जियो आईपीओ अलॉटमेंट नहीं मिलने पर क्या करें निवेशक, जानें पूरी रिपोर्ट और मुख्य बातें
जिओ प्लेटफॉर्म्स के 30,188 करोड़ रुपये के आईपीओ में अलॉटमेंट न मिलने पर निवेशक क्या करें। जानिए बाजार एक्सपर्ट्स की सलाह।
जिओ प्लेटफॉर्म्स लिमिटेड का मेगा इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग यानी आईपीओ निवेशकों के बीच इन दिनों सबसे बड़ा चर्चा का विषय बना हुआ है और इस बहुप्रतीक्षित इश्यू के तहत शेयरों का अलॉटमेंट पूरा हो चुका है और अब जिन निवेशकों को शेयर नहीं मिले, वे इसके स्टॉक एक्सचेंज डेब्यू पर बेहद बारीकी से नजर बनाए हुए हैं। कंपनी आगामी 28 अक्टूबर को देश के प्रमुख स्टॉक एक्सचेंजों यानी एनएसई और बीएसई पर लिस्ट होने जा रही है। ऐसे में बाजार में यह सबसे बड़ा सवाल बन गया है कि क्या निवेशकों को लिस्टिंग के दिन ही शेयर खरीद लेने चाहिए या फिर किसी बड़ी गिरावट का इंतजार करना चाहिए। यह पूरा मामला शेयर बाजार के निवेशकों के लिए काफी अहम हो गया है और हर कोई अपनी अगली रणनीति को लेकर मंथन कर रहा है।
शानदार सब्सक्रिप्शन आंकड़े और भारी मांग
19 गुना सब्सक्राइब हुआ था। इस जबरदस्त आंकड़े से यह साफ पता चलता है कि देश और दुनिया के हर वर्ग के निवेशकों के बीच इस इश्यू को लेकर कितनी भारी डिमांड और उत्साह था। कंपनी ने इसके लिए फाइनल इश्यू प्राइस 1,119 रुपये प्रति शेयर तय किया है। इस मेगा आईपीओ में कुल 27 करोड़ शेयरों का फ्रेश इश्यू शामिल रहा था, जिससे कंपनी ने बाजार से बड़ी पूंजी जुटाई है। जिन लोगों को इस प्रक्रिया में अलॉटमेंट नहीं मिल पाया या जो लोग किसी वजह से आवेदन नहीं कर पाए थे, उनके पास अब सेकेंडरी मार्केट यानी खुले बाजार के जरिए इस दिग्गज कंपनी में अपनी हिस्सेदारी खरीदने का सुनहरा मौका मिलेगा। हालांकि बाजार के दिग्गज जानकारों का यह स्पष्ट मानना है कि निवेशकों को बाजार में अपनी नई एंट्री करने से पहले स्टॉक की रोजाना की चाल और तकनीकी पहलुओं पर बेहद करीबी नजर रखनी चाहिए ताकि किसी भी नुकसान से बचा जा सके।
विशेषज्ञों द्वारा संभावित लिस्टिंग प्रीमियम का अनुमान
प्रख्यात फंडामेंटल एनालिस्ट अंबरीश बलीगा का कहना है कि जिओ आईपीओ में संस्थागत यानी इंस्टीट्यूशनल निवेशकों की डिमांड उम्मीद से कहीं ज्यादा दर्ज की गई थी। अब बाजार में सबसे देखने वाली बात यह होगी कि क्या लिस्टिंग के बाद भी सेकंडरी मार्केट में यह मांग इसी तरह बरकरार रहती है या फिर इसमें कोई सुस्ती आती है। अगर यह मांग ऐसे ही बनी रहती है, तो यह स्टॉक और भी ऊपर की छलांग लगा सकता है। हालांकि ग्रे मार्केट में भले ही प्रीमियम 20 से 22 प्रतिशत के आसपास के संकेत दे रहा हो, लेकिन इस इश्यू के बहुत बड़े आकार को ध्यान में रखते हुए अंबरीश बलीगा को 8 से 10 प्रतिशत के मामूली लिस्टिंग प्रीमियम की ही उम्मीद है। उन्होंने सभी निवेशकों को यह बेहद अहम सलाह दी है कि अगर स्टॉक अपनी लिस्टिंग पर बहुत ज्यादा ऊपर खुलता है, तो उसे अंधाधुंध तरीके से खरीदने की गलती से बचना चाहिए। जिन निवेशकों को अलॉटमेंट नहीं मिला है, वे यदि स्टॉक में शुरुआती उछाल के बाद किसी प्रकार का करेक्शन या गिरावट देखते हैं, तो आईपीओ प्राइस यानी 1,119 रुपये के आस-पास खरीदारी करने पर गंभीरता से विचार कर सकते हैं। अंबरीश बलीगा का यह भी साफ कहना है कि चूंकि इस आईपीओ का आकार काफी बड़ा है, इसलिए लिस्टिंग के तुरंत बाद मुनाफावसूली यानी प्रॉफिट बुकिंग के चलते बिकवाली का भारी दबाव देखने को मिल सकता है।
अविनाश मेंटर रिसर्च सर्विसेज के फाउंडर और जाने-माने विशेषज्ञ अविनाश गोरक्षकर ने भी कुछ इसी तरह की संतुलित और पेशेवर राय दी है। उनका कहना है कि जिन निवेशकों को अलॉटमेंट नहीं मिला, उन्हें शुरुआती ट्रेडिंग सत्रों में तुरंत बाजार में कूदने के बजाय स्टॉक के पूरी तरह स्थिर होने का इंतजार करना चाहिए। उनके मुताबिक लिस्टिंग के तुरंत बाद स्टॉक तेजी से ऊपर की तरफ भाग सकता है, लेकिन उसके तुरंत बाद इसमें जबरदस्त प्रॉफिट बुकिंग यानी मुनाफावसूली देखने को मिल सकती है, जिससे कीमतें नीचे आ सकती हैं। अविनाश गोरक्षकर की स्पष्ट सलाह के अनुसार जिन निवेशकों को आईपीओ में एक भी शेयर नहीं मिला, उन्हें शुरुआती सत्रों में स्टॉक के सभी उतार-चढ़ाव को बहुत सावधानी से ट्रैक करना चाहिए और उसके बाद ही कोई ठोस और पक्का वित्तीय फैसला लेना चाहिए। इस तरह की सोची-समझी रणनीति अपनाने से निवेशकों को किसी भी प्रकार के अनावश्यक जोखिम से बचने में मदद मिलेगी और वे सही समय पर सही दाम पर जिओ के शेयरों में अपनी मजबूत स्थिति बना सकेंगे।
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