ट्रंप को चाहिए भारत जैसा SIR, अमेरिकी चुनाव प्रणाली में बड़े बदलाव की मांग

डोनाल्ड ट्रंप ने भारतीय SIR प्रणाली की तारीफ करते हुए अमेरिका में इसे लागू करने की मांग की है ताकि 24000 गैर-नागरिक मतदाताओं को हटाया जा सके।

Aug 20, 2026 - 08:35
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ट्रंप को चाहिए भारत जैसा SIR, अमेरिकी चुनाव प्रणाली में बड़े बदलाव की मांग

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इन दिनों भारतीय चुनाव प्रणाली के मुरीद नजर आ रहे हैं। ट्रंप ने भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था, विशेषकर चुनाव प्रक्रिया की शुचिता बनाए रखने के लिए इस्तेमाल होने वाली तकनीकों की जमकर तारीफ की है। ट्रंप का मानना है कि अमेरिका को भी भारत की तरह SIR यानी सिस्टमैटिक आइडेंटिफिकेशन एंड रजिस्ट्रेशन जैसी प्रक्रिया अपनानी चाहिए ताकि वोटर लिस्ट का शुद्धीकरण किया जा सके। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर एक विस्तृत पोस्ट के जरिए अपनी बात रखी है, जिसमें उन्होंने अमेरिकी वोटर लिस्ट में मौजूद खामियों और गैर-नागरिक मतदाताओं की मौजूदगी पर गहरी चिंता व्यक्त की है और इससे पहले भी ट्रंप भारत के फोटो पहचान पत्र वाली व्यवस्था की सराहना कर चुके हैं और अब वह पूरी चुनावी प्रक्रिया को भारतीय तर्ज पर ढालने की वकालत कर रहे हैं।

वोटर लिस्ट के शुद्धीकरण की मांग

ट्रंप के इस दांव के पीछे सबसे बड़ी वजह वोटर लिस्ट का शुद्धीकरण है। उनका तर्क है कि अमेरिकी वोटर लिस्ट में हजारों ऐसे नाम शामिल हैं जो वहां के नागरिक नहीं हैं। ट्रंप का दावा है कि ये गैर-नागरिक मतदाता मुख्य रूप से डेमोक्रेटिक पार्टी के पक्ष में मतदान करते हैं, जिससे रिपब्लिकन पार्टी और उनकी नीतियों को नुकसान पहुंचता है। भारत में जिस तरह से SIR प्रक्रिया के जरिए मतदाता सूचियों को अपडेट और सत्यापित किया जाता है, ट्रंप वैसी ही व्यवस्था अमेरिका में चाहते हैं। अमेरिका में 3 नवंबर 2026 को मिड-टर्म चुनाव होने हैं और ट्रंप की यह बेचैनी इसी चुनाव से जोड़कर देखी जा रही है। उनका कहना है कि जब तक वोटर लिस्ट से अवैध नाम नहीं हटाए जाएंगे, तब तक चुनाव की निष्पक्षता पर सवाल उठते रहेंगे।

12 करोड़ 80 लाख मतदाताओं का विश्लेषण

अपने दावों को पुख्ता करने के लिए ट्रंप ने कुछ आंकड़े भी पेश किए हैं। उन्होंने बताया कि वर्ष 2020 के वोटर रिकॉर्ड और नागरिकता संबंधी दस्तावेजों का मिलान किया गया है। इस शुरुआती विश्लेषण में 12 करोड़ 80 लाख मतदाताओं के रिकॉर्ड की जांच की गई, जिसमें से 24000 गैर-नागरिक मतदाताओं की पहचान हुई है। ट्रंप ने यह भी संकेत दिया है कि अभी 3 करोड़ 20 लाख मतदाताओं के रिकॉर्ड की जांच होनी बाकी है। उन्हें अंदेशा है कि पूरी जांच के बाद गैर-नागरिक मतदाताओं की यह संख्या काफी बढ़ सकती है। ट्रंप इस पूरे मुद्दे को राष्ट्रहित से जोड़ रहे हैं और उनका कहना है कि अमेरिका को बचाने के लिए 'सेव अमेरिका एक्ट' को हर हाल में पास करना होगा। उन्होंने 2020 के चुनावों का जिक्र करते हुए कहा कि अगर उस समय अवैध वोटों को हटा दिया जाता, तो परिणाम कुछ और ही होते।

विदेशी मूल के मतदाताओं का आंकड़ा

ट्रंप ने अपनी पोस्ट में उन देशों का भी जिक्र किया है जहां के मूल निवासी अमेरिका में अवैध रूप से वोटर बने हुए हैं। व्हाइट हाउस के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया गया है कि मेक्सिकन मूल के लगभग 3800 गैर-नागरिक वोटर हैं। इसी तरह कनाडाई मूल के 950 ऐसे लोग हैं जिनका जन्म कनाडा में हुआ लेकिन वे अमेरिका में वोट डाल रहे हैं। आंकड़ों के अनुसार, फिलीपींस और जमैका मूल के 900 वोटर, जर्मन मूल के 700, ब्रिटिश मूल के 650, क्यूबन मूल के 450, वियतनामी मूल के 400, हैती मूल के 400 और दक्षिण कोरियाई मूल के 350 वोटर इस सूची में शामिल हैं। इसके अलावा ट्रंप का दावा है कि 14500 अन्य वोटर भी हैं जो दूसरे देशों में पैदा हुए हैं लेकिन अमेरिका में मतदान का अधिकार रखे हुए हैं।

सत्ता का शब्दकोष और भारतीय प्रेरणा

ट्रंप की इस पूरी मुहिम में कुछ खास शब्द केंद्र में हैं, जिन्हें 'सत्ता का शब्दकोष' कहा जा सकता है। इनमें फर्जी वोटर, वोट चोरी, शुद्धीकरण, सत्यापन और घुसपैठ जैसे शब्द शामिल हैं। ट्रंप का कहना है कि नए कानून के जरिए वह इस पूरी व्यवस्था को दुरुस्त करना चाहते हैं। उन्होंने भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का नाम लेते हुए भारतीय चुनाव व्यवस्था की पारदर्शिता की सराहना की है। ट्रंप के दिमाग में भारत जैसा फोटो आईडी कार्ड और SIR प्रक्रिया पूरी तरह घर कर चुकी है। उनका मानना है कि अमेरिका की लोकतांत्रिक साख बचाने के लिए भारत जैसा कड़ा रुख अपनाना जरूरी है। ट्रंप की यह मांग अमेरिका में एक नई राजनीतिक बहस को जन्म दे चुकी है, जिसका असर आगामी चुनावों पर पड़ना तय माना जा रहा है।

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