डोनाल्ड ट्रंप की बड़ी चूक: ब्राजील के चुनाव को बताया भारत का राष्ट्रपति चुनाव
डोनाल्ड ट्रंप ने ब्राजील के चुनाव को गलती से भारत का चुनाव बता दिया। ट्रूथ सोशल पर की गई इस पोस्ट में उन्होंने अमेरिकी चुनाव प्रणाली को भ्रष्ट बताया।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर अपनी सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर चर्चा में हैं। इस बार उन्होंने एक बड़ी भौगोलिक और राजनीतिक चूक कर दी है। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रूथ सोशल पर ब्राजील में हो रहे राष्ट्रपति चुनाव को गलती से भारत का राष्ट्रपति चुनाव बता दिया। इस पोस्ट के जरिए वे अमेरिकी चुनाव प्रणाली की आलोचना कर रहे थे और उसे भ्रष्ट बता रहे थे, लेकिन इस दौरान उन्होंने देशों के नाम में भारी भ्रम पैदा कर दिया।
ट्रूथ सोशल पर ट्रंप का पोस्ट और गलती
पूरा मामला तब शुरू हुआ जब डोनाल्ड ट्रंप ने ट्रूथ सोशल पर एक संदेश साझा किया। उन्होंने अपने दावे में कहा कि भारत के राष्ट्रपति चुनाव के पहले चरण में 12 करोड़ 50 लाख लोगों ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। उन्होंने आगे लिखा कि वोटिंग खत्म होने के कुछ ही समय बाद उसी दिन नतीजे भी घोषित कर दिए गए। ट्रंप ने इस उदाहरण का इस्तेमाल अमेरिका की चुनाव प्रक्रिया पर निशाना साधने के लिए किया। उन्होंने तर्क दिया कि इतने बड़े पैमाने पर मतदान होने के बावजूद दूसरे देशों में नतीजे तुरंत आ जाते हैं, जबकि अमेरिका में इसमें बहुत देरी होती है।
हालांकि, जैसे ही यह पोस्ट सार्वजनिक हुई, लोगों ने तुरंत उनकी गलती पकड़ ली। ट्रंप जिस चुनाव की बात कर रहे थे, वह वास्तव में ब्राजील में हो रहा था। इसके अलावा, सोशल मीडिया यूजर्स ने यह भी याद दिलाया कि भारत में राष्ट्रपति का चुनाव सीधे जनता द्वारा नहीं किया जाता है। भारत में राष्ट्रपति का चुनाव एक निर्वाचक मंडल के माध्यम से होता है, जिसमें संसद के दोनों सदनों और राज्यों की विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्य शामिल होते हैं। ऐसे में 12 करोड़ 50 लाख लोगों के मतदान करने का दावा भारत के संदर्भ में पूरी तरह गलत था।
अमेरिकी वोटिंग सिस्टम की आलोचना और सुधार
अपनी पोस्ट में ट्रंप ने अमेरिका के कई प्रमुख शहरों और राज्यों का नाम लेकर उन पर तंज कसा। उन्होंने डेट्रॉइट, फिलाडेल्फिया और कैलिफ़ोर्निया का जिक्र करते हुए कहा कि इन जगहों पर वोटरों की संख्या बहुत कम होने के बावजूद वोटों की गिनती में हफ़्तों का समय लग जाता है और उन्होंने लिखा कि अमेरिका में वोटिंग सिस्टम पूरी तरह से भ्रष्ट है। जब सोशल मीडिया पर उनकी इस गलती को लेकर फजीहत होने लगी, तो ट्रंप ने अपनी पोस्ट में सुधार किया।
सुधारे गए पोस्ट में उन्होंने भारत की जगह ब्राजील का नाम लिखा। उन्होंने संशोधित करते हुए लिखा कि ब्राज़ील के राष्ट्रपति चुनाव के पहले दौर में आज 12 करोड़ 50 लाख लोगों ने वोट दिया और वोटिंग खत्म होने के कुछ ही देर बाद नतीजे भी आ गए। उन्होंने फिर से दोहराया कि अमेरिका के शहरों में गिनती करने में हफ़्तों लग जाते हैं, जिसका मतलब है कि यहां की व्यवस्था में खामियां हैं।
ट्रंप की पुरानी गलतियों का इतिहास
यह पहली बार नहीं है जब डोनाल्ड ट्रंप ने इस तरह की गलती की है और उनके पिछले बयानों और पोस्ट में भी कई बार देशों और स्थानों के नामों को लेकर भ्रम देखा गया है। इसी साल जुलाई के महीने में ट्रंप ने ईरान का जिक्र करते हुए उसे इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ जापान कह दिया था, जो कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काफी चर्चा का विषय बना था।
इससे पहले जनवरी में दावोस में आयोजित विश्व आर्थिक मंच की बैठक के दौरान भी ट्रंप ने ऐसी ही गलती की थी। वहां उन्होंने कई बार ग्रीनलैंड को आइसलैंड कहकर संबोधित किया था। इन गलतियों के कारण अक्सर सोशल मीडिया पर उनका मजाक उड़ाया जाता है और लोग उनकी जानकारी पर सवाल उठाते हैं। ब्राजील और भारत के बीच का यह ताजा भ्रम भी इसी कड़ी का हिस्सा माना जा रहा है।
ब्राजील चुनाव के वास्तविक आंकड़े
ट्रंप की इस पोस्ट से ठीक एक दिन पहले यानी 4 अक्टूबर को ब्राजील में राष्ट्रपति चुनाव के पहले चरण के लिए मतदान हुआ था। इस चुनाव में मुख्य मुकाबला मौजूदा राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा और पूर्व राष्ट्रपति जायर बोल्सोनारो के बेटे फ्लावियो बोल्सोनारो के बीच देखा गया और आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस चुनाव में किसी भी उम्मीदवार को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला।
चुनाव के नतीजों के आंकड़े इस प्रकार रहे:
- फ्लावियो बोल्सोनारो को कुल वैध मतों का 47 दशमलव 03 प्रतिशत वोट मिला।
- लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा को 45 दशमलव 16 प्रतिशत वैध वोट प्राप्त हुए।
चूंकि किसी भी उम्मीदवार को जीत के लिए आवश्यक 50 प्रतिशत से अधिक वोट नहीं मिले, इसलिए अब चुनाव दूसरे चरण में प्रवेश कर गया है। अब 25 अक्टूबर को फ्लावियो बोल्सोनारो और लूला के बीच दूसरे चरण का मुकाबला होगा, जिसमें ब्राजील के अगले राष्ट्रपति का फैसला होगा। ट्रंप ने इन्हीं आंकड़ों और इसी चुनाव प्रक्रिया का हवाला देते हुए अमेरिका की व्यवस्था पर सवाल उठाए थे, लेकिन शुरुआत में देश का नाम गलत लिख दिया था।
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