सर्जियो गोर के जम्मू कश्मीर बयान पर पाकिस्तान ने अमेरिकी राजदूत को किया तलब

अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर द्वारा जम्मू कश्मीर को भारत का हिस्सा बताने पर पाकिस्तान ने अमेरिकी राजनयिक को तलब कर कड़ा विरोध दर्ज कराया है।

Aug 20, 2026 - 08:35
 0  0
सर्जियो गोर के जम्मू कश्मीर बयान पर पाकिस्तान ने अमेरिकी राजदूत को किया तलब

एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक घटनाक्रम में पाकिस्तान ने इस्लामाबाद में अमेरिकी चार्ज डी अफेयर्स को तलब किया है। यह कदम भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर द्वारा जम्मू कश्मीर को लेकर दिए गए हालिया बयान के विरोध में उठाया गया है। विवाद तब शुरू हुआ जब राजदूत सर्जियो गोर ने अपने श्रीनगर दौरे के दौरान जम्मू कश्मीर को भारत का एक अहम और अभिन्न हिस्सा बताया। इस बयान ने पाकिस्तानी नेतृत्व के भीतर तीखी प्रतिक्रिया पैदा कर दी है क्योंकि पाकिस्तान इस क्षेत्र को लेकर एक अलग अंतरराष्ट्रीय दृष्टिकोण रखता है और इसे विवादित मानता है।

विवाद की जड़: राजदूत सर्जियो गोर का बयान

भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर हाल ही में जम्मू कश्मीर के दौरे पर श्रीनगर पहुंचे थे। इस यात्रा के दौरान उन्होंने न केवल क्षेत्र की सुरक्षा और राजनीतिक स्थिति पर टिप्पणी की बल्कि इसे स्पष्ट रूप से भारत का हिस्सा भी बताया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि जम्मू कश्मीर भारत का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है और इसके अलावा गोर ने इस क्षेत्र की प्राकृतिक सुंदरता की जमकर सराहना की। उन्होंने कहा कि यह इलाका बेहद खूबसूरत है और उन्हें विश्वास है कि बहुत से अमेरिकी नागरिक यहां आकर इसकी सुंदरता को देखना और अनुभव करना चाहेंगे।

राजदूत गोर ने एक और महत्वपूर्ण प्रशासनिक संकेत दिया जिसने पाकिस्तान की चिंता को और बढ़ा दिया और उन्होंने कहा कि अमेरिका जम्मू कश्मीर से जुड़ी अपनी ट्रैवल एडवाइजरी यानी यात्रा परामर्श की समीक्षा कर सकता है और इसे डाउनग्रेड यानी कम जोखिम वाली श्रेणी में ला सकता है। यदि ऐसा होता है तो यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस बात का संकेत होगा कि क्षेत्र में सुरक्षा स्थिति में काफी सुधार हुआ है जो भारत के पक्ष को और मजबूती प्रदान करेगा। यह संभावित बदलाव क्षेत्र में सामान्य स्थिति की बहाली की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

पाकिस्तान का कड़ा विरोध और डिमार्श

पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने इस मामले पर अपनी नाराजगी जाहिर करने में बिल्कुल देरी नहीं की। 19 अगस्त को जारी एक आधिकारिक बयान में पाकिस्तान ने बताया कि इस्लामाबाद में तैनात अमेरिकी राजनयिक को विदेश कार्यालय बुलाया गया और उन्हें एक कड़ा डिमार्श सौंपा गया। पाकिस्तान ने अमेरिकी राजदूत की टिप्पणियों को गैर जिम्मेदार और तथ्यात्मक रूप से गलत करार दिया है। पाकिस्तान ने इस बात को पूरी तरह खारिज कर दिया कि जम्मू कश्मीर भारत का हिस्सा है और अपने पुराने दावे को दोहराया कि यह एक विवादित क्षेत्र है जिसका फैसला होना अभी बाकी है।

पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय ने जोर देकर कहा कि जम्मू कश्मीर के मुद्दे का समाधान संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों के अनुरूप ही होना चाहिए। राजनयिक को तलब करके पाकिस्तान ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि वह अमेरिकी अधिकारियों द्वारा दिए गए इस तरह के बयानों को हल्के में नहीं लेगा और इसे अपनी क्षेत्रीय नीति और अंतरराष्ट्रीय स्थिति के खिलाफ मानता है।

अमेरिका को उसकी पुरानी नीति की याद दिलाई

पाकिस्तान की बेचैनी इस बात से भी साफ झलकती है कि उसने अमेरिका को उसकी अपनी पुरानी कश्मीर नीति की याद दिलाने की कोशिश की। पाकिस्तान ने अपने बयान में कहा कि राजदूत सर्जियो गोर की टिप्पणी जम्मू कश्मीर को लेकर अमेरिका के उस लंबे समय से चले आ रहे रुख के साथ मेल नहीं खाती है जिसे वाशिंगटन दशकों से अपनाता रहा है। पाकिस्तान ने अमेरिका से यह भी मांग की कि भविष्य में उसके अधिकारियों द्वारा दिए जाने वाले सार्वजनिक बयान जम्मू कश्मीर के उस विवादित दर्जे के अनुरूप होने चाहिए जिसे पाकिस्तान और कुछ अंतरराष्ट्रीय मंचों द्वारा बताया जाता है। यह याद दिलाना वाशिंगटन पर कूटनीतिक दबाव बनाने की एक कोशिश है।

डोनाल्ड ट्रंप के मध्यस्थता प्रस्ताव का जिक्र

इस पूरे कूटनीतिक विरोध में एक दिलचस्प मोड़ तब आया जब पाकिस्तान ने पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का नाम लिया। पाकिस्तान ने अपने बयान में डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत और पाकिस्तान के बीच कश्मीर मुद्दे पर मध्यस्थता करने के पुराने प्रस्ताव की सराहना की। एक तरफ जहां पाकिस्तान ने वर्तमान राजदूत के बयान पर विरोध जताया वहीं दूसरी तरफ ट्रंप के मध्यस्थता वाले प्रस्ताव को सामने रखकर वाशिंगटन को यह याद दिलाने की कोशिश की कि एक समय में अमेरिकी नेतृत्व ने इस मुद्दे पर तीसरे पक्ष की भूमिका निभाने की इच्छा जताई थी। यह कदम अमेरिका को उसके पुराने बयानों की याद दिलाकर उसे एक तटस्थ रुख अपनाने के लिए मजबूर करने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।

भारत के लिए इस घटनाक्रम के मायने

भारत के दृष्टिकोण से यह पूरा घटनाक्रम अत्यंत महत्वपूर्ण है और इसे एक बड़ी कूटनीतिक सफलता के रूप में देखा जा रहा है और अमेरिकी राजदूत का जम्मू कश्मीर जाना उसे भारत का हिस्सा बताना और ट्रैवल एडवाइजरी में ढील देने की बात करना नई दिल्ली के लिए एक सकारात्मक संकेत है। भारत हमेशा से यह कहता रहा है कि जम्मू कश्मीर उसका अभिन्न और अविभाज्य अंग है और इससे जुड़े सभी मामले भारत के आंतरिक विषय हैं। पाकिस्तान द्वारा अमेरिकी राजनयिक को तलब करना और इतनी तीखी प्रतिक्रिया देना यह दर्शाता है कि सर्जियो गोर के शब्दों ने इस्लामाबाद में एक बड़ी कूटनीतिक हलचल पैदा कर दी है। यह घटनाक्रम बताता है कि कैसे एक प्रभावशाली देश के राजदूत का बयान पाकिस्तान के अंतरराष्ट्रीय नैरेटिव को चुनौती दे सकता है और भारत की स्थिति को वैश्विक मंच पर और मजबूत कर सकता है।

What's Your Reaction?

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow