिति 1975 से चली आ रही शांतिपूर्ण स्थिति से बिल्कुल अलग और विचलित करने वाली थी। विदेश मंत्री ने स्पष्ट किया कि यदि सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति भंग होती है, तो इसके परिणाम रिश्तों पर निश्चित रूप से दिखाई देंगे। उन्होंने बताया कि ये परिणाम अगले पांच सालों तक स्पष्ट रूप से देखे गए, जब तक कि शांति बहाल करने के प्रयास सफल नहीं हुए और इस शांति बहाली की प्रक्रिया में दोनों पक्षों के बीच लगभग चार साल तक गहन बातचीत और विचार-विमर्श का दौर चला।

चीन के साथ व्यापार असंतुलन की समस्या

विदेश मंत्री जयशंकर ने इस बात पर भी जोर दिया कि भारत और चीन के बीच मतभेद केवल सीमा विवाद तक ही सीमित नहीं हैं। उन्होंने दोनों देशों के आर्थिक संबंधों में मौजूद गंभीर समस्याओं की ओर भी इशारा किया। उन्होंने भारत और चीन के बीच के व्यापार संतुलन को पूरी तरह से एकतरफा करार दिया। जयशंकर ने कहा कि कई ऐसे क्षेत्र और सेक्टर हैं जिनमें भारतीय कंपनियों ने दुनिया के अन्य अंतरराष्ट्रीय बाजारों में बहुत अच्छा प्रदर्शन किया है, लेकिन उन्हें चीन के बाजार में पर्याप्त पहुंच और अवसर नहीं मिल पाए हैं और उन्होंने तर्क दिया कि भारत को चीन में उस तरह के समान अवसर नहीं मिल रहे हैं, जिस तरह से भारत ने चीनी कंपनियों को अपने घरेलू बाजार में अवसर और सुविधाएं प्रदान की हैं।

निवेश नीति और सीमा समाधान पर रुख

जब उनसे यह सवाल पूछा गया कि क्या अर्ली हार्वेस्ट एग्रीमेंट होने की स्थिति में भारत अधिक चीनी निवेश की अनुमति देने पर विचार करेगा, तो विदेश मंत्री ने कहा कि विभिन्न संभावनाओं पर बातचीत चल रही है। हालांकि, उन्होंने यह भी साफ किया कि निवेश और बाजार पहुंच से जुड़ी नीतियों को सीमा विवाद के मुद्दे से अलग तरीके से हल किया जाएगा और जयशंकर ने इसे एक सक्रिय बातचीत बताते हुए कहा कि हम अब उन संभावनाओं को देख रहे हैं और हमें यह देखना है कि हम किस दिशा में आगे बढ़ते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत इस बात पर जोर नहीं दे रहा है कि व्यापार करने के लिए सीमा विवाद का पूर्ण समाधान होना ही चाहिए, बल्कि भारत का मुख्य आग्रह यह है कि सीमा पर शांति और अमन बनाए रखा जाए और उन्होंने कहा कि वह अर्ली हार्वेस्ट को सीमा प्रश्न के समाधान के अलावा किसी और चीज से नहीं जोड़ेंगे और निवेश व व्यापारिक नीतियों पर अलग से निर्णय लिया जाएगा।

द्विपक्षीय संबंधों में सुधार के संकेत

उल्लेखनीय है कि सितंबर की शुरुआत में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने न्यूयॉर्क में एशिया सोसाइटी द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान कहा था कि भारत और चीन के बीच द्विपक्षीय संबंध आज पिछले कुछ वर्षों की तुलना में बेहतर स्थिति में हैं। उन्होंने उम्मीद जताई थी कि जैसे-जैसे सीमा के बाकी बचे हुए मुद्दे धीरे-धीरे सुलझ रहे हैं, वैसे-वैसे दोनों देशों के बीच रिश्ते सामान्य होने की दिशा में बढ़ रहे हैं। जयशंकर का यह बयान भारत-चीन संबंधों के भविष्य को लेकर एक संतुलित दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है, जिसमें सीमा पर शांति को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है।

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